ये मोदी-मोहन यादव की पुलिस है। मुसलमान देखते ही ख़ून की प्यासी हो जाती है। इतनी बर्बरता उसके अंदर तो पहले से बैठी रहती है मगर जब सरकार सिर पर हाथ रहकर कहे मरो तो वह पूरी बेरहमी से टूट पड़ती है।
ये वीडियो उज्जैन का है मगर ये दृश्य देश के किसी भी हिस्से में देखा जा सकता है। बीजेपी शासित राज्यों में तो ये बहुत आम बात है।
भारत की अधिकतर आबादी नरेंद्र मोदी को वोट नहीं करती तो फिर चुनाव में जीत कैसे मिलती हैं ।
सब ज्ञानेश कुमार का खेल है । गिरफ्तारी होनी चाहिए । जाँच होनी चाहिए ।
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।
2. इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।
3. वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक।
4. साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।
ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा… कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है ये भी हास्यास्पद है। 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?
सवाल ये भी है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ योजना में ही रहेगा या कभी बनेगा भी… या काग़ज़ों में बनकर उसका ‘हिस्सा-बाँट’ हो चुका है।
भाजपा राज में हुआ हर निर्माण चलता कम है… धँसता, ढहता, गिरता ज़्यादा है।
एंकर ओर BJP प्रवक्ता - बस थोड़ी सी ही महंगाई बढ़ी है!
जवाब - सुबह उठते ही 29₹ गैस का दाम बढ़ गया, थोड़ा सा बढ़ा!
1% के पास 40% धन है, हमसे थोड़ा सा हो ज्यादा है!
19% बच्चे कुपोषित है, बस थोड़ा सा कुपोषित है!
हर तीसरा बच्चा बौना पैदा होता है, थोड़ा सा बौना पैदा हो रहा!
भारत भुखमरी में 123 देशों में 102 वें नंबर पर है, बस थोड़ा सा भुखमरी है!
ये कैसा थोड़ा सा है? शर्म भी नहीं आती!
मोदी जी कहते है, देश संकट में है जनता पब्लिक ट्रांसपोर्ट से चले!
शाम होते ही, महामानव 30-32 गाड़ियों के काफिले के साथ रोडशो पर निकल जाते है!
फिर कहते है, विदेश भ्रमण मत करिए और दूसरे ही दिन 4 देशों की विदेशी यात्रा पर मेलोडी खिलाने निकल पड़ते है!
SBI की रिसर्च कहती है कि गरीबी रेखा में वो आते है गाँव में जिनका महीने की आमदनी 1,632 रुपये, और शहर में 1,944 रुपये है वो गरीब है। उससे 1₹ ज्यादा वाले अमीर है?
यह आंकड़ों में गरीब को मिटाने का तरीका है। रेखा इतनी नीचे खींच दो कि कोई उसके नीचे बचे ही नहीं। और ऐसे सबको अमीर बना दो?
माननीय न्यायालय में आज हुई सुनवाई के दौरान Anjana & Anr. मामले में कोई Interim Relief प्रदान नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की गई है।
हम न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान करते हैं और न्यायालय के समक्ष अपना विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों एवं विधिक सलाह के आधार पर अपने अधिकारों की रक्षा हेतु उचित कानूनी कदमों तथा Counter Claim पर भी विचार किया जाएगा।
हमें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान न्यायालय में तथ्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए, न कि मीडिया ट्रायल या सोशल मीडिया की बहसों के आधार पर।
अब 17 जून को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की प्रतीक्षा करेंगे।