भारतीय, उत्तराखंडी एवं पहाड़वादी.Tweets in Personal Capacity.Interested in Legal, Political nuances.Learning History as an autodidact.RTs/Likes not endorsement.
छोड़ियों गौं को नातो के?
While reading collection of "proverbs & folklore of kumaon & garhwal" by Pt. G.D.Upreti., I came across this proverb under the sub heading "Disinterestedness". The book was published in 1894.
There is a mythology the U.S. built around the American War in Vietnam. It goes like this:
Young idealistic soldiers were sent into an unwinnable situation by confused politicians.
They came home broken and unappreciated.
It was a tragedy. A mistake. A lesson learned.
Notice what that story does.
It centers Americans.
Their trauma. Their confusion. Their homecoming. Their feelings.
In this story, the Vietnamese people are a backdrop.
A jungle. An obstacle. An abstraction.
Three million dead Vietnamese people are the scenery for a story about American self-discovery.
They made hundreds of movies about Vietnam.
The Deer Hunter. Apocalypse Now. Platoon. Full Metal Jacket. Born on the Fourth of July. Hamburger Hill.
Count how many of them center a Vietnamese character with a full human life, a family, a name you remember after the credits roll.
They turned our genocide into their coming-of-age story.
They lost the war and still managed to make themselves the main character.
And then, with extraordinary arrogance, they put their soldiers' names on a wall in Washington and call it a memorial, as if the dead to be mourned were the people who flew 10,000 miles to do the killing.
Where is the wall for our three million?
There isn't one.
Because in their telling, we were never quite real enough to mourn.
हाथ उठाओ! देवदार को बचाओ!!
गंगोत्री मार्ग पर 7000 प्राचीन देवदार कटने की कगार पर
मध्य में मुख्य मैसेज (सफेद बैकग्राउंड पर काला/गहरा टेक्स्ट)
चारधाम ऑल-वेदर रोड के नाम पर
56,000 पेड़ कट चुके… अब बारी 7,000 देवदार की!
उत्तरकाशी-गंगोत्री ��ार्ग पर पर्यावरण का विनाश बंद करो
ये हमारी ग्लेशियरों की रक्षा करने वाले देवदार हैं
ये हमारी गंगा की साँस हैं
इन्हें काटना मतलब हिमालय को मारना है!
नीचे छोटे-छोटे पॉइंट्स
RSS सह-सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल जी ने भी किया विरोध
डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी ने कहा – “ये पर्यावरण के खिलाफ है”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी पहुंचे समर्थन में
अपनी आवाज़ उठाओ!
#SaveGangotriDeodar #देवदार_बचाओ #हिमालय_बचाओ
@PMOIndia @PushkarDhami @Harsarangini @Avimukteshwarananda
#देवदारबचाओ #SaveDeodarOfGangotri #चारधाम_नहीं_काटधाम #हिमालयबचाओ #उत्तरकाशी #Gangotri #SaveHimalayas #EnvironmentFirst
पेड़ कटने का दर्द 😔
वह आम का पेड़
ठीक यहीं था, सड़क किनारे
जहाँ से मुझे हर दिन
बस पकड़नी होती,
बस जब तक पहुँचती नहीं
वह मुझे तंग करता
पहले मेरी ओर एक आम फेंकता
मैं ख़ुश होकर जैसे ही दाँत गड़ाती
“ये तो थोड़े खट्टे हैं” ग़ुस्से में बोलती
वह हँसता :
तुम बस में सोती रहती हो न!
यह नींद भगाने के लिए था,
अच्छा अब मीठे आम गिराता हूँ
सच्ची में!
और तब तक बस आ जाती।
उस दिन बस पकड़ने सड़क पर पहुँची
वह ग़ायब था।
सालों से मेरा ठीक यही इंतज़ार करता
वह आम का पेड़
कहाँ जा सकता है भला?
