आज अख़बार में छपी खबर के पीछे की कहानी।
मध्य प्रदेश के एक बड़े उद्योगपति एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ स्कूल में पढ़ते थे, बचपन की दोस्ती थी।
कहा जाता है कि शुरुआती दिनों में उस उद्योगपति ने नेता जी की आर्थिक सहायता की थी। यहाँ तक कि वर्ष 1991 में उनकी शादी कराने में भी उस उद्योगपति की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
बाद में जब नेता जी मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अपने उद्योगपति मित्र का कर्ज उतारने के लिए प्रदेश के कई टेंडर, हाईवे और फ्लाईओवर जैसे बड़े काम उनकी कंपनी को दिलवाए।
फिर प्रदेश में नए मुख्यमंत्री आए। उद्योगपति को टेंडर मिलने कम हो गए।
वर्ष 2025 में उस उद्योगपति के यहाँ आयकर विभाग की रेड पड़ी। कहा जाता है कि इस रेड के पीछे नए मुख्यमंत्री का हाथ था।
बस फिर क्या था, आज उस पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पुराने कर्ज का बदला चुकाने के लिए इंडियन एक्सप्रेस में नए मुख्यमंत्री की पूरी कहानी सामने रख दी।
जादू देखिए 👇
मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद उनके परिवार ने उज्जैन में धड़ाधड़ जमीनें खरीद लीं.
खास बात है कि ये जमीनें सरकारी प्रोजेक्ट के आस पास थीं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है- मोहन यादव की पत्नी, बहू, भाई, उनके लड़के और तमाम रिश्तेदारों ने जमीन खरीदी.
खबरदार- अगर किसी ने भ्रष्टाचार कहा, ये तो जादू है.
सबको भ्रष्ट कहने वाली भाजपा ने लगता है सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
ऊपर से नीचे तक सब इहलोक बनाने में लगे हैं और जनता को हिंदू-मुस्लिम की अफ़ीम चटा कर मस्त कर दिया गया है।
CM is Christian, Tamilnadu Govt has Congress in alliance and the order is passed that Temple funds will be used for religious purpose only.
UP has double engine govt of BJP and Temple funds have got looted and that too of Ram Temple.
Being religious and Dhongi are different!
आ गये RSS वाले अपने असली रूप में. यही लिखा था यहां कि इनकी परेशानी यही है कि एक दलित समाज से आने वाला मंत्री उनसे कह रहा कि काग़ज़ दिखाओं.
जो परेशानी RSS की है वही तमाम जातिवादी हिंदुओं की भी है. इस मनुवादी संगठन के बचाव में कौन कौन उतरता है देखते जाइये. मुझे तो नहीं होगा लेकिन बहुतों को ज़रूर बहुत आश्चर्य होगा.
रामचंद्र गुहा जैसों के लिये काम बढ़ गया है.
भारत सरकार को बताना चाहिए कि जो भारत सरकार ख़ुद देश में विदेशी निवेश के लिए दुनिया के देशों की तरफ़ देखती रहती है आख़िर वो किस तरह से और कितना निवेश अमेरिका में करने जा रही है? आख़िर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी के सामने पर बोला है तो इस पर एक श्वेत पत्र तो जारी होना ही चाहिए।
नई दिल्ली में हुई AI समिट की अव्यवस्था का मज़ाक़ उड़ रहा है !
एंकर ने एंथ्रोपिक के CEO अमोदेई से सवाल पूछा : आपने इंडिया AI समिट में ओपन AI के CEO सैम ऑल्टमैन का हाथ पकड़ने से मना कर दिया। क्या हुआ?
