पुराना अकाउंट सस्पेंड करवा दिया Twitter पर एक बार फिर से आया हूँ सभी राष्ट्र भक्त भाई बहनों से जुड़ना चाहता हूँ। फॉलो करके कमेंट में जय हिन्द लिखे 🙏
जयहिंद 🙏🚩
दिबांग एनडीटीवी में मेरे बॉस थे। हम जैसे हमेशा उतावले रहने वाले युवाओं को तिरछी निगाहों से तौलते रहते थे, जो काम से ज़्यादा महत्वाकांक्षी नज़र आते थे। साथ में काम करते हुए हमारी उतनी बात नहीं हुई, जितनी बाद में हुई। मैं उन्हें पसंद करता हूं, प्यार करता हूं। उन्हें पिछले कई बरसों से आप एबीपी न्यूज़ पर देख रहे होंगे। अब वह अपना नया यूट्यूब चैनल लेकर आ रहे हैं, दिबांग ऑफ़िशियल। उनके चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा। इस समय उन जैसी तमाम आवाज़ें देश की ज़रूरत है।
कल खबर चलवाई गई थी कि चढ़ावे की चोरी अभी कुछ महीने से शुरू हुई। आज अमर उजाला लिख रहा है कि महाकुंभ के समय से चल रही है। ₹10-15 लाख रोज गायब किए जा रहे थे। इतने समय बाद ये पैसा कैसे बरामद होगा? क्या पता राज्य की सीमा और देश की सीमा भी पार कर गया हो? क्या पता किस काले धंधे में खप गया हो? इतने समय तक इतने बड़े पैमाने पर चोरी चलती रही और राम मंदिर के अंदर खूंटा गाड़ कर बैठे मूर्धन्यों को कुछ पता नहीं चला? इसकी जांच तो अब उत्तर प्रदेश एसटीएफ जैसी को�� संस्था ही कर सकती है। वो भी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की माॅनीटिरिंग में। एफआईआर ना दर्ज कराने की कोई वजह नहीं बची है अब।
जिम्मेदार सो रहे थे,वो मंदिर लूट रहे थे..
श्री राम मंदिर में लगी 14 दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकने की जिम्मेदारी इन महाविधर्मियों पर थी।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय,ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव के नाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं।
चंपत राय मेन हैं.अयोध्या के कारसेवकपुरम में रहते हैं।मंदिर संचालन के लिए 15 सदस्यीय ट्रस्ट बना है। लेकिन, मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी चंपत राय की मानी जाती है।
कुछ दिन पहले चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में एक नया कर्मचारी शामिल हुआ था। 7 जून, 2026 को उसने नोटों की एक गड्डी छिपा ली। उसकी यह हरकत CCTV में रिकॉर्ड हो गई।
हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर चंपत राय ने बाकी ट्रस्टियों को इसकी जानकारी नहीं दी। हेरा-फेरी की ���ानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई।
चढ़ावा चोरी मामले का मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव बताया जा रहा है। टिन्नू कभी चंपत राय का ड्राइवर हुआ करता था आज करोड़पति है।वर्तमान में टिन्नू चंपत राय के बहुत करीबी लोगों में शामिल हैं।मंदिर परिसर की कई व्यवस्थाएं चंपत के कहने पर वही देखता हैं।
चंपत राय ने 12 जून को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। कहां- ट्रस्ट समय-समय पर चढ़ावे की राशि को ऑडिट कराता है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है।
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अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई नहीं है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं।
ये शिलाएं 2002 तक कार���ेवकपुरम में रहीं। मिट्टी की पूजित शिलाएं आज भी कारसेवकपुरम में रखी हैं, लेकिन धातु की शिलाएं कहीं दिखाई नहीं देतीं। संतोष दुबे के मुताबिक, सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था।
ये शिलाएं कारसेवकपुरम में जहां सुरक्षित रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगे थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, यह किसी को नहीं पता है।
पूरी खबर: https://t.co/KgBAblvBeY
UP- अयोध्या में श���रीराम जन्मभूमि मंदिर बनने के बाद विनय कटियार सिर्फ एक बार मंदिर गए हैं. उन्होंने बताया की मंदिर में प्रवेश के लिए उनसे "पास" मांगा गया. इस अपमानजनक व्यवहार के बाद उन्होंने मंदिर जाना बंद कर दिया.
