6 year old girl in Meerut was abducted and nearly raped, a passerby caught the 40 year old accused Mohammad Mubashir, mob beat him, police arrested him and filed serious charges.
Now @khanumarfa will post being a Muslim is tough in Modi's India
Nehru Achievements :
- Responsible for partition
- Lost Kashmir to Pakistan
- Lost India- China War
- Lost Aksai chin
- Failed economic policy
Modi Achievements:
- Abrogated Article 370
- Built Ram Mandir
- 3rd largest economy in the world
- Brought Pakistan to the knees
- Infrastructure & Digital Revolution
Choose your leaders wisely!!!
This is sheer hatred toward non-Muslims. Radical Islamists in Bangladesh cut down an 900+ year-old banyan tree bcoz Hindus worshipped it. Temples & churches are under attack, & Hindu, Christian, & Buddhist girls are being forced to wear burqa & hijab. But no news in leftist media
आखिर बेसिक शिक्षकों के साथ ही ऐसा अन्याय क्यो?
1 सितंबर 2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार पूर्व गामी प्रभाव से वर्तमान में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में सेवारत सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा(TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है. एक विचित्र विडंबना यह भी है कि जिन शिक्षकों की सेवाएं 5 साल से कम है उन्हें तो 5 साल तक सेवा में बने रहने का अवसर प्रदान किया गया है अर्थात उन्हें योग्य माना गया है. परंतु जिन शिक्षकों की सेवाएं 5 वर्ष से अधिक हैं उन्हें 31 अगस्त 2028 तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी है अर्थात वह अयोग्य हैं.
सबसे पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा की संकल्पना उच्च शिक्षा में की गई थी. उस समय डिग्री कॉलेज या विश्वविद्यालय में लेक्चरर के पद पर नियुक्ति हेतु नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था. परंतु उस समय भी किसी माननीय न्यायालय द्वारा या किसी सरकार द्वारा यह नहीं कहा गया कि उसके पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए नेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा . इसी तरह से अभी हाल ही में कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश राज्य में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET) पास करना अनिवार्य किया गया है. राज्य सरकार की किसी भी तृतीय सेवा में नियुक्ति के लिए वही लोग पात्र होंगे जिन्होंने प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट(PET) उत्तीर्ण किया होगा. लेकिन यहां भी यह प्रावधान नहीं किया गया की जो कर्मचारी पूर्व में नियुक्त हैं उन्हें भी सेवा में बने रहने के लिए प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट(PET) उत्तीर्ण करना होगा.
कुल मिलाकर किसी भी विभाग में भर्ती के लिए नियम समय-समय पर बनते रहते हैं और उनमें परिवर्तन होता रहता है. लेकिन आज तक के इतिहास में यह कभी नहीं देखा गया की जो पूर्व में नियुक्त कर्मचारी या शिक्षक हो वह वर्तमान मैं जारी की गई भर्ती नियमों के अधीन आते हों. केवल बेसिक शिक्षकों के लिए यह अभूतपूर्व निर्णय किया गया है. एक बड़े चिंतन का विषय है कि आखिर बेसिक शिक्षकों से परेशानी क्या है? जो देश के नागरिकों का निर्माण करते हैं उन्हीं शिक्षकों को क्यों इस तरह से हताशा में डाला जा रहा है. आज पूरे देश का 25 लाख शिक्षक एक हताशा की स्थिति से गुजर रहा है. उसको अपने तथा अपने परिवार के भविष्य को लेकर इतनी चिंता है कि वह अन्य किसी विषय में सोच भी नहीं सकता है. अब मानसिक रूप से बीमार शिक्षक किस तरह की शिक्षा प्रदान करेगा क्या यह बात सोचने की नहीं है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को अंतिम नहीं माना जा सकता है. भारत की संसद को किसी भी नियम में परिवर्तन करने का अंतिम अधिकार प्राप्त है.
