@VijayMi45318117@Suraj__50@grok भैया किसे बता रहे हैं? जैसे कुछ छात्रों को शिक्षक की पिटाई के बिना ज्ञान न आता है उसी तरह कुछ लोगों को बिना चोचन के बुद्धि न आती है।
@VivekkumarProf जब अनुसूचित जाति जनजाति के लिए अलग स्कूल , हॉस्टल हो सकता है तो अलग iit, iim क्यों नहीं। तो अपने अधिकार के लिए लड़ो और खुद के लिए अलग iit, iim की मांग करो जहां छात्र से लेकर के अध्यापक तक सभी sc st समुदाय से ही हों। फिर किसी प्रकार के चोचन का भय न होगा।
@nehraji778 💙 साड़ी पहन कर ही नाच ले , हमें उस से कोई फर्क नहीं पड़ता। अजीत भैया कहना चाहते थे 💙 साड़ी मगर कह देते तो आपकी चमचागीरी न दिखती इसलिए लाल साड़ी कह दिए। 💙 सलाम
@Therajatmourya जिस दिन निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू किया जाएगा वो हर प्रकार के आरक्षण का आखिरी दिन होगा। उसके बाद इन बीमटों को सामान्य/ ओबीसी वर्ग के बराबर नंबर लाना पड़ेगा उसके बाद पता चलेगा मेहनत और मुफ्तखोरी में क्या अंतर है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
@RHA_reform करीब 15-20 साल पहले हम गांव में रहते थे और मेरे स्कूल के टीचर किसी भी जाति के हों पंडित ही कहा जाता था और हम लोग पैर छू कर प्रणाम करते थे। शादी मुंडन आदि में उन्हें ही पहली पंगत में खिलाया जाता था। अब का नहीं जानते क्योंकि बहुत दिनों से गांव से दूर हैं।
@BhimArmyChief@bihar_police माननीय सांसद महोदय को भी ज्ञान न है कि पीड़ित बच्ची की वीडियो/पता आदि उजागर नहीं करना चाहिए l अब आप बताइए pocso act के तहत इनपर भी FIR होगा, वीडियो हटाया जाएगा या फिर बिहार पुलिस sc st act के डर से मूकदर्शक बनी रहेगी l Adv सांसद जी, आप भी ध्यान दीजिए l