कांग्रेस का दोहरा रवैया देखिए!
राजस्थान में अपने शासन (2018–2023) के दौरान 19 में से 17 भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक हुए। खुद प्रियंका गांधी ने पेपर लीक की समस्या स्वीकार की, लेकिन तब जवाबदेही तय नहीं हो सकी। लाखों युवाओं के भविष्य पर सवाल उठे, फिर भी कांग्रेस की आवाज़ मुखर नहीं थी। आज वही कांग्रेस NEET मुद्दे पर सवाल खड़े कर रही है। सुनिए, उनके शिक्षा मंत्री क्या कह रहे हैं…
सवाल यह है कि जिन राज्यों में वह सत्ता में है, वहां पेपर लीक रोकने के लिए उसका मॉडल क्या है?
इसके विपरीत, प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने NEET मामले में त्वरित कार्रवाई की, 13 लोगों को गिरफ्तार किया, दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित की और संसद में चर्चा के लिए भी तैयार है।
अपने शासन की चूक पर चुप्पी और दूसरे की कार्रवाई पर राजनीति — कांग्रेस का ये दोहरा रवैया देश समझ चुका है!
जब राजस्थान की कांग्रेस सरकार में हुए पेपरलीक के ख़िलाफ़ छात्र आंदोलन कर रहे थे, तब पुलिस ने उन पर बर्बर लाठीचार्ज किया
जब कांग्रेस के शिक्षामंत्री से लाठीचार्ज पर सवाल किया , तो जवाब
“लाठी नहीं मारते , तो क्या लड्डू खिलाते “
“पेपर लीक जिसने किया उसको सजा मिलेगी , इसके ख़िलाफ़ सड़क पर बैठ कर नौटंकी करने से कुछ नहीं होगा “
बताओ राहुल गाँधी जी , राजस्थान के तत्कालीन शिक्षामंत्री और अभी आपकी पार्टी के अध्यक्ष , पेपरलीक पर कितनी अच्छी बात आपको बता रहे हैं
आखिर और कितने अच्छे दिन चाहिए?
जिनके राज में राजस्थान में सर्वाधिक पेपर लीक हुए, उन अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा को भी पेपर लीक के खिलाफ मार्च निकालने, प्रदर्शन करने और गिरफ्तारी देने का अवसर प्राप्त हुआ है।
पेपर लीक करने वालों पर करारा प्रहार! 🚫
युवाओं के भविष्य के लिए और पेपर लीक की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन का निर्णय लिया है।
रिफॉर्म्स और इस्तीफा तो केवल एक बहाना है। धर्म विरोधी और देश विरोधी ताकतों का असली निशाना केवल प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी हैं।
लेकिन देश की जनता उनके हर षड्यंत्र का लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देती रहेगी।
युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के लिए सदैव सर्वोपरि रहा है।
पेपर लीक जैसे संगीन अपराधों के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की स्थापना का ऐतिहासिक निर्णय युवा शक्ति के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता, अटूट इच्छाशक्ति और सुशासन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।
यह व्यवस्था दोषियों के विरुद्ध त्वरित सुनवाई और कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगी, ताकि देश के करोड़ों युवाओं की मेहनत, प्रतिभा और सपनों के साथ खिलवाड़ करने वालों को शीघ्र और कड़ा दंड मिल सके।
केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
युवाओं की प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना, उनके सपनों को नई उड़ान देना और उनकी मेहनत को न्याय दिलाना मोदी सरकार का अटल संकल्प है। यही विकसित भारत की मजबूत नींव और युवा शक्ति के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता है।
पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा होता है क्या ? - गोविन्द सिंह डोटासरा (तत्कालीन शिक्षा मंत्री और वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)
सत्ता में थे तो यह बयान था अब विपक्ष में है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे है!
पुराने वीडियो बाहर आने लगे हैं... यूं कहें गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं.....!!
शिक्षा मंत्री करवाता है क्या पेपर लीक ?
राजस्थान में कांग्रेस सरकार के शिक्षा मंत्री का तब यह जवाब था..!!
सोशल मीडिया वायरल..!