दूसरे दिन अख़बार में पढ़ी
उसके मारे जाने की ख़बर।
मैं उस दिन ख़ूब रोई
जैसे मारा गया हो कोई घर का अपना
मैं उस दिन सोई नहीं रात भर
कैसे काट दिया गया वह यही सोचकर।
दूसरे दिन दौड़ी उधर
सोचा उसकी गंध समेट ले आऊँगी
अपने आँगन में रोप दूँगी
उसकी गंध बढ़ेगी
तब मैं उसकी गंध लेकर
घर से निकलूँगी
लौटू���गी जब उसकी गंध को
आँगन में खड़ी पाऊँगी।
मगर मेरे सपने टूट गए
धूल का बवंडर जब हँसने लगा मुझ पर
देखा, मेरे आम के पेड़ की गंध
धूल के बवंडर से लड़ रही थी
बिल्कुल गुत्थमगुत्था।
मैं भागी थाने की ओर
यह रपट लिखवाने कि
मेरे साथी की हत्या हुई है,
थाना ठहाके लगाकर हँसने लगा
डंडा दिखाता हुआ ��ोला
पहले तू बता
तेरा उसके साथ संबध क्या था?
मैं आज तक दर-दर भटक रही हूँ
यही बताने के लिए
कि उसके साथ मेरा संबंध क्या था
मगर वहाँ कोई नहीं अब
ग़ायब हो चुका है सब
अब सिर्फ़ दूर-दूर तक धूल उड़ाती
चौड़ी सपाट सड़कें भर हैं...।
रचनाकार : जसिंता केरकेट्टा
एक तरफ प्रधानमंत्री कहते हैं- एक पेड़ मां के नाम लगाओ और दूसरी तरफ विकास का झूठा ढकोसला देकर लाखों पेड़ काटे जाते हैं।
• इसी सदन में कहा गया था कि हम देवदार वृक्ष को नहीं काटने देंगे, लेकिन भागीरथी के पास इको-सेंसेटिव जोन है और वहां 6,000 पेड़ काटने की अनुमति दे दी गई है।
• चारधाम ऑल वेदर रोड पर अंधाधुंध चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ और पहाड़ काटे जाएंगे तो निश्चित है कि भू-स्खलन बढ़ेगा।
• कई लोगों ने अपील की है कि यहां पर जो इको-सेंसेटिव जोन है, उसे बचाया जाए, लेकिन यह सरकार सदन में कुछ और कहती है, बाहर कुछ और करती है।
हिमाल��� में चौड़ीकरण असफल हो रहा है, सेना और यात्री भू-स्खलन ��ी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में यह सरकार कैसा विकास कर रही है?
: राज्यसभा में @Ranjeet4India जी
Hey @grok , when Ramman was inscribed on UNESCO's List of Intangible Cultural Heritage? Name the year please and tell us which government was in power in centre at that time in India?
बहन रवीना कठैत की मौत के बाद अब पिलखी अस्पताल में अनिश्चितकालीन धरना शुरू
टिहरी जिले के ग्राम सभा सेम बासर निवासी रवीना कठैत की मौत के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। परिजनों और स्थानीय लोग��ं ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के खिलाफ आज से पिलखी अस्पताल में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
इससे पहले भी पिलखी अस्पताल से रेफर की गई अनीशा नाम की महिला की मौत हो चुकी है।
लोगों ने मांग की है कि अस्पताल की लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए, पिलखी अस्पताल को उपजिला अस्पताल का दर्जा दिया जाए और बेलेश्वर अस्पताल में एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड तकनीशियन की नियुक्ति की जाए।
स्था��ीय लोग कह रहे हैं कि अब यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का सवाल है।
@pushkardhami @drdhansinghuk
#Uttarakhand #OperationSwasthya
पौड़ी जनपद के पाबौ ब्लॉक के ग्राम सभा बनेख में गुरुवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां भालू ने एक महिला पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
घायल महिला का नाम संकरी देवी (पत्नी बलबीर सिंह भंडारी) बताया जा रहा है। घटना के समय उनके साथ दो अन्य महिलाएं भी मौजूद थीं, जिन्होंने शोर मचाकर किसी तरह उन्हें भालू के हमले से बचाया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाबौ पहुंचाया गया, जह��ं उनका इलाज चल रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पाबौ ब्लॉक क्षेत्र में भालू के हमले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
@pushkardhami @SubodhUniyal1
#PauriGarhwal #Uttarakhand
हल्द्वानी के बुद्ध पार्क से आंदोलनकारी पूर्व सैनिक भुवन कठायत जी ने कहा कि चौखुटिया में 10 दिनों से “ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन” चलाया, पर नतीजा शून्य रहा।
क्या स्वास्थ्य सेवाएँ सिर्फ शहरों तक सीमित हैं ? सरकार कब सुनेगी पहाड़ की दर्द भरी आवाज़ ?
