माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी आपके अधिकारी मोटे कमीशन के लिए अनावश्यक सॉफ़टवेयर और मोबाइल ऐप को सैकड़ों करोड़ में ख़रीद कर
बेसिक शिक्षा परिषद और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है । शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा अन्य कार्य करने पर मजबूर करते हैं, दिन भर मोबाइल फ़ोन के ऐप में व्यस्त रखते हैं ।
आप पता करिएगा जितने में ये सॉफ़्टवेयर और ऐप ख़रीदे गए हैं उतने पैसे में सभी स्कूलों में फ़र्नीचर,कंप्यूटर लैब,और अंग्रेज़ी सहित अन्य एक्सपर्ट टीचर रख के बच्चों को प्राइवेट स्कूल से ज़्यादा अच्छा शिक्षा दे सकते थे।
और हाँ इन अधिकारियों को बोलिए कि पहले सभी घूसखोर विभागों ने सबके लिए आनलाइन अटेंडेंस अनिवार्य करें,उसके बाद बारिश के मौसम में सुदूर गाँवों में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर लागू करे ।
@yadavakhilesh
#09अक्टूबर_लखनऊ_चलो
ऐसा लगता है कि प्रतिदिन शिक्षकों को अपमानित करना ,निलम्बित करना एवं वेतन रोकना ही अधिकारियों का गुड वर्क होता जा रहा है
अब सफ़ाई कर्मचारी विद्यालय की गतिविधियों का सत्यापन करेंगे ।
इससे पूर्व में रसोईया को गेंहूँ पिसाने भेजा तो शिक्षक निलम्बित
फ़र्रुख़ाबाद के बीएसए द्वारा मा उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने से तंग आकर शिक्षक ने जान दे दी लेकिन प्रकरण में निलंबित बीएसए के स्थान पर शिक्षक हुआ
शिक्षक विशुद्ध वेतन भोगी है उसका मकान निर्माण ,बच्चों की पढ़ाई ,बच्चों के विवाह सब बैंक लोन से हो रहे हैं जैसे ही उसका वेतन रोका जाता है या निलम्बित किया जाता है उसका पूरा परिवार तिलमिला जाता है ।
शिक्षकों के ऊपर निलंबन या वेतन रोकने की कार्यवाही बेवजह और उच्च अधिकारी को खुश करने के लिए की जाती है ।बेसिक शिक्षा में भ्रष्टाचार इतना गहरा गया है कि निलम्बन या वेतन बहाली में शिक्षक का वेतन लूट लिया जाता है ।
विद्यालय में शिक्षक केवल शिक्षण के लिये उत्तर दायी होना चाहिये
लेकिन शिक्षक को ग़ैर शैक्षणिक कार्यों के लिए ज़िम्मेदार ठहरा कर उसके विरुद्ध कार्यवाही करके शोषण किया जा रहा है और शोषण करने वालों को मीटिंग्स में ताली बजवा कर सम्मानित कराया जाता है
शिक्षक तनाव में जी रहे हैं क्योंकि किसी भी विभाग का कोई भी अधिकारी विद्यालय का निरीक्षण करके किसी भी बात पर शिक्षक को बेइज्जत कर जाता है या कार्यवाही करा देता है
अधिकारियों की दमनात्मक एवं भ्रष्ट कार्यशैली से शिक्षकों में ज़बरदस्त आक्रोश है लेकिन यही शिक्षक जब अधिकारियों के भ्रष्टाचार के विरोध में उतरते हैं तो अधिकारी बड़ी चालाकी से इन शिक्षकों को सरकार विरोधी साबित कर देते हैं
यह ऐसे अधिकारी हैं जो पिछली सरकार में कुछेक के पैर छूकर मलाई मार रहे थे अब यही काम यहाँ पर जारी है
यह तो मलाई मार कर चले जाते है लेकिन इनके कुकृत्यों से नाराज़ शिक्षक या कर्मचारी नुक़सान सरकार का करते हैं
इनकी तानाशाही व भ्रष्टाचार के विरोध में संघ के पदाधिकारी 9 अक्टूबर को शिक्षा निदेशालय पर धरना देंगे ।
देश के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली को लेकर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला।
40 दिन विधायक सांसद रहने वाले को पूरी ज़िंदगी पेंशन।
तो 40 साल काम करने वाले कर्मचारी को पेंशन क्यों नही?
@ArvindKejriwal का नारा है “जहाँ AAP का शासन वहाँ पुरानी पेंशन”