10 December 2003!
मुझे आज भी London की वो सुबह याद है, जब Vedanta के साथ-साथ, हिंदुस्तान भी इतिहास रचने के लिए तैयार था।
उस समय मुझे अक्सर लगता था कि भारतीय businesses को सही value और growth नहीं मिल रही।
मैंने तय कर लिया कि Vedanta को London Stock Exchange पर list करेंगे।
पर एक बड़ी दिक्कत थी। उस दौर में भारत के Foreign Exchange और Cross Border Listing के नियम बेहद सख़्त थे। LSE की एक ही शर्त थी : भारत सरकार से No Objection Letter।
मैं दिल्ली गया, कई अफ़सरों से मिला। कई दिनों की बातों, मुलाक़ातों के बाद, आखिर मुझे उस समय के हमारे visionary प्रधानमंत्री अटल जी से व्यक्तिगत गुज़ारिश करने का मौका मिला। उन्होंने पूरी बात सुनी, समझी और मुड़कर वित्त मंत्री जसवंत सिंह जी से जो कहा, वो मैं कभी नहीं भूलूँगा।
“लड़का ठीक लगता है। हमें इसकी मदद करनी चाहिए, देश में Foreign exchange आएगा।”
भारत सरकार से मिले NOC पत्र को हाथ में लेकर दोबारा London लौटा... the rest is history!
पहली भारतीय company को list कराना और फिर उस company का FTSE100 में जगह बना लेना, वाकई पहला और यादगार अनुभव था।
वो कहते हैं ना—
“कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।”
अगर आपने भी जीवन में कभी कोई ऐसा risk लिया हो, जिसने आपकी दिशा बदल दी हो, तो उसे comments में ज़रूर share कीजिए। औरों को प्रेरणा मिलेगी।
सर्गस्थितिविनाशानां जगतो यो जगन्मयः।
मूलभूतो नमस्तस्मै विष्णवे परमात्मने॥
भगवान श्री हरि के 'योगनिद्रा' में गमन की पावन तिथि देवशयनी एकादशी पर त्रिलोक स्वामी से प्रार्थना है कि उनकी कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर सर्वदा बनी रहे।
सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार हो।
लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे वनडे में टीम इंडिया को 388 रन का विशाल लक्ष्य मिला. जवाब में रोहित शर्मा ने सिर्फ 84 गेंदों में शतक ठोक दिया. अपनी पारी में उन्होंने 11 चौके और 3 छक्के लगाए. इस शतक के साथ रोहित लॉर्ड्स के मैदान पर वनडे में शतक लगाने वाले पहले भारतीय पुरुष बल्लेबाज़ बन गए.
#RohitSharma #INDvsENG #CricketNews #ABPNews
@gssjodhpur@Pvsindhu1 भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु को BWF जापान ओपन 2026 का किताब जीतने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आशा और उम्मीद करते हैं कि आप इसी तरह देश का नाम रोशन करते रहे जय हिंद जय भारत https://t.co/u4pWidI7T4
भारतीय बैडमिंटन की शानदार खिलाड़ी पी. वी. सिंधु जी को BWF जापान ओपन 2026 का खिताब जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
देश आप पर गर्व करता है, पुनः आपने हमें गर्वित किया है। आपके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की कामना है।
@Pvsindhu1
Thank you very much, Sir. 🙏 Gajju Bana, as my husband and I lovingly call you. 😄❤️
Grateful for your constant warmth, affection, and encouragement over the years. It truly means a lot. Looking forward to seeing you soon. 🙏
Every journey has a moment that reminds you why you never gave up. Today is that moment for me.
Receiving the National Award for Article 370 is an honour I will cherish for the rest of my life.
For fourteen years, I have simply tried to stay true to my craft, work with honesty and let my performances speak for themselves. This honour feels like the culmination of a journey filled with hope, perseverance, resilience and an unwavering love for cinema. It is a dream I have carried in my heart for years and today, I receive it with immense gratitude and humility.
Article 370 was never just another film for me. It was a story I deeply believed in. The fact that it was our home production makes this recognition even more emotional and personal. Every challenge, every conversation and every day on set was driven by one shared purpose, to tell this story with honesty and conviction.
My heartfelt gratitude to the Honourable Jury for this incredible recognition, to our visionary director, our phenomenal cast and crew and to every member of the audience who embraced Article 370 with such love and belief. You reminded us that meaningful stories will always find their way to people's hearts.
To my family, my team, my well-wishers and everyone who believed in me through every high and every low, thank you. Your faith gave me the strength to keep moving forward, even when the destination seemed far away.
This award is not the end of a dream, it is the beginning of a greater responsibility. To keep growing, to keep taking risks and to keep telling stories that matter.
Dreams do come true but only when passion refuses to give up. This one's for every dreamer who is still waiting for their moment.
