असम में एक मेंटली चैलेंज्ड आदमी को भूख लगी तो बिना बुलाए एक शादी में शामिल हो गया।
वो मेहमानों के साथ खाना खाने लगा वो किसी बड़े ही दिलवाले की शादी थी तो किसी ने रोका नहीं
जिसके यहां शादी थी उसको नहीं पता था कि पागल सा आदमी उससे भी बड़ा दिलवाला है
जाने से पहले, उसने अपनी फटी हुई जेब से 10 रुपए निकाले जो शायद उसकी कुल जमा पूजी का एक बड़ा हिस्सा था दुल्हन के हाथ में शगुन के तौर पर रख दिए और चला गया!🥹❤️
राजेंद्र राठौड़ ने रविन्द्र सिंह भाटी को पेट्रोल छिड़कने वाली घटना को लेकर “नौटंकीबाज” कहा है
राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि नौटंकी से लोकतंत्र नहीं चलता है
मेरे ख्याल से रवींद्र सिंह भाटी को लोकतंत्र राजेंद्र राठौड़ से सीखना चाहिए कि 7 बार विधायक रहके भी पार्टी के लिए दरियां बिछाते रहो
उन्हें सीखना चाहिए कि अपनी पार्टी के कहने पर पूंजीपति लोगो की कैसे गुलामी की जाती है
कभी खेजड़ी बचाओ,कभी ओरण बचाओ,कभी मजदूरों का हक ,,,इन सबके लिए लड़ना लोकतंत्र नहीं है
लोकतंत्र वो है जो कंपनियों की गुलामी सिखाता है
जैसलमेर केवल एक शहर नहीं, बल्कि शौर्य, त्याग और स्वाभिमान की जीवंत गाथा है। जिस धरती ने अनगिनत आक्रमणों का सामना करते हुए भी अपनी आन-बान और संस्कृति को अक्षुण्ण रखा, उस गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है।
श्री क्षत्रिय युवक संघ के केंद्रीय कार्यकारी रेवंत सिंह पाटोदा द्वारा उठाया गया यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी है।
जैसलमेर स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपने इतिहास, वीरों और उनके बलिदान को स्मरण कर उनसे प्रेरणा लेने का अवसर होना चाहिए।
सरकार और समाज को मिलकर ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्वरूप देना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को जाने, अपने नायकों को याद करे और उनके आदर्शों को जीवन में उतारे। इस निमित्त मेरे प्रयास सदैव अग्रणी रहेंगे।
सावचेत राजस्थान 📢
आवण आळी जनगणना में जद भी गणनाकार थारै घरै आवै,तो भासा रै कालम में #राजस्थानी ही लिखाणी है ✍️
जे आपणैं भासा नै मान-मर्यादा अैर संवैधानिक मान्यता दिलवाणी है,तो ओ कदमो उठाणो ई पडै़लो।
जागता रैइजो, चूकिजो मत 🙏
#Make_Rajasthani_Rajbhasha
पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा ओरण केवल भूमि नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण की अमूल्य धरोहर है। ओरण बचेगी तो प्रकृति बचेगी और प्रकृति बचेगी तो ही हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
ओरण प्रेमियों द्वारा 16 अप्रैल को जयपुर चलने का आह्वान अत्यंत महत्वपूर्ण है। आप सभी इस पुनीत अभियान में यथासंभव सहयोग करें।
#ओरण_बचाओ #16_अप्रैल_जयपुर_चलो
जयपुर का पारा आज हाई है
ओरण समर्थक जुटे हुए हैं, डटे हुए हैं। रोकने की पूरी तैयारी है लेकिन रोकना मुश्किल भी उतना ही है।
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी कह रहे हैं- आज 'ओरण' के बारे में जयपुर के कुछ लोग और बंद एसी कमरों में बैठे बड़े अधिकारी पूछते हैं कि 'साहब, ये ओरण होता क्या है?' उन्हें मैं कहना चाहता हूँ कि ओरण वह पवित्र भूमि है जिसके लिए पाबूजी, हड़बूजी और तेजाजी से लेकर तमाम महापुरुषों ने अपनी शहादत दी है। आज उस ओरण को बचाने की जरूरत है और इसीलिए हम यहाँ इकट्ठा हुए हैं।
#ओरण_बचाओ_पद_यात्रा
ओरण हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक सोच, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने पश्चिमी राजस्थान जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में भी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़-पौधों, खेजड़ी तथा स्थानीय घासों सेवण और धामण का संरक्षण किया।
विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने सतत विकास (Sustainable Development) का मार्ग अपनाया, जो आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
यही मॉडल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आजीविका का भी आधार बना। सदियों से जल संरक्षण, जैव विविधता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से उन्होंने एक मजबूत और आत्मनिर्भर व्यवस्था विकसित की।
किन्तु दुर्भाग्यवश, आज विकास की अंधाधुंध दौड़ में हम अपने पुरखों की इस अमूल्य विरासत को खोते जा रहे हैं।
ऐसे में “टीम ओरण” द्वारा जनचेतना लाने और ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने का प्रयास अत्यंत सराहनीय है। यह केवल एक सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पर्यावरण और भविष्य को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार और जनप्रतिनिधियों से आग्रह है कि ओरण को आने वाली पीढ़ियों की धरोहर मानते हुए इनके संरक्षण, संवर्धन और विधिक मान्यता (राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज) के लिए ठोस कदम उठाएं।
प्रत्येक नागरिक का छोटा-सा प्रयास ही हमारे भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बना सकता है।
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#टीम_ओरण_जैसलमेर
प्रकृति का सम्मान करें, ओरण का संरक्षण करें।
गौवंश की रक्षा के लिए गोचर भूमि बचाना अनिवार्य है। आज ही इस ट्विटर ट्रेंड से जुड़ें! 🐄🌿
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ओरण हमारे लोक देवताओं और परंपराओं से जुड़ा है। यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे नष्ट करना अपनी पहचान खोने जैसा है। अपनी विरासत को सहेजें!
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गौमाता की रक्षा केवल उनकी पूजा करने से नहीं होगी, बल्कि उनके लिए चारागाह (ओरण) भी बचाने होंगे। गोचर भूमि सुरक्षित रहेगी, तभी हमारी गायें सुरक्षित रहेंगी। अपनी आवाज बुलंद करें! 🙏
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ओरण सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण की जीवनरेखा हैं। अगर आज हम अपने ओरण नहीं बचा पाए, तो आने वाली पीढ़ियों को क्या जवाब देंगे? प्रकृति के लिए एकजुट हों! 🌳
#ओरण_बचाओ_गाय_बचाओ
समय आ गया है कि हम अपनी मूक गौमाता और प्रकृति के हक के लिए आवाज उठाएं। ओरण भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। आइए इस मुहिम का हिस्सा बनें। ✊
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प्रकृति का सम्मान करें, ओरण का संरक्षण करें।
गौवंश की रक्षा के लिए गोचर भूमि बचाना अनिवार्य है। आज ही इस ट्विटर ट्रेंड से जुड़ें! 🐄🌿
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