ब्रिटेन में राजनीतिक उठापटक का आलम यह है कि पिछले 10 साल में 6 प्रधानमंत्री बन चुके हैं.प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने आज इस्तीफ़ा दे दिया.दो साल पहले उनकी लेबर पार्टी भारी बहुमत से चुनाव जीती थी. सरकार की लोकप्रियता लगातार कम हो रही थी.इसके चलते उनके खिलाफ बगावत हो गई थी.
नई आ रही कारों में,AC बसों में, दफ्तरों में, घरों में हर जगह ऑटोमेटिक लॉक का चलन बढ़ता जा रहा है। मैं जब भी ऐसी जगहों पर जाता हूं तो मन में पहला खयाल यही आता है कि गेट अपने-आप लॉक हो रहे हैं तो मुसीबत आने पर खुलेंगे कैसे❓
कारों में भी जब आग लगती है तो सबसे पहले वो लॉक हो जाती हैं और लोग निकल नहीं पाते। लंबी दूरी पर चलने वाली AC बसों में भी यही होता है जब आग लगती है तो सबसे पहले वायरिंग जलती है और लोग निकल नहीं पाते। अब दफ्तरों और घरों में भी इस तरह के लॉक लगवाने का फैशन चल पड़ा है...ये सही है कि इस तरह के लॉक सुरक्षित होते हैं लेकिन जब आप मुश्किल में होते हैं तब ये आपके लिए ही खतरा बन जाते हैं।
लखनऊ की कोचिंग में लगी आग के बारे में बताया जा रहा है कि कोचिंग में भी ऐसे ही ऑटोमेटिक लॉक लगे थे और जब आग लगी तो गेट लॉक हो गया और बच्चे निकल ही नहीं पाए।
फिर इस तरह से बिल्डिंग में बड़ा सा छेद करना पड़ा और उन्हें निकाला गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी...
#Lucknow
लखनऊ में एक कोचिंग/लाइब्रेरी में आग लगी और पंद्रह बच्चे मार दिए गए।
नीट में धांधली हुई दसेक बच्चों ने जान दे दी।
परीक्षा में फेल हुए, बच्चों ने जान दे दी।
—-
ऐसे ध्यान रख रहे हैं हम अपनी अगली पीढ़ी का।
ऐसे बनेंगे हम विश्वगुरु।
सॉरी बच्चों हमने तुम्हें धोखा दिया है
आदरणीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी
आपको सीधा टैग कर लिख रहा हूं ताकि ये बात आपकी नज़र में आ सके।
लखनऊ अग्निकांड के बाद हादसे की गंभीरता को समझते हुए आप अलीगढ़ का अपना दौरा छोड़ कर लखनऊ लौट गए। ऐसा सोशल मीडिया से ही पता चला। इस मामले में जो कार्रवाई होगी वो तो आप करेंगे ही ऐसा भरोसा है। जिस तरह से इस अग्निकांड को सिर्फ़ एक हादसा नहीं आपराधिक कृत्य के तौर पर रिपोर्ट किया जा रहा है, ऐसे में लखनऊ अग्निकांड में मारे गए छात्रों/लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तो यही होगी कि क़सूरवार को जल्द और अधिकतम सज़ा मिले।
एक बात साफ़ है कि प्रदेश में जब भी और जहां भी अग्निकांड होता है, छवि सरकार की ख़राब होती है… क़सूरवार बेशक कुछ स्थानीय अधिकारी ही क्यों न हों। ऐसे में मेरी एक सलाह है। अग्निकांड में मारे जाने वालों के प्रति बड़ी श्रद्धांजलि ये होगी कि ऐसे आपराधिक कृत्य करने वालों पर अग्निकांड से पहले कार्रवाई हो।
कोई कह सकता है कि ये तो बहुत सामान्य सी और बहुत बार दोहरायी जा चुकी सलाह है। लेकिन मैं एक ख़ास शुरुआत की सलाह देना चाहता हूं जिसे आप ग़ाज़ियाबाद-नोएडा से कर सकते हैं।
यहां सैंकड़ों ऐसी बहुमंज़िली सोसाइटीज़ हैं जहां फ़ायर सेफ़्टी नियमों की धज़्जियां उड़ायी गई हैं और उड़ायी जा रही हैं। आप अपने सबसे भरोसेमंद अधिकारियों को निर्देश देकर ऐसी सोसाइटीज़ के ख़िलाफ़ एक अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। वे सोसाइटीज़ को चिन्हिंत कर वहाँ सदल बल जाएं, वीडियो कैमरा भी लेकर जाएं, सोसाइटी की कमियों को बताएं और ज़िम्मेदारों को चिन्हित करें, चाहे वे बिल्डर हों या प्रबंधक... और इसे सोशल मीडिया के ज़रिए भी लोगों को बताएं।
इससे फ़ायदा ये होगा कि सोसाइटीज़ में रहने वाले निवासियों को पता चलेगा और उनमें भी जागरुकता आएगी कि वे किस तरह के ख़तरों के बीच रह रहे हैं। क़ानूनी कार्रवाई हो सो हो, निवासियों को पता तो चले कि उनके अधिकार क्या हैं और उसे पूरा करने की ज़िम्मेदारी किन लोगों की है?
ये छोटी सी सलाह है। मुझे लगता है कि इन सोसाइटीज़ में रहने वाले लोगों का बड़ा समर्थन मिलेगा। शुरुआत तो कीजिए। ये एक नज़ीर बनेगा और फिर इसे दूसरी तरह की इमारतों के लिए भी लागू किया जा सकता है।
आपका धन्यवाद
@CMOfficeUP
कैलाश विजयवर्गीय कह रहे है मुस्लिमों, आप हमारी बनाई सड़क पर क्यों चलते हो, हमारी लाडली बहन योजना के पैसे क्यों लेते हो?
