World has noticed it…
एक FIR के लिए भारत की लोकसभा के नेता विपक्ष को घंटों मशक़्क़त करनी पड़ी… और देखिए किस तरह से विक्टिम साहिल और उनके मेडिकल सबूतों के साथ आना पड़ा!
युवाओं, तुम्हारे हाथ का ये मोबाइल यूँ ही नहीं आया…
आज राजीव गांधी का जन्मदिन है।
और आज की पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि जिस डिजिटल भारत पर हम गर्व करते हैं, उसकी कहानी 2014 से शुरू नहीं हुई थी।
सिर्फ 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करना चाहते थे।
सैम पित्रोदा जैसे वैज्ञानिकों के साथ मिलकर उन्होंने देश में कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति को गति दी।
C-DOT, STD-PCO और रेलवे की कंप्यूटरीकृत टिकटिंग जैसी पहलें उसी दौर के बदलावों का हिस्सा थीं।
आज भारत का IT सेक्टर दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।
लेकिन याद रखिए—
किसी भी क्रांति का जन्म एक दिन में नहीं होता, उसकी नींव वर्षों पहले रखी जाती है।
राजीव गांधी की सोच तकनीक तक सीमित नहीं थी।
उनकी सरकार ने मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की।
यानी युवाओं को सिर्फ यह नहीं कहा कि वे देश का भविष्य हैं, बल्कि उन्हें लोकतंत्र में भागीदार बनाया।
जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुआत के जरिए गांव-कस्बों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देने की पहल हुई।
तो जब कोई पूछे—
राजीव गांधी ने देश को क्या दिया?
कहना—
कंप्यूटर की राह दी।
दूरसंचार की नींव मजबूत की।
युवाओं को वोट का अधिकार दिया।
शिक्षा के नए अवसर दिए।
और भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करने का सपना दिया।
और अगर राजीव गांधी को याद करने पर कोई आपको “कांग्रेसी” या “चमचा” कहे…
तो मुस्कुरा देना।
क्योंकि गाली देने से इतिहास नहीं बदलता।
राजीव गांधी आज भी जिंदा हैं—
हर उस मोबाइल में,
हर उस कंप्यूटर में,
हर उस युवा के सपने में,
जो भारत को आगे ले जाना चाहता है।
राजीव गांधी को जन्मदिन पर सादर नमन।
#RajivGandhi #घोरकलजुग #डाटावाणी
गजब का प्रवक्ता है भाई कांग्रेस का। इसको कहते हैं धज्जियां उड़ाना। यश श्रीवास्तव को इतिहास, भूगोल, राजनीति सबकी बारीक समझ है।
डिबेट में बैठी शाज़िया और एंकर का बस चले तो डिबेट शो छोड़कर भाग खड़े हों या वही धरती से गुहार लगाएं कि फट जाओ और मुझे समेट लो। चेहरा देखिए इनका और यह भी देखिए कि बीजेपी की कैसे रेल बनाई जाती है। बधाई यश।
कल BJP ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कांग्रेस को लगता है स्वतंत्रता संग्राम पर उनकी monopoly है
बिल्कुल है - आज़ादी की जंग कांग्रेस ने लड़ी, आप तो मुखबिरी करते थे
शहादत और बलिदान हमने दिया, जेल में जवानी काँग्रेस नेताओं ने काटी, आप तो अंग्रेज़ों की पेंशन पर मौज कर रहे थे
जावेद अख़्तर अपनी एक नई नज़्म सुना रहे हैं। वह इसे चिन्मयी त्रिपाठी को सुना रहे हैं, जो मुश्किल से मुश्किल कविताओं और नज़्मों को अपनी धुनों में ढालने के लिए जानी जाती हैं।
14 वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आ चुके थे। यूपीए बड़ी ताकत बनकर उभरा था। यह लगभग तय माना जा रहा था कि सोनिया गांधी देश की प्रधानमन्त्री बनेंगी। हम सब भी यही चाह रहे थे क्योंकि पवार ,सुषमा स्वराज, तारिक अनवर के विदेशी मूल के बयानों से हम सब चिढ़े हुए थे। केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि यूपीए में शामिल सभी घटक दल इस बात पर अड़ गए कि जैसे भी हो उन्हें यह पद स्वीकारना होगा। लालू प्रसाद यादव ने ऐलान किया कि अगर सोनिया जी पीएम नहीं बनेंगी तो मैं उनके घर से नहीं हटूंगा भले पुलिस से मुझे फिकवा दिया जाए।