Never stop believing. 🙏
सामने जवान बेटे की निर्जीव देह पड़ी थी… और एक अंग्रेज अफसर ने ठंडी आवाज़ में कहा— “बस एक बार कह दे कि ये तेरा बेटा है… फिर इसे अग्नि देने की इजाजत मिल जाएगी।” उस एक वाक्य ने जैसे एक बाप के सीने को चीर दिया, लेकिन जो जवाब आने वाला था… उसने इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
यह कहानी है उस पिता की… जिसने अपने दिल को पत्थर बना लिया, लेकिन देश का सिर झुकने नहीं दिया। यह कहानी है मास्टर अमीरचंद की, जिनका नाम आज भी बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन जिनका त्याग किसी भी बड़े बलिदान से कम नहीं था।
8 मई 1915… दिल्ली की जेल… और एक ऐसा दृश्य, जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है। एक तरफ अंग्रेजों का अत्याचार था… दूसरी तरफ एक पिता का अटूट साहस।
मास्टर अमीरचंद पेशे से एक साधारण अध्यापक थे, लेकिन उनके भीतर आज़ादी की ऐसी ज्वाला जल रही थी जो हर डर को खत्म कर दे। लाला हरदयाल और रासबिहारी बोस जैसे क्रांतिकारी भी उन्हें सम्मान से देखते थे। जब लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनी, तो उस योजना के पीछे उनकी भूमिका भी अहम थी।
अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लेकिन उनकी निर्दयता यहीं नहीं रुकी… उन्होंने उनके जवान बेटे को भी पकड़ लिया। उस मासूम को इतनी क्रूर यातनाएँ दी गईं कि उसने जेल की अंधेरी कोठरी में ही दम तोड़ दिया। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुःख क्या हो सकता है?
अंग्रेजों को लगा कि अब वो टूट जाएंगे। उन्होंने सोचा कि जब एक बाप अपने बेटे की लाश देखेगा… तो वह सब कुछ बता देगा। वे उन्हें उस कोठरी में ले गए जहाँ उनका बेटा निर्जीव पड़ा था… ठंडा… खामोश… और हमेशा के लिए दूर।
उस पल जैसे समय ठहर गया। एक पिता की नजर अपने बेटे के चेहरे पर टिक गई। वही चेहरा… जिसे उसने कभी अपने हाथों से सहलाया था, जिसे उसने अपने कंधों पर बैठाकर दुनिया दिखाई थी। आँखें नम हो उठीं… दिल भीतर ही भीतर चीख पड़ा… लेकिन होंठ अब भी खामोश थे।
अंग्रेज अफसर ने फिर कहा— “बस मान लो कि ये तुम्हारा बेटा है… इसे सम्मान से अंतिम संस्कार दे दो।” वह चाहते थे कि एक पिता की ममता उसकी मजबूती को तोड़ दे।
लेकिन उस दिन… एक पिता नहीं, एक क्रांतिकारी खड़ा था। उन्होंने अपनी आँखों के आँसू अंदर ही रोक लिए… और पत्थर जैसे स्वर में कहा— “यह मेरा बेटा नहीं है… मैं इसे नहीं पहचानता।”
उस एक वाक्य में एक पिता का पूरा दिल टूट गया… लेकिन देश का सिर ऊँचा हो गया। उन्हें पता था कि अगर आज वह भावनाओं में बह गए, तो उनके साथियों की जान खतरे में पड़ जाएगी और आज़ादी की लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए उन्होंने अपने ही बेटे को दुनिया के सामने “लावारिस” बना दिया।
सोचिए… कैसा दिल होगा उस इंसान का? जिसने अपने खून को भी देश के लिए त्याग दिया… जिसने अपने ही जिगर के टुकड़े को पहचानने से इनकार कर दिया… ताकि देश की लड़ाई जिंदा रहे।
8 मई 1915… फांसी का दिन भी आ गया। जब उन्हें फांसी के फंदे की ओर ले जाया जा रहा था, तो उनके चेहरे पर डर नहीं… बल्कि एक अजीब सी शांति थी। जैसे उन्होंने सब कुछ पहले ही त्याग दिया हो।
उन्होंने फंदे को देखा… उसे चूमा… और अंतिम बार कहा— “मैंने अपना सब कुछ भारत माता को दे दिया… अब यह जीवन भी उसी का है।”
और फिर… एक और बलिदान इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। लेकिन समय के साथ हम उस नाम को भूलते चले गए… उस दर्द को भूलते चले गए… उस त्याग को भी, जिसने हमें आज़ादी की सांस दी।
आज सवाल सिर्फ इतना है— जिस बाप ने अपने बेटे के शव को छूने का अधिकार तक छोड़ दिया, ताकि हम आज खुले आसमान में सांस ले सकें… क्या हम उसका नाम भी याद रखते हैं?
