मांझी तेरी कश्ती के तलबदार बहुत हैं,
इस पार कुछ मगर उस पार बहुत हैं..
जिस शहर में तुने खोली है शीशे की दुकान,
उस शहर में पत्थर के ख़रीददार बहुत हैं....
~ अज्ञात
"ना फिसलो इस उम्मीद में,
कि कोई तुम्हें उठा लेगा,
सोच कर मत डूबो दरिया में,
कि तुम्हें कोई बचा लेगा,
ये दुनिया तो एक अड्डा है
तमाशबीनों का दोस्तों,
अगर देखा तुम्हें मुसीबत में,
तो हर कोई यहां मज़ा लेगा।"
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता श्री राजीव त्यागी जी की असामयिक मृत्यु मेरे लिए एक व्यक्तिगत दुःख है। हम सबके लिए अपूर्णीय क्षति है।
राजीव जी विचारधारा समर्पित योद्धा थे। समस्त यूपी कांग्रेस की ओर से परिजनों को हृदय से संवेदना।
ईश्वर उनके परिवार को दुख सहने की शक्ति दें।