अब इतना कुछ होने के बाद भी केंद्र की सरकार कान में तेल डालकर क्यों बैठी है? ऐसा नहीं है कि प्रकरण केंद्र सरकार के संज्ञान में नहीं है. दर्जनों माननीय सांसदों द्वारा इस प्रकरण को संसद में उठाया जा चुका है. इसके अतिरिक्त टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले दिल्ली के रामलीला मैदान में देश भर के लाखों शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन करके सरकार को जगाने का भी प्रयास किया है. परंतु केंद्र सरकार के किसी जिम्मेदार द्वारा अभी तक इस विषय में किसी भी तरह का कोई बयान नहीं दिया गया. यह अत्यंत ही दुखद है. कहने में कोई संकोच नहीं कि देश के कर्णधारों का निर्माण करने वाले बेसिक शिक्षकों के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है. इस विषय पर एक लोक कल्याणकारी सरकार को तुरंत कोई ना कोई कार्रवाई करनी चाहिए जिससे देश के लगभग 25 लाख शिक्षक और उनके परिवारों ( जो कि निश्चित रूप से इसी देश के नागरिक हैं ) का भविष्य संकट में न पड़ने पाए.
@DrDCSHARMAUPPSS@RamMurtiThakur@PMOIndia@myogiadityanath
आखिर बेसिक शिक्षकों के साथ ही ऐसा अन्याय क्यो?
1 सितंबर 2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार पूर्व गामी प्रभाव से वर्तमान में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में सेवारत सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा(TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है. एक विचित्र विडंबना यह भी है कि जिन शिक्षकों की सेवाएं 5 साल से कम है उन्हें तो 5 साल तक सेवा में बने रहने का अवसर प्रदान किया गया है अर्थात उन्हें योग्य माना गया है. परंतु जिन शिक्षकों की सेवाएं 5 वर्ष से अधिक हैं उन्हें 31 अगस्त 2028 तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी है अर्थात वह अयोग्य हैं.
सबसे पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा की संकल्पना उच्च शिक्षा में की गई थी. उस समय डिग्री कॉलेज या विश्वविद्यालय में लेक्चरर के पद पर नियुक्ति हेतु नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था. परंतु उस समय भी किसी माननीय न्यायालय द्वारा या किसी सरकार द्वारा यह नहीं कहा गया कि उसके पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए नेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा . इसी तरह से अभी हाल ही में कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश राज्य में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET) पास करना अनिवार्य किया गया है. राज्य सरकार की किसी भी तृतीय सेवा में नियुक्ति के लिए वही लोग पात्र होंगे जिन्होंने प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट(PET) उत्तीर्ण किया होगा. लेकिन यहां भी यह प्रावधान नहीं किया गया की जो कर्मचारी पूर्व में नियुक्त हैं उन्हें भी सेवा में बने रहने के लिए प्राइमरी एलिजिबिलिटी टेस्ट(PET) उत्तीर्ण करना होगा.
कुल मिलाकर किसी भी विभाग में भर्ती के लिए नियम समय-समय पर बनते रहते हैं और उनमें परिवर्तन होता रहता है. लेकिन आज तक के इतिहास में यह कभी नहीं देखा गया की जो पूर्व में नियुक्त कर्मचारी या शिक्षक हो वह वर्तमान मैं जारी की गई भर्ती नियमों के अधीन आते हों. केवल बेसिक शिक्षकों के लिए यह अभूतपूर्व निर्णय किया गया है. एक बड़े चिंतन का विषय है कि आखिर बेसिक शिक्षकों से परेशानी क्या है? जो देश के नागरिकों का निर्माण करते हैं उन्हीं शिक्षकों को क्यों इस तरह से हताशा में डाला जा रहा है. आज पूरे देश का 25 लाख शिक्षक एक हताशा की स्थिति से गुजर रहा है. उसको अपने तथा अपने परिवार के भविष्य को लेकर इतनी चिंता है कि वह अन्य किसी विषय में सोच भी नहीं सकता है. अब मानसिक रूप से बीमार शिक्षक किस तरह की शिक्षा प्रदान करेगा क्या यह बात सोचने की नहीं है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को अंतिम नहीं माना जा सकता है. भारत की संसद को किसी भी नियम में परिवर्तन करने का अंतिम अधिकार प्राप्त है.
