जंतर मंतर की सबसे बड़ी उपलब्धि पितृसत्ता से आज़ाद होती लड़कियाँ हैं। दुपट्टे की बजाय संविधान संभालती लड़कियाँ हैं । अपने हक़ के साथ अपने ज़िम्मे का समीकरण समझती लड़कियाँ हैं ।
पूरी बात वीडियो में।
#JantarMantar#GirlsWhoSpeak#StudentProtest#Democracy
जब कोई औरत किसी अहम कुर्सी पर बैठती है, तो क्या हम उसके काम को देखते हैं, या पहले उसका नाम, मज़हब, खानदान और औरत होना तौलने लगते हैं? अदालत में फैसला होना चाहिए, या जज की पेशी?
#tabassumkhan#indianjudiciary#feminism#madampatansheel
Not just incompetence it is complicity and patronage to goons. It’s like asking women to stay indoors if they don’t have hausla for assaults and harassment. #SambhalPolice
दिल्ली के प्रगति मैदान में कल शाम तीन बजे. अपने अजीज़ और शानदार शख़्सियत @masijeevi सरजी की एक नायाब किताब के बहाने कुछ दिलचस्प और लीक से हटकर सुनने को मिलेगा. आप सब भी आइएगा. बतियाएँगे. @UnboundScript के स्टॉल पर भेंट होगी.
किताबों के मेले में इस बार एक ऐसी किताब आ रही है, जिसे मेरे कहने से हर नौजवान को ज़रूर पढ़ना चाहिए. इसलिए नहीं कि यह किताब ऐसे शानदार शख़्स की है, जिनका मुझसे बहुत गहरा रिश्ता है. बल्कि इसलिए क्योंकि ये लीक से हटकर देखने और समझने की एक नायब कोशिश है. @masijeevi बधाई सरजी.
प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षद्म घटाटोप के बीच जब वायरल मोटिवेशनल कथावाचक सपनों को बेंच रहे हों; यह किताब आपको ठहरने व अपने चारो तरफ़ देखने को कहेगी. यह किताब बताएगी कि कैसे दुनिया तमाशों की सौदागिरी में नौजवानों को पहले सपने बेंचती है, फिर टूटने पर आत्मघाती अपराधबोध से भरकर लावारिस छोड़ देती है.
'लुक अराउंड' एक नौजवान को ख़ुद से व अपने चहुँओर के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं से जोड़कर ऐसा विश्लेषण करने की कोशिश का नाम है, जो आपको अपने आपसे रूबरू कराएगी. चूँकि विजेंद्र जी वहाँ बात करते हैं, जहां अमूमन कोई नहीं बात कर रहा है. इसलिए यह बेहद नया काम है.
Vijender Chauhan जी के साथ मैंने तक़रीबन चौदह साल काम किया है. यह निजी आग्रह भी हो सकता है, मगर बहुत क़रीब से देखने के बाद मैं इस आत्मविश्वास से कह रहा हूँ कि जितना प्रभावित आप इन्हें UPSC का मॉक-इंटरव्यू लेते नहीं हुए होंगे, उससे ज़्यादा गहराई से ये किताब आपको इनसे परिचित कराएगी.
अभी प्री-बुकिंग कर डालिए, बाक़ी पुस्तक मेले में भेंट भी होगी-
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ये अमृतकाल के भारत का एक स्वाभाविक दृश्य है. ये शख़्स भी एक इंसान है. इसे भी भारत के संविधान ने गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिया है. मगर सरकारें इस काम के लिए मशीनें नहीं उपलब्ध करवा सकीं. या ऐसे काम के लिए पूरा ड्रेस, सुरक्षा उपकरण न दे सकीं. क्योंकि ये काम सब नहीं करते. सब ये काम करते तो कब का ये काम इंसान बंद करके मशीनों से होने लगता. क़ानून बन जाते. जाति जनगणना इसीलिए ज़रूरी है ताकि इनकी पहचान हो और ऐसे हर शख़्स को उनके हिस्से का हक़ अधिकार मिल सके.
लेटरल एंट्री मामले पर बोले प्रकाश आंबेडकर - "मैंने पहले भी बोला था, आज फिर से बोला रहा हूं, 'धर्म खतरे में नहीं है, आरक्षण खतरे में है'..."
@Prksh_Ambedkar
Meet the Man Who Blamed the #Kolkata Rape & Murder Victim. On his watch her parents were lied to & told it was suicide. He may've tampered with evidence. He wasn't sacked; he was given a new gig. He's Mr Cover Up! My take on #RgKar Principal. Why's Sandip Ghosh being protected?
यह मौतें - कैम्पसों में होने वाली आत्महत्याओं से होने वाली, कोटा आत्महत्याएँ या आपदा मृत्यु- हर रोकी जा सकने वाली असामयिक मृत्यु संस्थानिक हत्या है - ये बाढ़ मानसून की नहीं है -
yu can take wisdom for this UPSC teacher, his credibility not dented at all in all of this protest. he takes common ground and talk tough on the subject where yu only look at just single perspective.