चित्रा ने हैदराबाद को नवाबों का शहर बता दिया। मैडम हैदराबाद निज़ामों का है… नवाबों का तो लखनऊ।
वीडियो पुराना है, लेकिन पत्रकारिता अब भी वही झोल वाली 🤣🤣
(ABP News : आपको रखे 1600 KM आगे) 🤣🤣 #घोरकलजुग#ChitraTripathiOnABP
हमारे देश ने ये सर्कस भी देखा था. नजाने और क्या क्या देखना है.
आज से 100 साल बाद जब बच्चे ये सब देखेंगे, तो हंसेंगे.
कहेंगे कि - कैसे एक आदमी ने देश की करोड़ों जनता को मूर्ख बनाया. सबसे खास बात कि जनता भी कितनी मूर्ख थी जो आसानी से जुमलों में फंस गई.
@tarunjatav50 हां, बाबासाहेब अंबेडकर को संस्कृत भाषा का ज्ञान था। उन्हें शुरुआत में जातिगत भेदभाव के कारण इसे पढ़ने से रोका गया, लेकिन बाद में उन्होंने इसे सीखा और महारत हासिल की। वे संस्कृत को राष्ट्रीय भाषा बनाने के पक्ष में भी थे।
"किसी ने बन्दर से मनुष्य बनते नहीं देखा, इसलिए डार्विन का सिद्धांत गलत है, इसे पाठ्य-क्रम से निकाल दिया जाए" - सतपाल सिंह
१. क्या हनुमान को सूर्य को निगलते देखा था?
२. क्या बंदरों को पुल बनाते देखा था?
३. क्या पुष्पक विमान देखा?....
और ऐसी ही गप्पों को लिखें तो महाभारत और रामायण और पुराण कम पड़ जायेंगे !
मधु किश्वर मानती हैं कि वोट चोरी हो रही है। वह कह रही हैं कि स्मृति ईरानी को एनडीए-1 में अयोग्यता के बावजूद मंत्री बनाया गया क्योंकि मोदी जी को एक रबड़ स्टैंप चाहिए था।
वो कहती हैं कि स्मृति ईरानी के पास इस सरकार को लेकर बहुत कुछ है वह कभी फूटेंगी तो भूचाल आएगा।
हिंदुत्व और बीजेपी की प्रबल सपोर्टर माने जाने वाली मधु का दावा है कि उन्होंने बीजेपी को कभी वोट नहीं किया। वो इस सरकार को पीएमओ कंट्रोल्ड सरकार कहती हैं।
मधु किश्वर ने सीएसडीएस, संजय कुमार, योगेन्द्र यादव और मोदी जी को लेकर तमाम चौंकाने वाली बातें कहीं हैं। वह संजय कुमार की योग्यता कर तमाम सवाल खड़े करती हैं। पूरी बातचीत नीचे लिंक में-
@madhukishwar
@sanjaycsds
@_YogendraYadav@smritiirani@LoknitiCSDS
10 गुमनाम से राजनीतिक दलों को 4,300 करोड़ रुपये का चंदा आखिर कैसे मिल सकता है? ये सभी गुजरात के दल हैं. इन्हें इतना बड़ा चंदा कौन दे रहा है?
अगर प्रधानमंत्री Modi कहते हैं कि उन्होंने भ्रष्टाचार पर लगाम कस दी है, तो फिर यह 4,300 करोड़ किसे और क्यों दिये गये ? परदे के पीछे किसकी मदद की जा रही है?
आख़िर इस चंदे के पैसों से कौन खरीदा जा रहा है—वोटर खरीदा जा रहा है, या नेता खरीदा जा रहा है ?
भारत में कुल 22,500+ ट्रेनें चलती हैं जिनमें से सिर्फ 13,400 ट्रेनें ही यात्री ट्रेन हैं।
तो अब 12,000 ट्रेन सिर्फ बिहार के लिए चलेगी तो बाकी भारत क्या पैदल सफर तय करेगा?
क्या जुमलेबाजी चल रही है..!!
अगर भीड़, जुनून, जज़्बा कोई पैमाना हो सकता है तो बिहार चुनाव का फ़ैसला हो चुका है।
लेकिन वोट चोरी के दौर में जन समर्थन कोई मायने नहीं रखता। अगर महागठबंधन धांधली रोकने का इंतज़ाम नहीं कर पाया तो वह एनडीए और चुनाव आयोग की ताक़त से जीत नहीं पाएगा।