DU की छात्रा आकृति मजदूरों के लिए बोली तो उस पर NSA लगा दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा ये गलत है।
हिरासत रद्द की और छात्रा को 5 लाख मुआवजा देने को कहा।
पैसा नोएडा DM मेधा रूपम की सैलरी से वसूलने को कहा।
मेधा रूपम देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं।
DM और यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट गईं।
वहाँ केस उस बेंच में लगा जिसका रोस्टर ही इस केस का नहीं था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट का ऑडियो तक म्यूट कर दिया गया।
फिर उसी बेंच ने हाईकोर्ट की फटकार और 5 लाख जुर्माने पर रोक लगा दी।
अब नया खुलासा हुआ है।
राहत देने वाले जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे ही MP हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के वकील हैं।
एक तरफ CEC की बेटी, दूसरी तरफ ECI से जज के परिवार का लिंक।
ये न्याय व्यवस्था है या परिवार व्यवस्था?
राजा के बाद उपराजा नहीं होता; राजा के बाद तो रानी ही होती है...!
मुझे तो लग रहा है कि भविष्य में उप वाले पद कोई जबरदस्ती देने पर भी नहीं लेगा...😄
@hanumanbeniwal
कल से हनुमान बेनीवाल जी की कुछ वीडियो क्लिप काट-छांटकर वायरल की जा रही हैं। मैं किसी नेता का अंधसमर्थक नहीं हूं, न हनुमान जी का, न सचिन पायलट जी का।
कल ही के हनुमान बेनीवाल जी के भाषण की एक ऐसी वीडियो क्लिप भी है, जिसमें उन्होंने हमारे समाज से जुड़े जरूरी मुद्दे उठाए हैं। लेकिन उसे वायरल नहीं किया गया। मेरी नजर में इसकी वजह यही है कि उस वीडियो को सामने लाने से कुछ लोगों को उस हकीकत का सामना करना पड़ सकता था, जिसे वे सामने नहीं लाना चाहते। क्योंकि वे कभी नहीं चाहते कि हम एक हों।
सवर्ण समाज को 10% EWS आरक्षण मिला हुआ है और हमने कभी उसके आरक्षण का विरोध नहीं किया। लेकिन कुछ दूषित विचारधारा के लोग बार-बार गुर्जर समाज के आरक्षण को लेकर न्यायालय में याचिकाएं दायर करते हैं और उसे खत्म करने की मांग करते हैं। इसका खामियाजा हमारे युवाओं को भुगतना पड़ता है, जिन्हें अपने अधिकारों के लिए न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब हमको उनके आरक्षण से दिक्कत नहीं है तो इन लोगों को हमारे आरक्षण से क्या दिक्कत है।
लेकिन मेरे समाज के लोगों से मेरी एक बात है—कुछ ताकतें ऐसी हैं जो कभी नहीं चाहतीं कि हमारे समाज एकजुट हों। इसी का परिणाम है कि 1952 से 2023 तक हमारे समाज का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री तो दूर, गृह मंत्री तक नहीं बन पाया।
हो सकता है हमारे किसी नेता से गलतियां हुई हों। भगवान कोई नहीं होता, हर इंसान में कमियां होती हैं। लेकिन उन कमियों को ही मुद्दा बनाकर हमारे समाज के जरूरी सवालों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।
हनुमान बेनीवाल जैसे हैं, वैसे हैं। हो सकता है उनकी राजनीतिक शैली हर किसी को पसंद न आए, लेकिन उनके मन में जो होता है, वह अक्सर सामने बोलते हैं। जरूरत के समय कौन समाज के साथ खड़ा होता है, यह भी याद रखना चाहिए।
नेताओं की गलतियों पर सवाल जरूर करें, लेकिन उन मुद्दों को मत भूलिए जो हमारे समाज के भविष्य से जुड़े हैं। हमें किसी नेता का अंधसमर्थन नहीं, बल्कि अपने समाज की एकता और अधिकारों के लिए जागरूक रहना है।
@shekharcanada@ikapilgurjar@GurjarConnect@jat_devta@TanwarKhap@LaduGodara3
कैब ड्राइवर: अरे... आप क्या कर रहे हैं? आप सिगरेट नहीं जला सकते।
शख्स: मैंने यह कैब बुक की है। मैं इस सफर के पैसे दे रहा हूँ। 😳
कैब ड्राइवर: मेरी गाड़ी में धूम्रपान की अनुमति नहीं है। समझे?