15 मई को सोनिया गान्धी को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया था लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से 17 मई को भी सोनिया गांधी के निवास पर संसदीय दल की बैठक बुलाई गई थी मंच सजा हुआ था। एक कोने में बैठी प्रियंका गांधी अपनी माँ के दिए जाने वाले भाषण का हिंदी अनुवाद कर रही थी। उन्होंने कुछ गिने चुने लोगों को बताया कि माँ ने तय कर लिया है वो प्रधानमन्त्री का पद स्वीकार नहीं करेंगी! सभी अवाक हो गए।
इसकी सूचना अभी सांसदों को नहीं थी। इसकी सूचना जिन वरिष्ठ नेताओं को मिली दौड़े दौड़े दस जनपथ पहुंचे, थोड़ी देर में गठबंधन दलों के सारे नेता वहां आ गए। सोनिया जी ने कहा कि मैं अपने फैसले पर अडिग हूँ लेकिन नेताओं ने कहा कि आपको पुनर्विचार करना चाहिए।
लेकिन सोनिया तो सोनिया ठहरी अगले दिन सेन्ट्रल हाल में संसदीय दल की बैठक में उन्होंने अपना भाषण दिया। देश भर ने टेलीविजन पर उन्हें बोलते सुना लोगों के गले रुंधे हुए थे और लोगों के भी भाषण हुए सबने कहा पद स्वीकार करिए मगर यह तय हो गया कि वो पीएम पद ग्रहण नहीं करेंगी।हम दिल्ली से हजार किमी दूर टीवी के सामने अंगुलियां क्रॉस करके बैठे थे।
उस दिन पुनर्विचार के साथ साथ उन्हें फैसला करने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी लाया गया था लेकिन सभी जानते थे कि पुनर्विचार का प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा। उधर दस जनपथ के बाहर 10 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ जमा थी।
भूख हड़ताल, धरना प्रदर्शन आत्महत्या की धमकी सब दी गई। मगर सोनिया कहाँ मानने वाली थी। 19 मई की बैठक में सुरेश पचौरी ने बताया कि लोग धीमे धीमे आपकी बात मानने को तैयार हो गए हैं। मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा कि यह आपकी कुर्सी है जिस पर आप मुझे बैठा रही हैं मैं तो धन्यवाद करने का भी साहस नहीं कर सकता।
मेरी माँ ने उस रोज कहा हिन्दुस्तानी स्त्रियाँ ऐसे ही बेमतलब के त्याग करती रहती हैं। आज जब मोदी और सोनिया की तुलना करता हूँ तो पाता हूँ एक वो है जिसने तीन बार पीएम के पद को ठोकर मार दी। एक वो है जो तीन बार पीएम बना जिसके लिए पीएम पद सब कुछ है, लेकिन उसके पास न तो संवेदना है न त्याग।
सोनिया जी की जीवनी आ रही है। हम आज भी जानना चाहते हैं कि उस वक्त सोनिया जी ने पीएम मद के लिए मना क्यों किया था?
मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि “दिल्ली पुलिस की तारीफ करनी चाहिए।”
संसद से आधा किलोमीटर दूर, शांतिपूर्ण छात्रों पर पैलेट गन चली, कील लगी लाठियाँ चलीं, एक बच्चे की आँख चली गई, एक बच्ची का कान कट गया। इस बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?
मैं ख़ुद उन घायल बच्चों से मिला हूँ। हज़ारों वीडियो देश ने देखे हैं।
इस सरकार का मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा है। पहले बच्चों पर लाठी चलाओ, फिर बोल दो कि कुछ हुआ ही नहीं।
पूरे सत्र “लापता” अमित शाह विपक्ष से भागते रहे। और प्रधानमंत्री ने आज तक छात्रों से माफ़ी नहीं माँगी।
सच्चाई यह है कि इस देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा यही दिमाग से खाली लोग हैं - जिन्हें न अपनी ग़लती दिखती है, और दिखने पर मानते नहीं।
देश के बच्चों से झूठ मत बोलिए। उनके पास आँखें हैं और याददाश्त भी।
"मैं सुहागन यहीं बनी, माँ यहीं बनी, विधवा यहीं आपके सामने बनी..
देश की सबसे महान पुत्री इंदिरा जी ने अपनी सांस मेरी बांहों में तोड़ी..