एंथ्रोपिक के CEO अमोदेई ने हंसते हुए कहा : समिट बहुत अव्यवस्थित था। हम आख़िरी मिनट में स्टेज पर आए। उन्होंने हमारी जगह बदल दी। फिर मोदी ने हम सभी को हाथ पकड़ने को कहा…
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
असम में वायुसेना की विमान दुर्घटना में हमारे पाँच वीर जवानों के शहीद होने का समाचार अत्यंत दुःखद है।
इस दुख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शहीदों के शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। देश इन बहादुर जवानों का सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखेगा।
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
कभी-कभी कांग्रेस को राहुल गांधी की मर्जी के खिलाफ भी काम करना पड़ता है।
राहुल के हर स्टेशन पर छात्रों युवाओं से बात करते हुए कोटा जाने के प्लान को लेकर दिल्ली और राजस्थान दोनों जगह के कांग्रेस नेता शुरू से ही कंफर्टेबल नहीं थे।
राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उदाहरण दिया कि अभी भोपाल में जब विधायकों को लेकर हवाई जहाज को बेंगलुरु जाना था तो उसे एयरपोर्ट पर ही कई घंटे तक रोक के रखा गया।
अगर यह 2 घंटे भी ट्रेन लेट करवा देंंगे तो छात्रों का सारा प्रोग्राम चौपट हो जाएगा।
इससे पहले राहुल उदयपुर कांग्रेस की चिंतन शिविर में ट्रेन से ही हर स्टेशन पर लोगों से बात करते हुए गए थे। राहुल की ट्रेन में होने की खबर पाकर हर स्टेशन पर भारी भीड़ हो जाती है। उसमें सुरक्षा का सवाल तो है ही मगर साथ में जैसा की डोटासरा ने कहा कि इन लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता यह लोग ट्रेन भी लेट करवा सकते हैं।
कांग्रेस के राज्य में यह सब कभी नहीं हुआ करता था। विपक्षी पार्टियों के कार्यक्रमों के लिए स्पेशल बोगी भी लगती थी साथ जाने वाले पत्रकारों के लिए भी।
मगर अब कांग्रेस के कार्यक्रम कवर करने जाने वाले पत्रकारों के लिए स्पेशल बोगी नहीं मिलती है।
उदयपुर भी यहां से पत्रकारों को दिल्ली से बाय रोड ही जाना पड़ा था।
और कोटा के लिए भी वे सुबह सवा पांच बजे यहां से बस से निकलेंगे। 500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर है।
कोटा में राहुल का प्रोग्राम असफल करने के लिए सारे हरबे इस्तेमाल किया जा रहे हैं।
कोचिंग सेंटर के मालिकों से कहा जा रहा है कि अपने स्टूडेंट को रोकें। पीजी हॉस्टल वालों को भी।
वहां लगाए गए राहुल के पोस्टर बैनर हटाए जा रहे हैं।
राहुल का छात्र सम्मेलन का कोटा में पहला प्रोग्राम है। उसके बाद प्रयागराज पटना और दिल्ली है।
कोटा प्रोग्राम असफल करने की कोशिशों ने बाद के प्रोग्राम को भी जबरदस्त प्रचार दे दिया।
राहुल के ट्रेन से न जाने और जहाज से जाने का एक नुकसान उन पत्रकारों को भी हुआ जिन्होंने इस ट्रेन से अपने टिकट बुक करवा रखे थे।
यह नुकसान प्रोफेशनली है। क्योंकि संभावना थी कि रास्ते में राहुल से बात हो सकती थी।
दिल्ली: एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे (@PriyankKharge) ने कहा, "मोहन भागवत ने कहा, 'क्या हम कुछ छिपकर कर रहे हैं? हम संघ के नाम पर खुलेआम कर रहे हैं।' मैं भी यही पूछ रहा हूँ। अगर यह संघ के नाम पर हो रहा है, तो असल में संघ क्या है? इसके पीछे कौन लोग हैं? आपका पैसा कहाँ से आता है? मैं भी यही पूछ रहा हूँ। वह भी यही कह रहे हैं और हम भी यही कह रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मेरा उनसे (@RSSorg) पुराना नाता है। मैं अभी एक हफ़्ते पहले ही (कर्नाटक का) गृह मंत्री बना हूँ। पहले मैं अनौपचारिक रूप से पूछ रहा था; अब मैं आधिकारिक तौर पर पूछ रहा हूँ। मोहन भागवत ने इस पत्र का जवाब नहीं दिया है। उनका जवाब 13 जून को त्रिशूर में आया था, और ज़ाहिर है, मेरे पत्र की तारीख भी 13 जून ही थी। हालाँकि, इसे कल, यानी 15 जून को जारी और भेजा गया था।"
उन्होंने आगे कहा, "भारत में गृह मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री को ऐसी सुरक्षा दी जाती है। मोहन भागवत जी को सुरक्षा कौन देता है? और यह किसके पैसे से दी जाती है? टैक्स देने वालों के पैसे से, है ना?... खतरे का आकलन मैं नहीं करता; यह केंद्र सरकार करती है। अगर उन्हें लगता है कि सुरक्षा जारी रहनी चाहिए, तो रहने दें। लेकिन मैं यह पूछ रहा हूँ कि खतरे का स्तर असल में क्या है?"
