@imshaukatali सांसद का काम पूरे क्षेत्र की आवाज़ बनना है, किसी एक समुदाय का प्रवक्ता बनना नहीं। Afzal Ansari गाजीपुर के सभी लोगों के सांसद हैं, जबकि कुछ नेता हर मुद्दे को केवल साम्प्रदायिक चश्मे से देखने में लगे रहते हैं।"
बिजली व्यवस्था की ऐसी हालत कर दी है बीजेपी सरकार ने कि जनता परेशान होकर रह गई है
कहीं घंटों कटौती कहीं लो वोल्टेज तो कहीं बिलों का बोझ लेकिन सरकार को जनता की परेशानी से ज्यादा प्रचार की चिंता है।
गर्मी में लोग रात भर जागने को मजबूर हैं और जिम्मेदार लोग सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त
720 में से केवल 107 नंबर का ही जवाब दे पाया दिनेश का बेटा , पिता ने 10 लाख में खरीदा था NEET का पेपर
NEET UG-2026 पेपर लीक केस में CBI जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. आरोपी दिनेश बिवाल ने बेटे के लिए 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा, लेकिन बेटा ऋषि परीक्षा में सिर्फ 107 नंबर का ही सवाल सही कर पाया. जांच में टेलीग्राफ पीडीएफ, WhatsApp चैट, सीकर फ्लैट, 150 संदिग्ध छात्रों और करोड़ों के नेटवर्क की बात सामने आई है.
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@sharatjpr #NEETPaperLeak #NEETUG2026 #CBI #EducationScam
@GauravPalRaj पाल जी दो रूपये के लिए खुन्नस खाए बैठे है सपा से ,
खैर बसपा जीरो होने वाली है उसकी हार्दिक शुभकामनाएं पाल जी ,
आप अपनी दो रूपये की पोस्ट की चिंता करे अखिलेश यादव जी का नहीं
@Voiceofpavan “ये कहना कि कोई समाजवादी कभी अम्बेडकरवादी नहीं हो सकता, खुद में अधूरी समझ दिखाता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर का मूल विचार था सामाजिक न्याय, समानता और भेदभाव का अंत। वहीं समाजवाद का आधार भी यही है—आर्थिक और सामाजिक बराबरी।
@OfficeOfKPM@kpmaurya1 **“खुद अपनी सीट हार चुके केशव प्रसाद मौर्य 2017 दोहराने की बात कर रहे हैं—इससे बड़ा मज़ाक क्या होगा?
2022 में सिराथू की जनता ने जमीन दिखा दी थी, और 2024 ने साफ कर दिया कि अब मुकाबला एकतरफा नहीं रहा।
जो नेता अपनी सीट नहीं बचा पाया, वो पूरे प्रदेश की राजनीति का ज्ञान दे रहा है—
2017,2019 की शर्मनाक हार के बाद बहुत लोगों से मैंने सुना था कि समाजवादी पार्टी अब खत्म हो जाएगी।
अखिलेश यादव की राजनीति खत्म हो चुकी है,नेता जी के बिना सपा कुछ भी नहीं है।
फिर 2022 में सपा को 32% वोट प्रतिशत मिलता है और 2024 में 37 लोकसभा सीट जीतकर मोदी सरकार को हिलाकर रख दिया।
@Sanjay_Sang90@Mayawati जब ज़मीन पर न मजबूत संगठन बचा है, न सांसद-विधायक, फिर भी हर बार सत्ता पक्ष के बिल का समर्थन करना सवाल खड़ा करता है—क्या यह विचारधारा है या सिर्फ राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश?”
@Sanjay_Sang90@Mayawati “आज की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी पार्टी के पास ज़मीन पर न मजबूत संगठन बचा हो, न पर्याप्त सांसद-विधायक, तब भी वह बार-बार सत्ता पक्ष के हर बिल का समर्थन क्यों करती है। क्या यह वैचारिक सहमति है या फिर राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने की रणनीति?