@myogiadityanath@myogioffice
आदरणीय योगी जी विभाग तो जवाब देते नहीं हैं अतः आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि कृपया बतायें Ghaziabad No Power Cut Zone है क्या, अगर है तो THomes TandT Siddharth vihar Gzb में ��िन में कई बार बिजली क्यूँ जाती है? एक टीम गठित कर के जाँच की जानी चाहिय
@nishikant_dubey महोदय,ध्यान रखिएगा कहीं देर ना हो जाए,जातिगत वोटबैंक की राजनीति के लिए पारिवारिक पार्टियां पहले से अपनी दुकान खोले बैठी है,ऐसे में अ��र बीजेपी भी उसी राह को पकड़ेगी तब चिंता का विषय है।
@SudhanshuTrived,@sambitswarajआप जैसे प्रखर वक्ताओं से आशा है आप भी कुछ बोलेंगे।
#UGCRollBack
आज 24 August 2025 को TandT THomes Siddharth vihar Ghaziabad के residents ने विशेष कर tower B के लोगों ने TandT management की ज्यादतियों के विरुद्ध प्रदर्शन किया.
@myogiadityanath@myogioffice@UPRERA@dm_ghaziabad
@AshwiniVaishnaw Sir,One thing which never changed is the Railway control room system,an express train 12584 dbl dckr stop 2hr on Lucknow uter & pass 8 othr trains on the eve of Rakshabandhan "JUST WOW".
Safe for girls?@ABPNews@RailwayNorthern@drm_lko@indiatvnews@GM_NRly
@dm_ghaziabad@gdagzb@myogiadityanath@HTNoidaGzb@GzbNagarNigam
T&T{Thomes} Siddharth vihar, डिजिटल होम्स की हक़ीक़त बंदरों का आतंक and monitor lizards roaming free in our society. Ghaziabad Nagar Nigam और अन्य नगरीय प्रशासन शायद आदरणीय योगी जी के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं
@narendramodi@nsitharaman आपका बहुत धन्यवाद।आपसे उम्मीद लगाना हमारी गलती थी,आप ऐसे ही IAS की जेब भरने वाले बजट पेश करते रहिए।आम न���करी पेशा जानता तो पैदा ही आपकी जेब भरने के लिए हुई है,हमारी इस्थिति रोड पर पेशेवर भिकारियो से ज़्यादा कुछ भी नहीं।@BJP4India @myogiadityanath ,माफ़ करे अब और नहीं सह पाएँगे।🙏
@ajeetbharti@BJP4India जो अपनी ग़लतियों से भी ना सीखे ऐसी मूर्ख सरकार से अब उम्मीद रखना बेफ़क़ूफ़ी है।
@narendramodi काश आप आम जनमानस की व्यथा समझ पाते।चुनाव जाति धर्म पर और राशन बाँट के जो आप लड़ रहे हैं ऐसे में @BJP4Indiaऔर अन्य पार्टियों में कोई फ़र्क नहीं है, समय है आपको अनफोलो करने का।
धन्यवाद 🙏
इस बजट के बाद मैं @BJP4India का नाम भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (लेनिनवादी-नेहरूवादी-मार्क्सवादी-गाँधीवादी-समाजवादी-मुलायमवादी-लालूवादी-लोहियावादी-मोदीवादी) करने का प्रस्ताव रखता हूँ।
@SanjayAzadSln@ArvindKejriwal हाँ अब तो रेलवे स्टेशन से भी सिक्के वाली मशीन ग़ायब हो गई है , एक काम करो किसी धर्म काँटे पर पहले नीली वैगन आर में बैठा कर फिर उससे उतार कर नाप लो जो अंतर आये वो क्रांतिकारी सटीक वजन होगा ।
#kejri की चाहत है कि sighvi को RS पहुँचाये ,SC में सेटिंग के दम पर जो जमानत दिला सकता है वो आगे बहुत काम आ सकता है।टिक्की के ठेले वाली दो���्त मानती नहीं,singhvi शॉर्ट वीडियो टेप कांड एक्सपर्ट है और PA साब पुराने एडिटर।swati BJP एजेंट बना राज्यसभा सीट सिंघवी साब को दिलानी है ।
#AAP
पार्टी में अपने मूल्यवान सहयोगी और दशकों से मेरे मित्र रहे सुशील मोदी जी के असामयिक निधन से अत्यंत दुख हुआ है। बिहार में भाजपा के उत्थान और उसकी सफलताओं के पीछे उनका अमूल्य योगदान रहा है। आपातकाल का पुरजोर विरोध करते हुए, उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे बेहद मेहनती और मिलनसार विधायक के रूप में जाने जाते थे। राजनीति से जुड़े विषयों को लेकर उनकी समझ ब���ुत गहरी थी। उन्होंने एक प्रशासक के तौर पर भी काफी सराहनीय कार्य किए। जीएसटी पारित होने में उनकी सक्रिय भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति!
सुप्रीम कोर्ट के कुछ जज इस चुनाव को प्रभावित करने के कोशिश में लगे हुए हैं। वह चुनावी मौक़े पर अपने शक्तियों का दुरुपयोग करने से भी बाज नहीं आ रहे। चाहे इलेक्टोरल बॉण्ड का विषय हो, बाबा रामदेव का विषय हो अथ���ा अब संविधान को तार तार करके केजरीवाल को बेल देने का मामला हो, यह पूरी तरह से चुनावों को प्रभावित करने क��� प्रयास है।
सुप्रीम कोर्ट जैसे माननीय संस्थानों को अपने एजेंडे के लिए जजों द्वारा प्रयोग करके उसे बदनाम करने का यह कार्य बहुत ही ओछा और निकृष्टता से भरा हुआ है।
भारत के इतिहास में शायद आज जजों द्वारा यह पहला फैसला होगा जिसने भारत के आम नागरिकों को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया और नेता को प्रथम दर्जे का।
मैं भारत का नागरिक होने के नाते जजों द्वारा सुप्रीम कोर्ट को बदनाम करने वाले इस नि���्णय की न केवल आलोचना करता हूँ बल्कि सुप्रीम कोर्ट से माँग करता हूँ कि संवैधानिक बेंच बनाकर आम नागरिकों को अपमानित करने वाले इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। केजरीवाल को बेल मिले, न मिले से महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि उसका अधिकार आम नागरिकों के अधिकार से अधिक कैसे?
सुप्रीम कोर्ट हो अथवा कोई भी संस्था उसका मानहानि कोई आम व्यक्ति चाहकर भी तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसके निर्णयों में कोई पक्ष��ात न दिखे, संविधान का अपमान न दिखे। लेकिन यदि जज यह सोचते हैं कि कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट के भरोसे वह न्यायालय की गरिमा बनाकर रख पायेंगे तो यह सोचना कोरी मूर्खता है।
मुख्य न्यायाधीश को संवैधानिक पीठ बनाकर केवल इस बात पर विचार करवाना चाहिए कि क्या नेताओं अधिकार आम आदमी के अधिकार से ज़्यादा हैं?
न्यायपालिका के इतिहास में एक शर्मनाक दिन।