कांग्रेस के उस महान नेता का नाम बताओ…
जिसके शिक्षा मंत्री रहते हुए एक के बाद एक
लगातार 19 पेपर लीक हुए थे…
पेपर लीक पर वो महान नेता कहते थे…
जो पेपर लीक का नाम ले, उसे जेल में डालो…
और विपक्ष में आते ही वो नेता छात्रों के हित में सड़कों पर निकल पड़े है…😂😂
कांग्रेसी नेता बनना आसान नहीं हैं…
नीचता, बेशर्मी, बेहयाई, ढीठपने मे PHd करनी पड़ती है…😎😎
NEET पेपर लीक की तरह राजस्थान में भी REET का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द हुई थी, लेकिन तब किसी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया था। आज वही लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं।
कुल मिलाकर, राजनीति में सब कुछ सत्ता के स्वार्थ के लिए ही होता है।
मैं राहुल गांधी इनको चुनौती देता हूं कि यदि उनमें हिम्मत है, यदि वे सचमुच विद्यार्थियों का हित चाहते हैं, लोकतंत्र को मानते हैं और संविधान में विश्वास करते हैं, तो वे इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करें।
(मुंबई | 23-7-2026)
#Maharashtra#Mumbai
सब प्लान के मुताबिक चल रहा है या नहीं,
इस बात की टोह लेता हुआ सबसे बड़ा 'कोकोरोच'👇
वीडियो में मौजूद हर चेहरे को ध्यान से देखें! क्या इनके चेहरे बताते हैं कि इनको किसी बात का दुःख हो ?
इसीलिए सोचना तो आम लोगों को है। क्योंकि CJP का प्रोटेस्ट वास्तव में लोगों की भावना का फायदा उठाने और अपने स्वार्थ को पूरा करने का एक जरिया है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी द्वारा पेपर लीक अपराध के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन का निर्णय राष्ट्र की निर्णायक आवाज है।
इससे नए भारत में प्रतिभा के साथ न्याय होगा, परिश्रम को उसका सम्मान मिलेगा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कानून शीघ्र, कठोर और निर्णायक दंड देगा।
नए भारत में युवाओं का हित सर्वोपरि है।
"पुलिस प्रदर्शनकारियों को लाठी नहीं तो क्या लड्डू देती "
"BJP नौटंकी करेगी तो लाठियां पड़ेंगी"
-- कॉन्ग्रेसी शिक्षा मंत्री,राजस्थान
REET पेपर लीक 2021 के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर
काँग्रेस सरकार ने लाठीचार्ज करवाया फिर बेशर्मी से उनको जायज ठहराया
वही कॉंग्रेस आज कह रही है लाठी चार्ज क्यों किया ...?
पेपरलीक पर चर्चा करनी है तो विधानसभा में आओ , सड़क पर क्यो नौटंकी कर रहे हो
19 पेपरलीक करवाने के बाद , राजस्थान के कांग्रेस के तत्कालीन शिक्षामंत्री का बयान
उफ़! ये पुराने वीडियो...
सत्ता और विपक्ष से बाहर होते ही नेताओं के पुराने वीडियो डिजिटल स्पेस से ऑटोमेटिक डिलीट हो जाने चाहिए। ढूंढने पर भी खोजे नहीं जा सकें, ऐसी कोई पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। वरना ये पुराने वीडियो बहुत परेशान करते हैं।
सत्ता का रौब अलग तरह का होता है और विपक्ष की बेतकल्लुफी भी अलग तरह की होती है। दोनों ही स्थिति में नेता लोग अपनी ठसक के हिसाब से बयान दे देते हैं। बयान रिकॉर्ड हो जाते हैं और वे वायरल तब होते हैं जब नेता नहीं चाहते कि वे वायरल हों। बड़ी अजीबो-गरीब स्थिति हो जाती है।
ये हमारे गोविंद सिंह डोटासरा जी हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सबसे ज्यादा मुखर हैं। चूंकि नीट का पेपर लीक हुआ है और उस वक्त शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन जब आप स्वयं शिक्षा मंत्री थे और रीट का पेपर लीक हुआ तब आपके तर्क अलग होते हैं।
विरोधाभास ही विरोधाभास हैं
इसलिए हम हमारे देश के आईटी पेशेवरों का आह्वान करते हैं कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें कि एक निश्चित टाइम फ्रेम में यह बयान वाले वीडियो डिजिटल स्पेस से ऑटोमेटेकली गायब हो जाएं। ताकिवक्त आने पर हमारे नेताओं को शर्मिंदा नहीं होना पड़े।