मेरे खून का एक-एक कतरा कहता है, यह मेरा वतन है।"
- श्रीमती सोनिया गांधी जी (मई, 1999)
अमित शाह जी आज सदन में आये साथ में महामानव भी थे।
मगर ये क्या...
वंदे मातरम् गीत खत्म होते ही ओम बिड़ला जी ने सदन स्थगित कर दी। और इस तरह पुलिसिया बर्बरता और चंदा चोरी पर जवाब दिये बिना दोनों सदन से भाग निकले?
इतनी कायरता क्यों?
56 इंच का....
मैं इस बात को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता।
मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मैं दलित हूँ, मेरी रक्षा करो और न ही किसी के सामने गिड़गिड़ाया। मुझ में लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूँ।
लेकिन हल्द्वानी में स्टेज का शुद्धिकरण कर मुझे Untouchability का एहसास कराया गया और मेरा अपमान किया गया।
मेरी माँग है —
हल्द्वानी में जिन लोगों ने स्टेज का शुद्धिकरण किया, उन पर Untouchability Act के तहत केस दर्ज हो और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएँ।
𝗚𝗲𝗻-𝗔𝗹𝗽𝗵𝗮
“अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते?”
स्कूल की टूटी पट्टियाँ, जर्जर भवन और हर पल हादसे का खतरा क्या किसी बच्चे की जान जाने का इंतज़ार किया जा रहा है ?
📍राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, थानागाजी, जोधावास, अलवर।
राजीव गांधी की हत्या के समय राहुल गांधी अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन में पढ़ाई कर रहे थे.. भारत लौटते समय फ्लाइट में अमिताभ बच्चन उनके साथ मौजूद थे.. दिल्ली एअरपोर्ट पर राहुल गांधी को रिसीव करने प्रियंका गांधी पहुंची थीं.!
राहुल गांधी के 10 जनपथ पर पहुंचते ही सबसे पहले उन्हें जया बच्चन ने गले लगाया और ढांढ़स बधायां.!
बच्चन परिवार और गांधी परिवार के रिश्तों की गहराई आप इस बात से समझ सकते हैं कि...राजीव गांधी की शादी से पहले इंदिरा गांधी ने सोनिया गांधी को 50 दिनों तक बच्चन परिवार के घर ही रखा था..!
सोनियां गांधी पर दुखों का पहाड़ टूटा था लेकिन वो नहीं टूटी...भारतीय संस्कृति के अनुसार खुद को ढाला और तमाम मुश्कियों के बाद कांग्रेस पार्टी को फिर से खड़ा किया..!
अस्पताल में बेड हो ना हो
लेकिन
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का बोर्ड चमकते रहना चाहिए
Welcome to “Governance by marketing”
👏👏👏well done young lady
ज्ञानेश कुमार की मतदाता सूची को पवित्र बनाने का जो प्रोजेक्ट है, उसका एक नमूना देखिए।
अभिनेता प्रकाश राज, जिस जगह पैदा हुए, जहाँ पढ़े-लिखे, जहाँ से चुनाव लड़े और जहाँ सारी उम्र रहे, वहाँ की वोटर लिस्ट से उनका नाम काट दिया गया है।
हर SIR सूची के बाद जब इस तरह की घटनाएँ सामने आती हैं, और उन्हें देखने सुनने के बावजूद कोई ये मानता है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो रहे हैं, तो उनके बारे में अब क्या ही कहा जाए।
मैडम चित्रा त्रिपाठी जी को मेरा यह संदेश है—
हम लोग खाली नहीं बैठे हैं कि डिबेट में आकर आपका अहंकार, आपका रवैया, आपका ईगो और आपका मेकअप देखें।
अपनी डिबेट में तो आप भाजपा और एनडीए के अलावा किसी को बोलने ही नहीं दे रही हैं। फिर हम लोग क्यों आएँ, भाई?
हिम्मत है तो जवाब भी सुनिए। नहीं है तो डिबेट के नाम पर अपना एजेंडा चलाइए। उसके लिए आपको विपक्ष की ज़रूरत ही नहीं है।
देश के इतिहास में मप्र के कॉलेज ने रिकॉर्ड तोड़ दिया।
उज्जैन की यूनिवर्सिटी के रिजल्ट एक छात्र को कुल 1600 में से 1604 अंक मिले हैं।
100.25% रिजल्ट आया है छात्र का।
राहुल गांधी सही बोलते हैं इस देश का एजुकेशन सिस्टम बुरी तरह से सड़ चुका है।