कैलाश जी ये सड़क और ये लाडली बहना आपके पिता जी के पैसे से नहीं, हम टैक्सपेयर के पैसे से बनी है।
सभी का खून है शामिल, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।
आग लगती है
देश के भविष्य जिंदा जलते हैं
बस जगह बदलती है
संख्या बदलती है।
पहले दिल्ली थी
अब लखनऊ है
अब सख्ती दिखाई जाएगी
कोचिंग सेंटरों की NOC चेक की जाएगी...
#Lucknow
“जो बच्चा मैदान में पसीना बहा रहा है, वो देश का नाम रौशन करेगा !
और RSS की शाखा में जिस बच्चे के दिमाग में नफ़रत का बीज बोया जाएगा, वो क्या करेगा ?”
इस वीडियो में मंडावा के नवीन ये सवाल पूछा
और झुंझुनूं पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसका मोबाइल जब्त कर लिया
सच बोलने पर गिरफ़्तारी क्यों ?
RSS नफ़रत, हिंसा, साम्प्रदायिकता फैलाने वाला देश का सबसे बड़ ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ है - यही सच्चाई है !!!
ईरान के तेल और गैस से सैंक्शन 60 दिनों के लिए हटा।
यानी अब ईरान आराम से अपना तेल और गैस बेच सकेगा और क्रूड आयल की प्राइस और घटेगी।
अब तो भारत सरकार को तेल और गैस में हुई बढ़ोत्तरी वापस ले लेनी चाहिए।
ख़बर को घुमाने का तरीक़ा समझिए-
आग लगी..15 छात्रों की मौत हुई - Fact
— सीएम ने जाँच का आदेश दिया, रिपोर्ट माँगी-Fact
— सीएम को फलाना-चिलाना जगह जाना था लेकिन सब रद्द कर के वो राजधानी में इस मामले को देख रहे हैं - TV channel की घुमावदार रिपोर्टिंग
— एक बार सुनने में सामान्य लगता है लेकिन असल में बताया ये जा रहा है कि और भी ज़रूरी काम थे जिनको छोड़ वो आग के मामले को देख रहे हैं
— प्रश्न- सूबे के अगुवा को कब ज़रूरी काम नहीं होते?? उन्हें जो सबसे ज़रूरी लगा वो कर रहे हैं।
लेकिन चैनलों का ये घुमाने का तरीक़ा आग में 15 छात्रों के मर जाने की घटना को छोटा और ज़रूरी काम छोड़ इस घटना पर ध्यान देने को बड़ा बताने की कोशिश है।
समझे कि नहीं?
ईरान की ज़ब्त संपत्ति रिलीज़ करने से अमेरिका के किसानों को फ़ायदा होगा क्योंकि ईरान उससे अमेरिकी गेहूं और दूसरे कृषि उत्पाद ख़रीदेगा : अमेरिकी उपराष्ट्रपति वैंस
सही बात है। हारते हारते भी ‘हम जीत गए, हम जीत गए’ की रट लगाने का अपना मज़ा है।
वीडियो @FoxNews
शिवसेना UBT को बड़ा झटका देते हुए उसके 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए।
मुंबई में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde की मौजूदगी में यह राजनीतिक बदलाव हुआ।
शिवसेना में शामिल होने वाले सांसद हैं
Sanjay Haribhau Jadhav
Bhausaheb Rajaram Wakchaure
Omprakash Bhupalsingh Nimbalkar
Sanjay Dina Patil,
Sanjay Uttamrao Deshmukh
Nagesh Bapurao Patil Ashtikar
इन सांसदों के शामिल होने से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
यह घटनाक्रम शिवसेना UBT और शिंदे गुट के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष के बीच सामने आया है।
मंडावा के नवीन को झुंझुनूं पुलिस ने इस वीडियो के लिए गिरफ्तार किया, उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया
इस वीडियो में एक तरफ RSS की शाखा चल रही है, दूसरी तरफ बच्चे मेहनत कर रहे हैं
इसमें क्या ग़लत दिखाया. RSS नफ़रत फैलाती है - यह सच है
लो कर दिया पोस्ट
कितनों को करेंगे गिरफ़्तार?
शशि थरूर अगर पार्टी में बने हुए है तो उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी का समर्थन है।थरूर के बयानों से राहुल गांधी भी असहज होते हैं लेकिन लोकतंत्र में विचार विनिमय की स्वतंत्रता और पार्टी में अभिव्यक्ति की आजादी के पक्षधर होने के नाते वे हर बार उनकी ढाल बन जाते है। एक मौका और!
Statement of the DECADE 😎
सवाल : कहते हैं कि इस प्रदर्शन के पीछा पाकिस्तान की फंडिंग है
छात्र : हाँ है न चालीस रुपए पाकिस्तान से आए तो मेट्रो लिया… बीस रुपए और अमेरिका से आए तो रिक्शा लेकर यहां पहुँचे… वापस जाने के लिए नेपाल से फंड लेनी पड़ेगी… देश में फंड की कमी है क्योंकि सारे फंड बीजेपी के पोस्टर छपवाने में चले जाते हैं… बड़ी बड़ी रैलियों में चले जाते हैं… बात सारी यहीं आ जाती है कि हमारी फंडिंग कौन करेगा… उनसे कोई नहीं पूछेगा…”
नेतन्याहू: "हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है, न तो राजनीतिक नेताओं के खिलाफ और न ही किसी और के खिलाफ।"
🇮🇷 ईरान: "देखो कौन उपदेश दे रहा है। तुमने 4 देशों में 50 से अधिक राजनीतिक नेताओं और हजारों बच्चों को मार डाला है.."