लोकतांत्रिक व्यवस्था की मर्यादाएं तब कठघरे में खड़ी हो जाती हैं, जब सत्ता का प्रभाव संवैधानिक सीमाओं को लांघने लगता है. नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की पुत्री के विवाह समारोह में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने प्रशासनिक आचरण और प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर की उपस्थिति के दौरान जिस प्रकार ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया, वह परंपरागत राजकीय गरिमा के विपरीत प्रतीत होता है. गार्ड ऑफ ऑनर, जो कि देश की संप्रभुता और संवैधानिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है, उसे एक निजी पारिवारिक आयोजन में प्रस्तुत करना प्रशासनिक विवेक पर प्रश्नचिह्न लगाता है.
मूल प्रश्न यह है कि क्या प्रोटोकॉल और व्यक्तिगत प्रभाव के बीच की रेखा धुंधली हो चुकी है? या फिर सत्ता के दबाव में प्रशासनिक नियमों को दरकिनार किया जा रहा है? निजी समारोह में पुलिस बल की औपचारिक सलामी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं सरकारी तंत्र का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के प्रदर्शन के लिए किया जा रहा है.
यह घटना केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक मानसिकता की ओर इशारा करती है, जिसमें सत्ता और संसाधनों का उपयोग सार्वजनिक हित के बजाय व्यक्तिगत छवि निर्माण के लिए किया जाता है. सरकारी संसाधनों का इस प्रकार प्रयोग न केवल आर्थिक अपव्यय है, बल्कि यह संवैधानिक पदों की निष्पक्षता और गरिमा को भी प्रभावित करता है.
यदि ऐसी प्रवृत्तियों पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रशासनिक मर्यादाओं का क्षरण और गहरा हो सकता है. आवश्यकता इस बात की है कि शासन-प्रशासन अपने आचरण में पारदर्शिता और मर्यादा का पालन सुनिश्चित करे, ताकि जनता का विश्वास बना रहे और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा अक्षुण्ण रह सके.
ओडिशा के आदिवासी लांजीबर्ना में डालमिया सीमेंट विरोध नवंबर महीने से कर रहे है ।
विरोध बढ़ता है , तो काम रोक दिया जाता है , फिर जो आदिवासी प्रदर्शन करते है उनके FIR कर दिया जाती है ।
सोशल मीडिया अकाउंट बैंन कर दिए जाते हैं , ताकि जनता को कुछ भी पता न चले ।
नेशनल मीडिया को पहले ही खरीद लिया जाता है ।
यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र देश में हो रहा है ।
अगर ये लोकतंत्र है , तानाशाही कैसी होती है ?
गोली तानाशाही सरकार भी चलाती है , और लोकतंत्र सरकार भी फिर फर्क क्या है ?
डालमिया ग्रुप समय - समय पर चुनाव चंदा देता रहता है , कभी चुनावी बान्ड की रूप में तो कभी राहत कोष के रूप में बस उसका भुगतना आदिवासीयों को उजाड़ कर किया जा रहा है ।
"वीवीआईपी कल्चर से जनता अब ऊब चुकी है.. लोगों की बर्दाश्त से बाहर होने लगा है.. आज सब अपनी गाड़ियों के हॉर्न बजाकर विरोध कर रहे हैं.. कल रुकने से इनकार कर देंगे.."
नेताओं और मंत्रियों के काफिले में 20-20 गाड़ियां.. चीखते हूटर और सायरन.. वीआईपी मूवमेंट से 10 मिनट पहले ट्रैफिक रोक देने का जबरिया आदेश..
वो भी तब जब एकाध नेता को छोड़कर किसी को न कोई खतरा है, न कोई धमकी..
इतना भोकाल नेता और मंत्री सिर्फ इसलिए रखते हैं ताकि आम और जरूरतमंद व्यक्ति उनके पास आने की हिम्मत न कर सके.. जनता से दूरी बनी रहे..
लेकिन जनता अब ऊब चुकी है.. समझदार पहले से थी लेकिन प्रदर्शन नहीं करती थी..