RSS की स्थापना 27/9/1925 को हुई
हिंदू धर्म 4000 साल पुराना है
RSS का कहना है कि वह हिंदू धर्म का प्रचार करता है
लेकिन वह BJP के लिए काम करता है
BJP की राजनीति हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है
RSS अब एक राजनीतिक संगठन है
RSS का कहना है कि हिंदू धर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता
RSS = हिंदू धर्म नहीं है
@INCIndia
मेजर जनरल जी डी बख्शी होना आसान नहीं है। कभी मोदी के प्रबल समर्थक रहे बख्शी हमेशा से जानते रहे हैं कि देश सबसे पहले। अब उन्हें समझ में आया है कि देश मतलब बीजेपी नहीं है, मोदी नहीं है। यह लोग देश के सम्मान को चोटिल कर रहे।
जब मेजर जनरल बोलते हैं कि भाड़ में जाए तो कुछ ऐसे बोलते हैं कि अब नहीं तो फिर कभी नहीं। इसे सरकार को पूर्व सैन्य अफसर के अल्टीमेटम की तरह लेना चाहिए।
ये बिहार का पटना स्टेशन है 👇
जहां छात्रों का हुजूम किसी तरह ट्रेन पकड़ना चाहता है, ताकि एग्जाम सेंटर तक पहुंचा जाए।
वोट लेने के समय BJP सरकार युवाओं को ट्रेन से घर भेजती है, लेकिन काम निकलने के बाद युवाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
यही BJP का चाल, चरित्र, चेहरा है।
इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं चाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
अमेरिका ईरान के बीच समझौते का स्वागत है।
मगर अफसोस यह कि इसके पीछे पाकिस्तान है।
हम उससे बहुत बड़ी ताकत हैं।
मगर चार महीने से हम कहां थे?
कांग्रेस की मीडिया डिपार्टमेंट की चेयरपर्सन @SupriyaShrinate ने कठोर शब्द उपयोग करते हुए कहा कि इस बीच प्रधानमंत्री मोदी किस गुफा में छुपे हुए थे?
अमेरिकी दूतावास से सामने से सुरक्षा बैरियर हटाना देवयानी के मामले में अमेरिकी को ‘लाल आँख’ दिखाने का ही एक और चरण था।
ख़ैर ये तो मनमोहन सिंह सरकार के ज़माने की बात थी।
आज कोई विरोध स्वरूप एक तिनका भी हटा के दिखा दे!
गरीब घर के 3 लोग मर गए.. मर गए तो मर गए.
कोई टॉप लीडर या ब्यूरोक्रेट का बेटा थोड़े ना मरा है. क्या फर्क पड़ता है? इंडिया चुपचाप सह लेगा.
1-2 दिन दीजिए.. ट्रंप से गले मिलना शुरू हो जाएगा.
- जी.डी. बख्शी