शख्स: मैं अभी यह राइड कैंसिल कर दूंगा। फिर आपका नुकसान होगा।
कैब ड्राइवर 🔥: मैं खुद यह राइड कैंसिल कर दूंगा। मुझे आपके पैसे की जरूरत नहीं है। मेरी गाड़ी से बाहर निकल जाइए। मैं टैक्सी ड्राइवर हूं, आपका नौकर नहीं।
अभिनव सर की लाइव क्लास में एक स्टूडेंट का कमेंट आया कि आप पढ़ाना छोड़ कर विधायक जाइये,
जवाब में अभिनव सर ने कहा कि,
"उत्तर प्रदेश में 400 से ज्यादा विधायक हैं, आप दस के भी नाम नहीं बता पाओगे,
लेकिन देश के लाखों टीचर में से 10 का नाम पूछा जाए तो उसमें मेरा नाम आ जाएगा।
विधायक बनते हैं कि साल में 5 करोड़ मिलेगा तो उसमें से कुछ बचा लेंगे, फॉरच्यूनर खरीद लेंगे,
मैं विधायक क्यों बनू ? फॉरच्यूनर खरीदने के लिए, मेरे पास 2017 में मर्सिडीज थी।
आपने किसी विधायक को देखा हैं जो मुख्यमंत्री से जाकर कभी कहा हो कि महाराज जी ये भर्ती निकाल दीजिए,
जबकि मैं तो जहां प्रदर्शन होता हैं वहां पहुंच जाता हूं , सरकार के खिलाफ बोल लेता हूं।"
नौटंकी करालो बस! जो बाढ़ के लिए fund 2000 cr से भी ज्यादा alocated है उसे कब लगायोगे!
और विज्ञापन का 50% ही लगादो!
PM Care fund का 3 साल का ब्याज ही 1200 cr है वो लगाओ!
तुम्हारी salry से होंगी 10 लोगो की मदद और पीड़ित है 48 लाख
झूठ बोलते है ये लोग!
नहीं होगा ऐसे विकसित हमारा भारत!
एम्स की ये हालत 12 साल में नहीं ठीक कर पाए!
Teeth में फिलिंग के लिए 3-3 महीने की waitng है!
Health और education system की ऐसी तैसी कर दी गयी है!
ज्ञानू की बेटी ने 5 लाख का जुर्माना बचाने के लिए 35-35 लाख प्रति सुनवाई वाले दो वकील खड़े किए। मिलोर्ड के रेट का अभी खुलासा नहीं हुआ।
बात पैसे की नहीं, पापा के रसूख की थी। लेकिन ज्ञानू ने इस मामले में कमर कसी तो पीछे से एक अखबार ने दूसरे मामले में उनका पजामा खींच दिया।
बताया जा रहा है कि साहिल इतना इंटेलिजेंट था कि उसकी AIR Rank 614 थी।
मतलब, झूठ भी इस तरह बोला जाएगा कि आपको सच लगे।
साहिल की 614 रैंक उसकी अपनी SC कैटेगरी में थी। यानी उसकी Overall Rank कम से कम 20,000 से ऊपर रही होगी।
20,000 के आसपास की रैंक पर साहिल को जो कोर्स और IIT मिला, वह General Category के बच्चे को 2,000 रैंक पर भी नहीं मिलता।
यहाँ यह भी बता दूँ कि साहिल के पिता बैंक में अच्छे पद पर हैं और उसकी माँ शिक्षिका हैं और वह ipjone से ChatGPT use करता था ..