#Uttarakhand
नी करण दीहालो हमरी नि��ामी
नि करण दीहालो हमरो हलाल
If we try to implement what Girda expressed in these lines, then they will started protecting them. Perhaps it is wrong to speak out against those who are auctioning this land and spoiling it.
दलोंका दलबल नेता दिदा
आज पहाड़ की शान,पहाड़ की जड़ो से जुड़े हास्य कवि और लोक कलाकार आनंद बल्लभ भट्ट जी का गे��ाड़ घाटी चौखुटिया में चल रहे “ऑपरेशन स्वास्थ्य ” को मिला समर्थन।
जागो पहाड़ियो जागो, अपने हक़ हकूक के लिए एकजुट होकर लड़िये।
अधमरी व्यवस्था को बचाइये 🙏
#Uttarakhand #chaukhutiya #Almora
While people in Chaukhutiya continue their hunger strike against the “refer-refer” health system, another video from Kotabagh reveals yet another cruel reality.
From Mahatgaon comes a glimpse of what people in the hills call the “dandi-kandi” system.
On Friday night, 70-year-old Gopuli Devi fell seriously ill. With no road or vehicle access, villagers had no choice but to carry her on a cot for four long kilometers through the hills.
This is what healthcare looks like in Uttarakhand today. Before the “refer-refer” begins, there is “dandi-kandi”.
The struggle starts with the missing road, and it ends with a missing system of care.
@JPNadda@MoHFW_INDIA@drdhansinghuk
#OperationSwasthya #Uttarakhand
#Uttarakhand
चौखुटिया में चल रहे आमरण अनशन “ऑपरेशन स्वास्थ्य" को अपना समर्थन देने के लिए आज पूर्व सांसद @PradeepTamtaINC जी ने आन्दोलनकारिय��ं से मुलाकात कर अपना समर्थन प्रदान किया है।
प्रदेश की जनता व गेवाड़ की जनता खुद आकलन कर निर्णय लें 🙏
#uttarakhandnews
चौखुटिया में ऑपरेशन स्वास्थ्य दसवां दिन, चमोली जिले का भी मिला साथ।
चौखुटिया से लगे गढ़वाल के टेंटुड़ा के पूर्व सैनिक लामबगड़ निवासी चतुर सिंह नेगी भी आमरण अनशन में बैठे।
प्रदेश भर के साथियो जागो।
जागो पहाड़ियो जागो।
#Uttarakhand
No road connectivity, No waterline connectivity, No health infrastructure,No schools nearby. Yet, who have failed "the people". No questions from the incumbent @BJP4India
government. Til this level of sycophancy remains for any political party or leader, there will be no change.
कुछ दिन पहले पत्रकार अजित राठी ने भाजपा सरकार द्वारा IT पार्क, देहरादून में कुछ भूखंड RCC Developer नाम के प्राईवेट बिल्डर् को बेचने की खबर दी थी। भाजपा सरकार द्वारा उनके घर पर पुलिस भेजकर उन्हें धमकाने की कोशिश हो रही है ।
भाजपा स���कार पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबी हुई है l