अब इतना कुछ होने के बाद भी केंद्र की सरकार कान में तेल डालकर क्यों बैठी है? ऐसा नहीं है कि प्रकरण केंद्र सरकार के संज्ञान में नहीं है. दर्जनों माननीय सांसदों द्वारा इस प्रकरण को संसद में उठाया जा चुका है. इसके अतिरिक्त टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले दिल्ली के रामलीला मैदान में देश भर के लाखों शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन करके सरकार को जगाने का भी प्रयास किया है. परंतु केंद्र सरकार के किसी जिम्मेदार द्वारा अभी तक इस विषय में किसी भी तरह का कोई बयान नहीं दिया गया. यह अत्यंत ही दुखद है. कहने में कोई संकोच नहीं कि देश के कर्णधारों का निर्माण करने वाले बेसिक शिक्षकों के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है. इस विषय पर एक लोक कल्याणकारी सरकार को तुरंत कोई ना कोई कार्रवाई करनी चाहिए जिससे देश के लगभग 25 लाख शिक्षक और उनके परिवारों ( जो कि निश्चित रूप से इसी देश के नागरिक हैं ) का भविष्य संकट में न पड़ने पाए.
@DrDCSHARMAUPPSS@RamMurtiThakur@PMOIndia@myogiadityanath
TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा जी द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी को ऐतिहासिक पत्र ,अकाट्य तर्क सहित प्रामाणिक तथ्य के साथ भेजा गया ।🙏
@DrDCSHARMAUPPSS@RRTRIPATHIUPPSS@TFI4India@aajtak
TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा जी द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी को ऐतिहासिक पत्र ,अकाट्य तर्क सहित प्रामाणिक तथ्य के साथ भेजा गया ।🙏
@DrDCSHARMAUPPSS@RRTRIPATHIUPPSS@TFI4India@aajtak
Do you know why they are crying?
Because they missed their NEET re-test.
Why did they miss it?
They were late.
Why were they late?
They were stuck in traffic caused by a Congress rally in Bengaluru.
The killers of Kanhaiyalal who slaughtered him on live video are still not punished
On the other hand 14 Hindus who were doing Gau seva have been sentenced to life imprisonment.
There is no value of Hindu life in India 💔
#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@dpradhanbjp@myogiadityanath@RahulGandhi@yadavakhilesh@priyankagandhi@Aamitabh2@bstvlive
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
हाँ, 2014 में संसद ने 99वां संविधान संशोधन अधिनियम और NJAC एक्ट पास किया था। इसका मकसद कॉलेजियम प्रणाली को बदलना था।
लेकिन 16 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 फैसले में दोनों को असंवैधानिक घोषित कर दिया, क्योंकि यह न्यायिक स्वतंत्रता (मूल संरचना) का उल्लंघन था। परिणामस्वरूप कॉलेजियम प्रणाली बहाल हो गई।
अभी तक कोई नया कानून नहीं बना है।
नहीं, माननीय जस्टिस दीपांकर दत्ता जी ने जूडिशियरी की कोई परीक्षा (जैसे WBJS) उत्तीर्ण नहीं की है।
वे 1989 में हाजरा लॉ कॉलेज से LL.B. करके उसी साल एडवोकेट के रूप में एनरोल हुए। करीब 17 साल प्रैक्टिस के बाद 2006 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के रूप में **बार से सीधे एलीवेट** किए गए।
हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट के जज अक्सर अनुभवी एडवोकेट्स में से चुने जाते हैं, बिना ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम के। AIBE की तरह यह भी उनके समय में अनिवार्य नहीं था।