यानी, आर्थिक और सामाजिक स्थिति के लिहाज से वह कहीं से भी "दलित" नहीं था..
बस, इसी का नाम आरक्षण है।
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि "कल मैने खरनाल में एक करोड़ रुपया दिया, वो कह रहे हैं कहां से लाए।"
मैने कहा कि कहीं मांगे का किसी से, कहां से लाया, कर लो जांच...रोकड़ लेकर गया था। और इसलिए लाया कि खरनाल में हनुमान जी तेजाजी की जय बोले, मंदिर कोन बणारिया...
ज्ञानेश कुमार और उनकी बेटी का कोई कुछ नहीं कर सकता हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई से लागू रोस्टर के हिसाब से ज्ञानेश कुमार की बेटी और गौतम बुद्ध नगर की DM मेधा रूपम का मामला जस्टिस बी.वी. नागरत्न की बेंच में सुनवाई के लिए जाना चाहिए था,
लेकिन यह मामला मनमाने तरीके से जस्टिस एस.सी. शर्मा और एन. के. सिंह की बेंच में भेजा गया और वहां से इलाहाबाद हाईकोर्ट के आर्डर को स्टे करवा लिया गया।
सुनवाई के दौरान लाइव का वीडियो की ऑडियो भी बंद हो गई, पता नहीं ये जानबूझ कर किया गया था या कोई टेक्निकल प्रॉब्लम थी।
लेकिन एक बात तो तय हैं कि देश की अन्य संस्थाओं के बाद अब अगला नम्बर न्यायपालिका का आने वाला है, बस थोड़ा सा इंतज़ार कीजिए!
सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई से लागू रोस्टर के हिसाब से ज्ञानेश कुमार की बेटी और गौतम बुद्ध नगर की DM और ज्ञानेश की बेटी मेधा रूपम के जुर्माने का मामला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की बेंच में सुनवाई के लिए जाना चाहिए था।
यह मामला ऐन मौके पर जस्टिस एस.सी. शर्मा और एन. के. सिंह की बेंच में भेजा गया और वहां से इलाहाबाद हाईकोर्ट के आर्डर को स्टे करवा लिया गया।
यह रोस्टर सीजेआई सूर्यकांत महोदय तय करते हैं। अब आप इनसे उम्मीद करते हैं कि ज्ञानेश को लेकर कोई जनता के पक्ष में फैसला देंगे तो आप बेवकूफ हैं।आज अगर चुनाव आयोग स्वेच्छाचारी है तो इसके जिम्मेदार महोदय भी हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को बाहर क्यों किया गया? सुप्रीम कोर्ट स्वयं ये सवाल पूरा रहा है।
सरकार ने कानून बदलकर CJI को बाहर करके ऐसी व्यवस्था बना दी जिसमें निष्पक्ष और विपक्ष की भूमिका ही खत्म हो गई।
3 सदस्यीय कमेटी में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और नेता विपक्ष को रखा गया है, यानी सत्ता का सीधा नियंत्रण हैं, तो फिर स्वतंत्र चुनाव आयोग की बात करना ही बेईमानी है।
जब संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र नहीं रहेंगी, सत्ता के दबाव में काम करेगी, या सत्ता के लिए काम करेगी.. तो फिर ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही देश के प्रति न होकर प्रधानमंत्री मोदी के प्रति होगी और 'वोट चोरी' होना स्वाभाविक है।
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि पंचायती राज चुनाव में उम्मीद करता हूं कि बोतल को वोट दे देना, तो ठीक होऊंगा...
और पंचायती चुनाव फुस हो गए तो मुझे लगता है कि 28 में मेरी पार्टी भी फुस हो जाएगी।
Live Law के अनुसार- नोएडा डीएम मेधा रूपम केस में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बदली गई !
रोस्टर के हिसाब से जस्टिस नागरत्ना को केस की सुनवाई करनी थी लेकिन उन्हें केस नहीं दिया गया