इसमें साफ तौर पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की मिली भगत है, जो भी मेडिकल कॉलेज के द्वारा जेके लोन अस्पताल में प्लेसमेंट पर लगाए गए थे उनको नहीं हटाया, ओर जो डायरेक्ट जेके लोन से थे केवल उनको हटाया है।
@RAJ_health_rj14@BhajanlalBjp@RajCMO@nhm_rajasthan@GajendraKhimsar@bharatbeniwal_ परमानेंट होने की बारी आई तो सबको याद आ गया कि यह कौन है पहले किसी को नहीं आया जब सब लोग इसे ही ईलाज करवा रहे थे तब कहां गए थे सारे के सारे तब तो कोई बोल नहीं रहा था जब अपना पूरा समयजनता के स्वास्थ्य के लिए दे दिया उन्हें पर उंगली उठा रहे हो वाह
राजस्थान में कार्यरत सभी निविदा नर्सिंग ऑफिसर को नौकरी से हटा जा रहा है, @BhajanlalBjp@GajendraKhimsar ने राजस्थान में ठेका प्रथा बंद कर दी है, @BhagwantMann जी को राजस्थान से सीखना चाहिए था कि ठेका प्रथा कैसे खत्म होती हैं, नौकरी देके नहीं छिन्न के!
इस लिए अनुभव जरूरी है, ना कि रट्टू तोता बनना।
और राजस्थान में पहले से काम कर रहे निविदा नर्सिंग ऑफिसर को हटाया जा रहा है, लेकिन आखिर काम अनुभव ही आयेगा।
#नर्सिंग_भर्ती_मेरिट_बोनस
कुछ भाई एग्जाम देके राजमेश से आए है, बेचारों को कैनुला लगाना तक नहीं आता। ओर JWC वाले कोचिंग माफियाओं के दलाल भड़वे चिल्लाते रहते है अनुभव से काम नहीं चलता एग्जाम पास करना जरूरी है।
#नर्सिंग_भर्ती_मेरिट_बोनस
📢 प्रदेश के चिकित्सा तंत्र की रीढ़ बने संविदा एवं आउटसोर्स नर्सिंग कर्मियों के साथ अन्याय कब तक?
माननीय@sharatjpr जी एवं @hemantkumarnews जी,@ml_vikas जी
आपका ध्यान प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के अधीन संचालित चिकित्सालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा, आउटसोर्स एवं मैनपावर एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत नर्सिंग कर्मचारियों की गंभीर स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
एक ओर राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन हेतु संविदा नर्सिंग कार्मिकों की सेवाओं की निरंतरता के लिए बजट स्वीकृत करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कर्मचारियों को बिना किसी ठोस कारण, बिना वैकल्पिक व्यवस्था एवं बिना न्यायोचित प्रक्रिया अपनाए कार्यमुक्त किया जा रहा है। यह न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है बल्कि कर्मचारियों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर संविदा कार्मिकों के हितों की रक्षा एवं सेवा निरंतरता के संबंध में दिए गए आदेशों एवं निर्देशों की भी कई स्थानों पर प्रभावी पालना नहीं हो रही है। यदि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की जा रही है तो यह विधि के शासन (Rule of Law) एवं न्यायपालिका की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है, मरीजों का भार लगातार बढ़ रहा है और सरकार स्वयं सेवाओं की आवश्यकता स्वीकार कर रही है, तो फिर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी नर्सिंग कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने का औचित्य क्या है?
संविदा नर्सिंग कर्मियों ने कोरोना जैसी महामारी,अनेक आपात परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा की है। आज वही कर्मी अपने रोजगार, परिवार एवं भविष्य को लेकर असुरक्षा की स्थिति में खड़े हैं।
राजस्थान नर्सिंग यूनियन @RajGovOfficial से मांग करती हैं कि—
✅ कार्यमुक्त किए गए सभी संविदा/आउटसोर्स नर्सिंग कर्मियों की सेवाएं तत्काल बहाल की जाएं।
✅ उच्च न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए।
✅ सेवा निरंतरता एवं रोजगार सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट नीति जारी की जाए।
✅ दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही की जाए।
न्यायालय के आदेशों की अवहेलना, स्वीकृत पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को हटाना तथा स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है बल्कि प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है।
@SUMANJAAT1234@MPYadav_@manphoolsaran7@Anjuchoudharye@RajCMO@RajGovOfficial
#SaveContractNurses #JusticeForNurses #RajasthanHealth #NursingStaff #HealthcareWorkers #RuleOfLaw
#JusticeForContractNurses
#SaveContractNurses
#NursesNeedJustice
#RajasthanNurses
#NursingStaffRights
#HealthcareHeroes
#RespectNurses
#StopUnfairTermination
#ContractEmployeesRights
#RuleOfLaw
#HighCourtOrders
#RajasthanHealthServices
#HealthcareWorkers
#Nर्सिंग_कर्मियों_को_न्याय_दो
#संविदा_नर्सेज_को_बहाल_करो
#संविदा_नर्सेज_के_साथ_अन्याय_बंद_करो
#हाईकोर्ट_आदेशों_की_पालना_करो
#नर्सिंग_कर्मियों_की_सेवा_निरंतर_रखे
#राजस्थान_स्वास्थ्य_सेवाएं
#नर्सिंग_कर्मियों_को_न्याय