अगर यह कहानी पढ़कर आपके दिल में भी हलचल हुई हो… तो इसे यूं ही मत जाने दीजिए। इस महान पिता को एक सलाम जरूर लिखिए, “वंदे मातरम्” जरूर कहिए, और इस कहानी को आगे बढ़ाइए… क्योंकि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं, याद रखने से मिलती है।
There are victories. And then there are moments that make an entire nation beam with pride.
P. V. Sindhu has done it again.
The Indian badminton star became the first Indian to win the Japan Open, defeating home favourite Akane Yamaguchi 21-17, 21-17 in a dominant final in Tokyo.
With this historic triumph, she also claimed her maiden BWF Super 750 title, adding yet another remarkable milestone to her legendary career.
Congratulations, P. V. Sindhu. Here's to breaking barriers, creating history, and inspiring generations to dream bigger. 💙🇮🇳
#PVSindhu #JapanOpen2026 #Badminton #TeamIndia
देश की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना ने तकनीक और इंजीनियरिंग के मोर्चे पर नया इतिहास रचने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत देश की पहली अंडरसी (समुद्र के नीचे) रेल सुरंग का निर्माण अहम पड़ाव पर पहुंच गया है. इस रूट पर ठाणे क्रीक (खाड़ी) के नीचे खुदाई करने के लिए विशालकाय टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने सफर शुरू कर दिया है. यह दूसरी मशीन है जिसे इस काम पर लगाया गया है. इस मशीन ने महाराष्ट्र के सांवली (घंसोली) से विक्रोली की तरफ खुदाई शुरू की है.
यह पूरी सुरंग 21 किमी लंबी होगी, जिसमें से 7 किमी का हिस्सा समुद्र के नीचे से होकर गुजरेगा. देश के किसी भी रेल कॉरिडोर के लिए यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है. आने वाले समय में इससे देश के बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदल जाएगी. इस काम को अंजाम देने के लिए जिस नई मशीन को तैनात किया गया है, वह देश के रेल सुरंग निर्माण के इतिहास में अब तक इस्तेमाल की गई सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन (TBM) में से एक है.
मशीन कटरहेड 13.6 मीटर चौड़ा
मशीन की ताकत और साइज का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसका कटरहेड 13.6 मीटर चौड़ा है. यह करीब चार मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है. मशीन का वजन 500 एशियाई हाथियों के सामूहिक वजन के बराबर करीब 3,200 टन है. इसकी लंबाई 96 मीटर है, जो एक फुटबॉल मैदान जितनी बड़ी है. यह मशीन मिक्सशील्ड की तरह ऑटोमेटिक और स्लरी-बेस्ड टेक्निक पर काम करती है. जमीन के अंदर यह मिट्टी को धंसने से रोकती है.
एक नजर में मशीन
मशीन का कटरहेड 13.6 मीटर चौड़ा है, यह 4 मंजिल इमारत जितना ऊंचा है
मशीन की लंबाई 96 मीटर है, यानी यह एक पूरे फुटबॉल मैदान जितनी लंबी है
इसका कुल वजन 500 हाथियों जितना यानी यह कुल 3,200 टन वजनी है
सेमी-ऑटोमेटिक 'मिक्सशील्ड' टेक्निक पर काम करने से समंदर के नीचे कभी नहीं धंसती
मशीन के अंदर गैसों का पता लगाने के लिए रीयल-टाइम मॉनीटरिंग सिस्टम
मशीन 'सेमी-कंटीन्यूअस एडवांस' (SCA) सिस्टम से लैस, काम दोगुना तेजी से होता है
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गुटखा बंदी: आज १४ वर्षे झाली.
मी FDA आयुक्त असतांना महाराष्ट्रात जी १९/७/२०१२ रोजी गुटखा, पान मसाला, सुगंधी सुपारी यावर चहुबाजूंनी प्रचंड विरोध असतांना जी बंदी घालण्यात आली व ती दरवर्षी आतापर्यंत वाढविण्यात आली,
त्यास आज १४ वर्षे झाली.
त्या बंदीवर स्थगिती आणण्यासाठी गुटखा उत्पादकांनी उच्च आणि सर्वोच्च न्यायालयातून ज्या २० याचिका दाखल केल्या त्या निष्फळ ठरवण्यासाठी जे प्रयत्न करावे लागले ती केवळ न्यायालयीन लढाई नव्हती, ते महायुद्ध होते.
न्यायालयीन स्थगिती नाही येऊ दिली.
बंदी आणणे अवघड असते पण ती अंमलात आणणे महाकठीण असते.
पण आहे तीच FDAयंत्रणा, पोलीस, महसूल, नगरपालिका इ च्या संयुक्त प्रयत्नांनी ती बंदी यशस्वी झाली.
