बांग्लादेश में हिंदू महंत चिन्मयदास जिनको पिछले से पिछले साल बांग्लादेशी सरकार ने सिर्फ इसलिए जेल भेज दिया था क्योंकि वह हिंदू थे और पूजा पाठ करते थे |
आज उनकी मां का देहांत हो जाने पर बांग्लादेशी जेल से मात्र पांच घंटे की पेरोल मिली है मां का अंतिम संस्कार करने के लिए | 😡😡
जिस बांग्लादेश के घुसपैठिये हमारे देश में घुस कर सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं उस इस्लामिक बांग्लादेश में हिंदू संत को अपनी मां का अंतिम संस्कार करने के लिए एक दिन की पेरोल तक नसीब नहीं | 😡😡
लेकिन इस्लामिक देशों की हिंदू महंतों के प्रति इस जाहिलता पर ना तो इंटरनेशनल कोर्ट संज्ञान लेगा ना मानवाधिकार आयोग ना ही फिलिस्तीन के लिए आंसू बहाने वाला भारत का विपक्ष और बॉलीवुड |
Niva Bupa हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने इस बंदे को 19 पेज का डेफामेशन नोटिस भेजा है,
जिसमें 5 करोड़ रुपए की मानहानि का दावा ठोका गया है,
साथ ही वीडियो डिलीट करने और पब्लिक माफी की डिमांड भी की गई है,
वजह सिर्फ इतनी है कि उसने कोर्ट का एक ऑर्डर पढ़ कर लोगों तक अपने लेंग्वेज में पहुंचाया था।
उस ऑर्डर में जज ने खुद लिखा था कि यह कंपनी कस्टमर्स को लालच देकर फंसाती है,
झूठे आधार पर क्लेम रिजेक्ट करती है और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस करती है,
यहां तक कि कोर्ट ने कंपनी को स्ट्रिक्ट वार्निंग तक दी थी। इसने अपने तरीके से बोला था।
अब कंपनी कह रही है कि वीडियो में उनकी इज्जत उतारी गई,
बंदे का कहना है कि हकीकत यह है कि पूरी वीडियो में एक बार भी सीधे यह नहीं कहा गया कि Niva Bupa फ्रॉड कंपनी है।
यह मुद्दा मेरे लिए भी नया नहीं है, मैं खुद दो तीन ऐसे लोगों की आवाज उठा चुका हूं जिनका इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हुआ था।
बंदे के पास भी हजारों लोगों के मैसेज पड़े हैं जो बता रहे हैं कि कैसे अपने सबसे मुश्किल वक्त में इसी तरह की इंश्योरेंस कंपनियों ने उनका क्लेम फाल्स आधार पर रिजेक्ट कर दिया।
अगर आज इस धमकी से डर के वीडियो डिलीट हो गई तो कल कोई भी हिम्मत नहीं करेगा किसी बड़ी कंपनी के खिलाफ बोलने की।
This is the sad reality of bureaucracy across the states and across the governments
This is the case of UP, recently there was a case of Karnataka, I know a case in Haryana and I know many cases in Rajasthan
When soldiers die, we all put reels everywhere, salute their martyrdom but the truth hits hard as soon as the family reaches the govt offices for their dues. The govt babus think they are paying them everything free of cost, there is no empathy at all except in some cases where you find someone from the forces background either the person or someone from family
Request @myogiadityanath to address this specific issue 🙏🏻 and request the @PMOIndia to look into it and sensitise the govt offices for having some empathy for the soldiers
@KSBSectt
इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि हॉस्पिटल के उपर सख्त कार्रवाई हो सके
मां बाप से पैसे लिए इलाज किया फिर गंभीर बच्चे को अस्पताल से बाहर कर दिया माता-पिता बच्चे को लेकर बाहर बैठे है क्या यही सिस्टम है भारत देश का 😡
सभी साथी सपोर्ट करिए ये सामाजिक मुद्दा है करवाई होनी चाहिए
यानी यह लगभग आधा करोड़ रुपए का इलाज कर चुके उस मृत व्यक्ति का... कौन सी संजीवनी खर्च कर रहे थे उस व्यक्ति पर जो वह बच भी नहीं सका और उसके ऊपर 41 लाख का इलाज का खर्चा भी आ गया??
सभी अस्पताल कॉरपोरेट कल्चर में बदल चुके हैं और आम जनता को लूट रहे हैं जबकि सरकार आंखें मूंद बैठी हुई है।
@JatinTweets_ Are chomu train kiska tha angrezo ka, kis purpose se start Kiya tha train service ye phle dekh ja kr.
Sara kuchh loot kr le gye , jisko mrji usko top pr bandh kr uda dete the aur ess chomu ko ticket ka tension hai.