विनय कटिहार ने अब ट्रस्ट में बैठे चोरों के लिए कल डंडा चलाने क��� आह्वान किया था.
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर आंदोलन में विनय कटियार की भूमिका प्रमुख नेताओं में रही है. उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए जेलें काटी, सड़कों पर आंदोलन किया, लाठियां खाई. आज कटियार से मंदिर में जाने के लिए "पास" मांगा जा रहा है.
यह बहुत पीड़ाजनक है.
राम मंदिर चढ़ावा कांड का ‘इनसाइड स्टोरी’ खुलासा। संघ-VHP की अंतर्कलह से फूटा गबन का राज।
अंदरूनी खींचतान ने खोला राम मंदिर चढ़ावा कांड का पिटारा।
ट्रस्ट में बढ़ते ‘दखल’ पर मची नाराज़गी, फिर खुला करोड़ों के गबन का खेल।
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला अब केवल चोरी या वित्तीय अनियमितता भर नहीं मान��� जा रहा, बल्कि इसके पीछे ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली हलकों की अंदरूनी खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघ और विहिप से जुड़े दो धड़ों के बीच लंबे समय से चल रही असहजता और ट्रस्ट पदाधिकारियों के बेहद करीबी रहे कुछ लोगों के रामजन्मभूमि परिसर में बढ़ते दखल को लेकर नाराज़गी थी।
बताया जा रहा है कि इसी नाराज़गी और अंदरूनी टकराव के बीच चढ़ावा गबन की जानकारियां बाहर आईं। बताते हैं कि नगद रुपयों के मंदिर के यात्री सुविधा केंद्र में कर्मचारी पकड़े भी गए थे। बाथरूम तक में पैसा छूए हुए थे लेकिन तब ��ी ट्रस्ट ने FIR नहीं करवाई। इसके बाद दूसरा गुट सक्रिय हो गया। बात अखिलेश यादव तक पहुंच गई और उन्होंने ट्वीट कर सियाम मामला सार्वजनिक हो गया। मामला धीरे-धीरे खुलता गया और फिर संदिग्ध कर्मियों, उनके नेटवर्क, संपत्तियों और कथित संरक्षण पर सवाल खड़े हो गए। अब जांच सिर्फ रकम की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि किसके संरक्षण में यह खेल चलता रहा और कैसे अंदरूनी संघर्ष ने पूरे प��रकरण को उजागर कर दिया।
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मेरठ
➡बीजेपी MLC धर्मेंद्र भारद्वाज पर कार्रवाई
➡MLC धर्मेंद्र भारद्वाज पर 2 राज्यों में कार्रवाई
➡यूपी,उत्तराखंड के 3 शैक्षिक संस्थानों की संपत्ति जब्त
➡प्रवर्तन निदेशालय ने धर्मेंद्र की संपत्तियां जब्त की
➡धर्मेंद्र भारद्वाज की 14 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त
➡फर्जी छात्र दिखाकर स्कॉलरशिप के 29 करोड़ रुपये डकारे थे
➡ED ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था
➡मेरठ का महावीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में घोटाला
➡रुड़की का रिम्स,मदरहुड इंस्टीट्यूट भी घोटाले में शामिल
➡संस्थाओं से जुड़ी मनिका शर्मा को ��ेल हुई थी
➡CCS विवि की कार्य समिति के सदस्य हैं MLC धर्मेंद्र भारद्वाज
➡2011 से 2017 के बीच करोड़ों रुपए का स्कॉलरशिप घोटाला
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ब्रेकिंग न्यूज। अयोध्या।
राम मंदिर चढ़ावा कांड में नया खुलासा: बैंक ने कंपनी को ठेका दिया, कर्मचारी ट्रस्ट ने तय किए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब जांच का फोकस सिर्फ संदिग्ध कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों की तैनाती में बैंक, आउटसोर्सिंग कंपनी और ट्रस्ट की ��ूमिका जांच के घेरे में है।
