किसी भी गंभीर विषय की सार्थकता इस स्तर पर बात करने से ख़त्म नहीं हो जाती।
बात एक एग्जाम की है ही नहीं। बच्चे वैसे भी एग्जाम दे कर ही कोर्स में दाख़िला लेते हैं। 4 सालों में कम से कम 12 एग्जाम देते हैं। और निकलने के बाद PG एंट्रेंस की परीक्षा देते हैं।
अगर इतने एग्जाम के बाद आप गुणवत्ता नहीं परख सकते तो एक और एग्जाम से क्या हो जाएगा।
बात वो नहीं है।
बात ये है कि क्या अब सरकार की हेल्थ एजुकेशन पॉलिसी धारा 144 की तरह एक तत्काल प्रभाव से लगने वाले चिट्ठी की तरह काम करेगी?
आपने गुणवत्ता देखने के किए जो इतने एजेंसी लगा रखे हैं उनकी जवाबदेही क्या है?
एक बैच के लिये आपने दो नियम कैसे तय किये?
क्या NCISM के अधिकारियों ने किसी ख़ास लोगों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए मनमाने ढंग से तिथि निर्धारित कर दी??
एडमिशन लेने के बाद आपने क्यों नियम में परिवर्तन किए?
किसी कॉलेज के ज़्यादातर बच्चे अगर एग्जाम क्लियर नहीं करते हैं तो उन पर क्या करवाई होगी इसकी रूपरेखा क्या है?
सवाल ये सभी है, ये नहीं है कि बच्चे एग्जाम से क्यों डर रहे हैं?
#JusticeForAYUSHStudents
AYUSH students and NEET aspirants are fed up with systemic failures. The government must address the NEXT exam and NEET scam issues. #JusticeForAYUSHStudents