जर्नलिस्ट राजीव रंजन ने बताया कि पहले हेल्थ इंश्योरेंस पर 18% GST लगता था अब वो 0% हो गया है,
फिर भी उनका प्रीमियम 58,000 रुपया से बढ़कर 62,000 रुपया से ऊपर हो गया।
यानी GST हटने के बाद भी पैसा 18% GST वाले दौर से ज्यादा लग रहा है।
वजह यह कि कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलना बंद हो गया तो उन्होंने रेट खुद बढ़ा दिए।
उन्होंने यह भी बताया कि एक रिश्तेदार का इलाज बिना इंश्योरेंस कार्ड के 42,000 रुपया का था
लेकिन कार्ड दिखाते ही बिल 77,000 रुपया का बन गया।
कुल बात यही कि हेल्थ सेक्टर पर कोई असरदार निगरानी नहीं है
और
टैक्स राहत का फायदा आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा है।
निर्मला बहन! अगर आपने यूपीआई को चार्जेबल बना ही दिया है तो फिर अंतत वह पैसा कस्टमर से ही आना है. कृपया जनता को मूर्ख बनाना छोड़ दें. सीधे-सीधे कह दो कि अब यूपीआई का पैसा लिया जाएगा।
देशभक्त जनता तुम्हारा यह वार भी सह लेगी।
आज जब डाबर के कई उत्पाद पर, मधु समेत, '100% प्योर' लिखने के कारण प्रतिबंध लगा है क्योंकि यह उसकी गुणवत्ता नहीं, ब्रांडिंग के शब्द हैं, तो मुझे @MukeshPathakji के साथ किया साक्षात्कार याद आ जाता है। यदि कोई आपको कहे कि वह शुद्ध मधु बेच रहा है, और उसके पास मधुमक्खियों का बक्सा तक ना हो, वह केवल झूठ बेच रहा है।
https://t.co/CWjt9Cn4GU
JSSC CGL एग्जाम को लेकर प्रदर्शनकारी और अभ्यर्थी नए सवाल उठा रहे हैं. उनका दावा है कि कुछ सवालों की समानता कथित पेपर लीक की आशंका को और मजबूत करती है, इसलिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
आख़िर ये सवाल कहां से उठाए गए? प्रदर्शनकारी किन तथ्यों के आधार पर पेपर लीक का आरोप लगा रहे हैं? देखिए रांची से हमारी ये स्पेशल रिपोर्ट.
Full Report: https://t.co/s9cZ0SUeml
@vikasvermaindia@hemraj____
Just spoke to someone who is taking his insurer to court over unending price hikes in health insurance,
He bought 50 L floater health insurance for parents for Rs. 60K in 2011.
In 2026, the premium shot up to an absurd 5 Lakhs (Father: 71, Mother: 70)
That jump came through back to back hikes of 54% and 12% (net of zero GST) in two consecutive years.
He can still afford it. That's not the point.
He wants the court to answer HOW FAR THESE HIKES CAN GO?
Told him he is doing public service for lakhs of senior citizens in India affected by this.
Hope this leads to something meaningful!
Reality Check 🤐
A men tested 1 batch of Everest Garam Masala in lab costing ₹28,000.
After testing, the results that came will shock you:
Azoxystrobin (Pesticide used in Masala):
Limit~ 0.1 mg/kg
Actual~ 0.200 mg/kg
Difference~ 2x
Means according to FSSAI standards limits it failed in tests.
Just imagine more than 1 crore Everest spice packets are sold every day in India.
But from Everest Side :
• No Clarification
• No Explanation
• No Accountability
This is the condition of the biggest spices brand of India 🤡
क्या माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM
जी क्या आपके पास इसका जवाब है?आप देखिए आपकी जांच एजेंसियो ने किस तरह JSSC CGL के पूरे मामले को एक षड्यंत्र के तहत दबाया था। लाखों युवाओं की उम्मीदों का गला घोटा था आपने महोदय🤬🤬 हम ये भी याद रखेंगे कि किस तरह से एक मुख्यमंत्री ने केस का फैसला आने से पहले एक मंच से नियुक्ति पत्र बांटने का दावा पहले ही और पूरे विश्वास के साथ कर दिया गया था।।।देखिए किस तरह से आपको गलत जानकारी दी गई थी जबकि सच्चाई ये थी कि JSSC CGL का पेपर लीक बड़े पैमाने पर लीक हो चुका था तभी आपने स्पेशल ब्रांच के रिपोर्ट पर नेट बंदी की थी ताकि पेपर लीक का सच बाहर ना आ सके।।महोदय आपने झारखण्ड के युवाओं के साथ घोर अपराध किया है और ये बात झारखण्ड के युवा कभी नहीं भूलेंगे।। झारखण्ड के युवा और मैं ये भी नहीं भूलूंगा कि किस तरह से सच्चाई की आवाज़ को उठाने के लिए कैंसर से ग्रस्त एक व्यक्ति के खिलाफ तथ्यों को छुपाकर कोर्ट से वारंट लिया जाता है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पूरी ताकत लगा दी गई थी।।अगर आप वाकई में छात्रों के साथ न्याय करना चाहते है तो JSSC CGL की पूरी परीक्षा को रद्द कर तत्काल CBI इंक्वायरी दी जाए
@khurpenchh@aajtak
https://t.co/vVZKNEXZ16