बड़ा खुलासा यह है कि बैंक ने कर्मचारियों को कंपनी के जरिए आउटसोर्सिंग पर रखा था, लेकिन कर्मचारी ट्रस्ट की ओर से तय किए गए थे। यानी जिन लोगों को चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील काम में लगाया गया, वे या तो किसी पदाधिकारी के परिचित बताए जा रहे हैं या उनसे जुड़ा नेटवर्क रखते थे।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों का न तो उचित सत्यापन हुआ, न नियमित तल���शी, न प्रभावी निगरानी। ट्रस्ट के कर्मचारी आईकार्ड लगाकर परिसर में आसानी से घूमते थे। सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात होने के बावजूद ट्रस्ट कर्मियों की आवाजाही पर वैसी सख्ती नहीं दिखी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन संदिग्धों के ��ास से रकम बरामद हुई, वे 12 से 18 हजार रुपये महीने पर काम कर रहे थे, लेकिन दिन-रात मंदिर परिसर में रहते थे। अब जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने कम वेतन वाले कर्मियों के पास अचानक बड़ी रकम, संपत्ति और निवेश कैसे आए।
सबसे बड़ा सवाल चढ़ावे के हिसाब पर है। दानपात्रों में आने वाली रकम पहले से बेहिसाब होती थी। गिनती के दौरान ही असली खेल होने की आशंका जताई गई है। जो रकम रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हुई, वह हिसाब से बाहर रह गई। इसी वजह से वास्तविक गबन कितने करोड़ का है, इसका पता लगाना बेहद कठिन हो सकता है।
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टिन्नू यादव..
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंप�� राय के करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पिछले कई दिनों से चर्चाओं में है. टिन्नू यादव ने आज अपनी चुप्पी थोड़ी है. बता रहे हैं कि कैसे 2-2 पैसा इकट्ठा करके इतनी अकूत संपत्ति इन्होंने कमाई है. कमाई का तरीका ब्यौरेवार नहीं बताया है.
दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों को टिन्नू यादव से यह तरीका सीखना चाहिए और उस पर शोध भी करना चाहिए.
ये बीजेपी की तारीफ कर रही है या बुराई?
क्या कहना छह रही है बीजेपी विपक्ष के नेताओं को काम नहीं करने देती है इसलिए बीजेपी में शामिल हो गयी?
सुनिए! इनके तर्कों को गौर से सुनिए!
ओडिशा में कंधा आदिवासी समुदाय के लोग प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं जिसका ठेका वेदांता लिमिटेड को मिला है. यहां के लोग ये विरोध आख़िर क्यों कर रहे हैं? उनके इस संघर्ष में उनका क्या कुछ दांव पर लगा है? बीबीसी की टीम ने ओडिशा जाकर यही जानने की कोशिश की.
रिपोर्ट: विष्णुकांत तिवारी ( @vishnukant_7 )
शूट, एडिट: अंतरिक्ष जैन ( @antarikshjain )
अब आरोप लगा है तो प्रभु राम की मर्यादा का पालन करना चाहिए। सफ़ाई संदेह से परे हो इसकी जाँच किसी और ���े करानी चाहिए और उस कमेटी में आरोप लगाने वाले अखिलेश यादव और संजय सिंह को भी होना चाहिए। आरोप गंभीर है। अगर ग़लत है तो शंका का निवारण पुख़्ता तरीके से होना चाहिए।
ट्रंप की सनक, ज़िद और तौर तरीक�� से लाख असहमति के बावजूद ये तो मानना पड़ेगा कि वो सवालों से भागते नहीं हैं. हर रोज़ मीडिया के सामने आते हैं . आड़े - तिरछे सवालों का सामना करते हैं . कुछ प्रेस वालों से वो काफी चिढ़ते भी हैं . इंटरव्यू के दौरान कई बार आपा खोते हैं . फिर भी अगली बार उसी रिपोर्टर को इंटरव्यू देते हैं .
CNN, NBC और NYT जैसे मीडिया संस्थानों और उनके पत्रकारों के खिलाफ कई बार बयान दे चुके हैं फिर भी उनके सवालों से जूझते हैं . ये ट्रंप की खासियत है .