अब जनता की ऊबन.. उसकी कसमासाहट सामने आने लगी है. वीआईपी मूवमेंट के दौरान लगातार हॉर्न बजाने की तरह..
जागो जागो जागो कि....
#VVIP #VVIPMovement #Traffic #Protocol #Public #Protest
VIP कल्चर ने लोगो का जीना हराम कर रखा है ,
घटिया रास्ते , सड़को में गड्ढे ऊपर से जनता के टैक्स से पहले वालो के लिए ट्रैफिक रोकने वाली प्रथा।
लोगों इसके लिए आवाज उठानी ही चाहिए वरना इन हरामखोरो की दादागिरी बढ़ती जाएगी।
हाथों में खून के निशान टूटी हुई चूड़ियों के है। 69000 शिक्षक भर्ती में महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी के लिए लखनऊ विधान भवन प्रदर्शन करने पहुंची थी। पुलिस ने जमकर अभद्रता किया चूड़ियां तोड़ दी जमीन पर घसीटा।
#69000_शिक्षक_भर्ती#lucknow#LucknowNews
🚨 गाजियाबाद कमिश्नरेट के पुलिसकर्मियों ने की अभद्रता
गाजियाबाद के कमिश्नर जे रविंदर गौड कहते हैं कि उनकी पुलिस फरियादी से आप करके बोलेगी,
लेकिन उनके अंकुर विहार थाने में वकील साहब से ही तू तड़ा भाषा बोली जा रही है
बताइए कहां है आप कमिश्नर साहब
देख लीजिए अपनी सभ्य पुलिस को।
पुलिस की सर्वनाक हरकत
एक ट्रैफिक पुलिस और एक साधारण पुलिस दो लोग रोड पर खड़े हो कर एक महिला का चेकिंग करते हैं चेकिंग करने के दौरान
महिला को पुलिस वाला लात से मार रहा है महिला के पास हेलमेट ,गाड़ी कागज , लाइसेंस नहीं है तो उसका चालान काटना चाहिए
ऐसे लात नहीं मारना चाहिए कहां का रूल है
यह कहां की वीडियो है अभी तक तो पता नहीं चला है सूत्रों से खबर मिली है
यह वीडियो बहुत खतरनाक है इसे सरकार तक पहुंचनी चाहिए जिससे ऐसे पुलिस वालों को सजा मिले
क्योंकि महिलाओं का सम्मान है
भारत का सम्मान है
#trending #socialmedia #new
जैसे ही वीआईपी मंत्री के काफिले के लिए ट्रैफिक जाम किया तो सभी लोगों ने एक साथ हॉर्न बजाया..और निकल पड़े...
वीआईपी काफिलों के लिए बंद सड़के अब बरदाश्त नहीं होगी....
जनता को इन अनपढ़ नेताओं को सबक सिखाना होगा...
मंत्री जी, अफ़सर, सरकार को ये याद रहना चाहिए कि आप लोग जनता के लिए हैं….
जनता के चुप रहने का ग़लत मतलब निकालना अब बंद कर दीजिए
मुंबई में मंत्री जी तो महिला के अधिकार के नाम पर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन ट्रैफ़िक जाम में महिला फंसी और बोलना शुरू किया तो किसी के पास कोई सही जवाब नहीं था
VIP कॉन्वें के लिए 5 मिनट का कर 1 घंटे के लिए रास्ता रोक दिया। व्यक्ति अपने बिमार
बच्चे को जाम में खड़ा रहा
सब्र का बांध टूटा तो पुलिस वालो से भीड़ गया
यूपी पुलिस का अमानवीय चेहरा...थाने में युवक को दी थर्ड डिग्री..पूरी रात कमरे में बंद करके पटे से पीटा..डराया धमकाया...!
अंबेडकर नगर में मारपीट के एक मामले में पुलिस अंकित तिवारी को थाने लाई थी....!
पीड़ित युवक ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर कार्यवाही की मांग की है..!
क्या लगता है न्याय मिलेगा...?