गुजरात निकाय चुनावों को UGC पर रेफरेंडम मानने वाले चोट्टों ने बांकीपुर को अभी तक 'हल्दी की खेती में व्यस्त भाजपा वोटर' या 'भाजपा ये सब छोटे उपचुनाव में रुचि नहीं लेती' टाइप के सुगम संगीत वाले पोस्ट किए या नहीं?
ऐसे लड़चट्ट समर्थक भगवान किसी पार्टी को ना दे! यहाँ धरातल पर मैया ^& पड़ी है और इनका ध्यान हवा में है! नितिन नबीन पंद्रह दिन में तीन बार पटना गए, रहे। कई बड़े नेता प्रचार करने गए और फिर भी पीके जीत गया।
तुमलोग आँड़ तौलते रहे और बताते रहो कि क्यों भाजपा का कोर वोटर इंटैक्ट है और मोदी जी की जय-जयकार कर रहा है। बह₹#%! इनसे निकम्मा और चाटुकार (और चूतिया) समर्थक नहीं देखा है मैंने!
राहुल गाँधी वाले भी बीच-बीच में हाथ खड़े कर लेते हैं, पर ये वाला खड़ा कोयला है साला! जल कर राख हो जाएगा पर उससे उठता धुआँ मोदी जी के नाम का होगा।
भाजपा न केवल आरक्षण बढ़ाने के पक्ष में रही है, बल्कि @BJP4India वह पार्टी है जिसने 2001 में निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की माँग की और कुछ वर्ष पूर्व खट्टर ने हरियाणा में उसे लागू करने की घोषण की। कोर्ट ने इसे निरस्त किया।
इसलिए, जिसे भी यह लगता है कि भाजपा आरक्षण कम करेगी, वह इमोशनल मूर्ख है। आपको मोदी का वह भाषण याद है संसद का जिसमें नेहरू को कोट करते हुए कहा था कि नेहरू नहीं चाहते थे आरक्षण आए क्योंकि यह देश के लिए हानिकारक है?
सत्य यह है कि कारण जो भी रहे हों, नेहरू और राजीव गाँधी दो ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने आरक्षण का विरोध किया और तार्किकता के साथ किया। बाकी मामलों में वो बेकार थे, वह बात अलग है।
अतः, मुझे यह स्पष्ट दिखता है कि 2028 के बजट/मानसून सत्र तक, @narendramodi निजी क्षेत्रों में ग्रुप डी के समकक्ष नौकरियों में 50% तक आरक्षण की घोषणा करेंगे। और इनका दुर्भाग्य यह होगा कि उसका क्रेडिट राहुल गाँधी ले जाएगा।
भाई साहब हिम्मत चाहिए। इतना थूक क चाटने के बाद भी X पे आके ऐसे डायलाग मरने के लिए हिम्मत चाहिए। कल के लौंडे इन्हे उँगलियों पर नचा रहे हैं और ये यहाँ बॉलीवुड के डायलाग मार रहे हैं।
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
Bagga ji nahi chahiye ab Modi. Ab to Delhi mein @myogiadityanath Ji chahiye. 60 saal mein to sarkar bhi retire kar deti hai, Modi ji se kab tak kaam karwaoge??
वो झुका था शाहीन बाग में, तब मरे थे तिरपन
किसान आंदोलन में फिर झुका, छाती थी छप्पन
फर्जी आंदोलन के नल्लों ने लाया घुटनों पर इस बार
अबकी बार मोदी सरकार, अबकी बार मोदी सरकार
यही चूतियापा मेरी समझ से बाहर है! यह वही बात हुई कि मैंने एक मिनट में 50 थप्पड़ खा लिए, हिला भी नहीं, रिकॉर्ड बन गया है!
तुम्हारे सबसे बड़े नेता को तीन नल्लों ने रात के बारह बजे वीडियो बनाने पर विवश कर दिया और तुम उसके व्यू गिन रहे हो? यह कोई उपलब्धि नहीं है! यह एक संख्या है जिसका कोई विशेष अर्थ नहीं है।
ईश्वर इन मूर्खों को सद्बुद्धि दे! Genius has its limits, idiocy has none.
NEET-PG 2025, cut-off:
A) Orthopaedics seat filled at:
4 marks out of 800.
B) Obstetrics and Gynaecology seat:
44 marks out of 800.
