AICC महासचिव एवं पंजाब प्रभारी आदरणीय श्री सचिन पायलट जी के जन्मोत्सव पर आयोजित रक्तदान शिविर में पहुँचकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया।
इस दौरान पूर्व मंत्री सुरेंद्र गोयल जी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष किशोर चौधरी जी, पूर्व प्रदेश सचिव राजेश कुमावत जी, जिला उपाध्यक्ष व पूर्व सरपंच दयाल जी गुर्जर, धर्मेंद्र काला जी,करनोस सरपंच मोतीराम गुर्जर जी सहित सम्मानित जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोगों भी उपस्थित रहें।
📍 रास, जैतारण - जिला ब्यावर।
@SachinPilot #Ras #Beawar #Rajasthan
@atullondhe ये जीतू खुद की जाति के अलावा किसी को ओबीसी नहीं मानता है अरे भाई थोड़ा रिसर्च करो
कभी तो खुद का ज्ञान काम में ले!
कॉपी पेस्ट से कब तक कम चलेगा आज आ गया न लपेटे में
@shekharcanada वो सब उन्हीं का करा धरा हैं बस बंदूक डोटासरा जी के कंधे पर हे बाक़ी आज भी गंगाधर ही शक्तिमान है और उनका प्रतिद्वंद्वी भी वही पुराना वाला ही है सब उसको निपटाने की फील्डिंग सेट करी है
दूसरों को ज्ञान देने से पहले अपने गिरेबान में झांक के देख लेना चाहिए।
खींवसर में @hanumanbeniwal को हराने के लिय आपने भजना के आगे आत्मसमपर्ण कर दिया था। याद है या भूल गए
@Pradeep_JAT0111 बिल्कुल भाई कोई भी नेता अपने समाज के दम पर नहीं जीत सकता है जिसको ये वहां है वो बिना पार्टी के चुनाव में उतर कर देख ले चाहे वो डोटासरा पायलट या गहलोत कोई भी हो
बिल्कुल आपकी बात सच है लेकिन आप ये बात खींवसर चुनाव में सोच लेते तो आज राजस्थान का एकमात्र लड़ाका अकेला नहीं पड़ता
बेनीवाल से बड़ा नेता तो आप नहीं थे @RLPINDIAorg@shekharcanada
जाटों को क्यों नहीं मिल रहा बड़ा पद? डोटासरा का छलका दर्द!
जयपुर में राष्ट्रीय तेजा संवाद के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा ने सुनाई सेना के कप्तान की कहानी, बताया कि कैसे जाट समाज के लोग आगे नहीं बढ़ रहे, कैसे बड़ी कुर्सी नहीं मिल रही, सुनिए!
@GovindDotasra#RashtriyaTejaSamvad #Jaipur #JaipurNews #Rajasthan #RajasthanNews
@thelitmusnews@GovindDotasra बिल्कुल आपकी बात सच है लेकिन आप ये बात खींवसर चुनाव में सोच लेते तो आज राजस्थान का एकमात्र लड़ाका अकेला नहीं पड़ता
बेनीवाल से बड़ा नेता तो आप नहीं थे
@dev_mitawa आदमी का विरोध नहीं होना चाहिए उसकी गलत नीतियों या गलत कार्यशैली का विरोध होना चाहिए या
उसके मंत्रालय के अंतर्गत उसकी मौजूदगी में कोई कार्य हुआ हो चाहे वो गलत हो तो विरोध और अच्छा हुआ हो तो तारीफ भी
@arvindchotia सबसे ज्यादा तो इनके समर्थक ही हे है जो फर्जी अकाउंट बनाकर कांग्रेस के ही नेताओं को कोसते रहते हैं ऐसे अकाउंट से ही डोटासरा जी को नुकसान होता है
@manphoolsaran7@ShriramBijarnia बेनीवाल साहब से क्या दुश्मनी है इस संस्था वालो की
सब को बुलाया लेकिन बेनीवाल जी को क्यों नहीं बुलाया
उनसे बड़े नेता तो नहीं है यहां जो भी बैठे हैं
प्रिय @ShriramBijarnia जी जिस व्यक्ति ने वीर तेजाजी महाराज को “तेजा-फेजा” कहकर संबोधित किया, उसी व्यक्ति को तेजाजी महाराज के नाम पर आयोजित मंच पर बुलाते समय क्या आपको एक क्षण के लिए भी यह नहीं लगा कि यह उस आस्था और सम्मान के साथ न्याय नहीं है, जिसके नाम पर आपने इतना बड़ा आयोजन किया ? या फिर आपकी नजर में “तेजा-फेजा” कहना वीर तेजाजी महाराज का अपमान नहीं, सम्मान है !!
अगर यह सम्मान है, तो फिर कार्यक्रम का नाम “राष्ट्रीय तेजा संवाद” क्यों रखा गया , नाम भी खुलकर “राष्ट्रीय तेजा-फेजा संवाद” रखते !
कम से कम समाज को यह भ्रम तो नहीं रहता कि मंच वीर तेजाजी महाराज के सम्मान का है।
तेजाजी महाराज के नाम का पोस्टर लगाना आसान है, उनके सम्मान के लिए खड़ा होना कठिन है। मंच पर तेजाजी महाराज की तस्वीर हो, भाषणों में उनकी महिमा हो, कार्यक्रम उनके नाम पर हो लेकिन जिस शब्दावली ने उनके श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया, उसके जिम्मेदार व्यक्ति के लिए उसी मंच पर सम्मान और स्वागत हो; यह कैसी श्रद्धा है ?
राजनीतिक संबंध अपनी जगह हो सकते हैं, व्यक्तिगत संबंध अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन वीर तेजाजी महाराज का सम्मान किसी राजनीतिक समीकरण से छोटा नहीं हो सकता।
अगर “तेजा-फेजा” गलत था, तो मंच से उसका विरोध होना चाहिए था। और अगर गलत नहीं था, तो फिर “राष्ट्रीय तेजा-फेजा संवाद” नाम रखने का साहस भी दिखाना चाहिए था।
तेजाजी महाराज के नाम का उपयोग करके उनके सम्मान के सवाल पर सुविधा के अनुसार मौन रहना स्वीकार्य नहीं है। आस्था मंच सजाने की वस्तु नहीं होती, आस्था के लिए जरूरत पड़ने पर अपने लोगों के खिलाफ भी खड़ा होना पड़ता है।