गुटखा कारखाने बंद झाले, घाऊक आणि किरकोळ व्यापार थांबला, वाहतूक सुद्धा थांबली.
सुरवातीस जो गुटखा पकडला त्याचे १९ मोठे ट्रक्स एकाच वेळेस घेऊन मुंबईहून पोलिस बंदोबस्तात ताफा पुण्याकडे घेवून जाताना मी त्यासोबत स्वतः गेलो आणि तो हडपसरच्या इन्सिनरेशन केंद्रात पूर्णपणे जाळून होईपर्यंत थांबलो…
थांबलो यासाठी की एखादा ट्रक परस्पर पुन्हा बाजारात येवू नये.
इन्सिनरेशन केंद्र परिसरात गुटखा जळताना त्याचा घमघमाट आसमंतात पसरला होता.
मी आयुक्त असेपर्यंत ही बंदी काटेकोरपणे राबविली.
अर्थात त्याचा प्रसारमाध्यमात गाजावाजा करण्याची त्यावेळी प्रथा नव्हती.
बंदीच्या पहिल्या दोन वर्षात राज्यात बंदी आदेश न पाळणारा विरुद्ध १२०० FIRs दाखल केले,
१४०० जणांविरुद्ध न्यायालयात खटले दाखल केले,
कोट्यावधींचा गुटखा पकडून नष्ट केला आणि बंदी आदेश प्रखरतेने पण अत्यंत शांतपणे गाजावाजा न होता राबविले गेले.
दुर्दैवाने, माझ्या नंतर ती मोहीम पुढे चालू ठेवली गेली नाही कारण अवैध गुटखा हा भ्रष्टाचाराचे साधन बनविण्यात आले.
आता पुन्हा मोहीम सुरू झाली आहे असे प्रसारमाध्यमावरून समजते.
-महेश झगडे
A historic feat for Indian badminton!
Congratulations to PV Sindhu for emerging victorious in the Japan Open 2026. Her determination and exceptional skills were on full display throughout the tournament. The fact that she is the first Indian to win this title makes this achievement even more special. It will inspire countless young athletes across the country to play and shine.
@Pvsindhu1
Heartiest congratulations to @Pvsindhu1 on creating history by becoming the first Indian to win the #JapanOpen2026 women's singles title. 🏸🇮🇳
Your grit, determination and unwavering pursuit of excellence have once again made the nation proud.
May you continue to scale greater heights and inspire millions of young athletes across India.
Best wishes for many more glorious achievements ahead.
First Indian to score an ODI century at Lord's ✅
8️⃣th ODI century in England ✅
Rohit Sharma with a special knock at the Home of Cricket 💙
Updates ▶️ https://t.co/pLZ2PvDH5G
#TeamIndia | #ENGvIND | @ImRo45
मुंबई दादर स्टेशन पर इस देसी टोपी वाले भाई ने Blue Light Gang से पंगा ले ही लिया!
ट्रेन से दादर स्टेशन उतरते ही जब बाहर निकला। काली पीली इंडिगो टैक्सी वाले इसे तुरंत घेर लिया।
सर, कहाँ जाना है?…पूछा। भाई ने जगह बताई, बार्गेनिंग की और 250 रुपये में फाइनल कर दिया।
इसे दूसरी टैक्सी में बैठाया। अंदर बैठते ही साइड में ब्लू लाइट जल गई। फिर ड्राइवर के पास एक आदमी खड़ा हो गया।
उसने 200-200 के नोट निकाले और बोला, 1000 का दो 500 के नोट दो ना, भाई।
भाई ने 500 का नोट दिया। पर्स संभालते ही वो आदमी चिल्लाया...सर आपने तो सिर्फ 100 रुपये दिया!
भाई तुरंत शॉक हो गया। बोला कि 500 दिया है, क्या झूठ बोल रहा है?
लेकिन गैंग तैयार था। नोट बदलने का पूरा खेल था।
भाई ने डटकर लड़ाई की, बोला...मैंने गांव का पानी पिया है, तुम मुझे नहीं ठग सकते हो।
पुलिस बुलाऊंगा, मीडिया बुलाऊंगा!
गैंग वाले घबरा गए और आखिर में 500 रुपये वापस कर दिए।फिर पूरा गैंग इकट्ठा हो गया था।
बाद में एक बुजुर्ग आदमी ने बताया कि ये Blue Light Gang है।
दादर स्वामीनारायण मंदिर के सामने ये रोज स्कैम करते हैं।
इनके 200 से ज्यादा लोग हैं। तीन बड़े आका हैं। पहले कुछ नहीं था, अब करोड़ों के फ्लैट बना लिए हैं।
भाई सबको अवेयर कर रहे हैं कि दादर या बांद्रा टर्मिनस पर इन ब्लैक-येलो टैक्सी में कभी मत बैठना।
मुंबई जाने वाला हर आदमी को ये बात जाननी चाहिए।