C) General Surgery seat filled at:
47 marks out of 800.
D) Biochemistry:
minus -8 marks out of 800.
E) Transfusion Medicine:
10 marks out of 800.
F) Anatomy:
11 marks out of 800.
G) MS Orthopaedics seat filled at:
1 mark out of 800 in a medical college in Hyderabad.
H) MD Forensic Medicine seat filled at:
12 marks out of 800 in a Govt medical college.
I) MD Pathology seat filled at:
24 marks out of 800 in a Govt medical college.
In NEET-PG 2025, candidates with scores as low as –40 out of 800 were allowed to participate in PG counselling. A negative score was considered qualifying.
These extremely low scores, at which seats were actually allotted, indicate a serious crisis in academic standards. A reasonable minimum qualifying merit must be established to maintain the integrity of medical education and the healthcare system.
Forget about dialogue or discussion. So far, neither the Government nor the Opposition has said a word about this because it does not suit their agenda, and it would affect their vote banks and political interests.
Even those who are protesting today in the name of concerns about the education system are not addressing this issue because they too have political ambitions and know that speaking about it could cost them support rather than gain it.
मेरठ में जिस "जय भीम" वाले व्यक्ति ने पुलिस वैन में फांसी लगाने की कोशिश की थी और उसको ASP ने थप्पड़ मारा था,
उसने अब ASP के साथ-साथ 50 और पुलिसकर्मियों पर SC/ST एक्ट लगा दिया है!
Enjoy the drama!!
जय भीम!!
😂😂
सर की पार्टी ने जो थूक के चाटा है सर जी अब मीडिया पे बैठ के उसका स्वाद बातएंगे। वाह डाक साब वाह !! आपका सारा ज़ोर हम जैसों (@ajeetbharti) पर ही चलता है।
1. एकलव्य एक राजकुमार था, कोई शोषित पीड़ित वंचित नहीं! उसका वध श्री कृष्ण ने किया था!
ये कौन बताएगा?
2. कर्ण को परशुराम जी शस्त्र विद्या सिखाई थी!
ये कौन बताएगा?
3. दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारने के अधिकतर मामलों में आरोपी खुद बहुजन होते हैं!
ये भी कौन बताएगा?
पता नहीं किसकी धज्जियां उड़ रहीं हैं? चीन मॉडल की या इनके खुद के अल्पज्ञान की!😂
हम उस सदी में जी रहे हैं जहाँ SC/ST एक्ट में अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए जान देनी पड़ती है….? रिटायर टीचर राजाराम गोस्वामी ने सुसाइड लेटर लिखकर दी जान
सुसाइड नोट में लिखा:- साल 2002 में राजाराम गोस्वामी के खिलाफ झूठा SC/ST एक्ट का केस दर्ज हुआ था।तत्कालीन SP एंटोनी देवकुमार ने खुद थाने में बैठकर SC/ST का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। उन्हें थाने में प्रताड़ित किया, कपड़े उतारकर मारे, पानी में गोबर डालकर पिलाया
24 साल से केस लड़ रहे राजाराम हार गए। इस मामले पर मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह चुप्पी क्यों है? मामला UP के ललितपुर का
1978 के गीता और संजय चोपड़ा मर्डर केस (रंगा-बिल्ला केस) पर Amazon prime ने मूवी बनाई, लेकिन उसमें जबर्दस्ती भीम-मीम एंगल डाल दिया है जिसका असली घटना से कोई लेना देना नहीं!
असल VP गुप्ता (पुलिस इंस्पेक्टर) को "जय प्रकाश जाटव" बना दिया, जिसके घर मे फुले और अम्बेडकर की तस्वीरें हैं, जिसको जातिगत भेदभाव झेलना पड़ा है!
उसके पिता से जय भीम के नारे लगवाए जा रहे हैं!
इंस्पेक्टर के मेहनती साथी है "जावेद मुर्तज़ा"!
पत्रकार प्रभा दत्त को बना दिया "निसार"!
और बाबूलाल जिसने बच्चों को बचाने की कोशिश की थी, उसको बना दिया "सलीम"!
और आलसी हवलदार बना दिया "मिश्रा"!
बस इसी तरह एक खौफनाक असल घटना में भी इन्होंने अपना एजेंडा चला दिया!
और लोग कहते हैं कि narrative से क्या होता है!