सीजेपी प्रोटेस्ट में रील बनाने के बाद ट्रोल हो रहीं कंटेंट क्रिएटर श्रद्धा सिंह डरी हुई हैं. सोशल मीडिया पर उनको गालियां दी जा रही हैं, धमकियां दी जा रही हैं.
देखिए बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के साथ श्रद्धा की बातचीत.
शूट- मोहम्मद महरोज़, मीर मुसव्विर शाबिर
एडिट - मोहम्मद महरोज़
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में यूपी पुलिस की पेट्रोल गाड़ी को कांवड़ियों को खुश करने के लिए इस तरह तैयार किया गया है!
साथ ही साथ इलेक्शन की भी तैयारी हो जायेगी!
जब तक साहेब को खबर थी कि बिटिया 25 साल की है, तब तक ट्रोल, गुंडे, पुलिस और FIR भी करवा दी।
जब पता लगा 15 साल की नाबालिग है, कानूनन कुछ संभव नही तो माफ कर दिया।
गजब ही आत्ममुग्ध आदमी है।
थैंक गॉड, माफ़ कर दिया!
हिटलर ने यहूदियों को माफ़ कर दिया.
इज़राइल ने फ़िलिस्तीनियों को माफ़ कर दिया.
यूरोप ने अफ्रीका और एशिया को माफ़ कर दिया.
म्यांमार ने रोहिंग्याओं को माफ़ कर दिया.
यज़ीद ने हुसैनियों को माफ़ कर दिया.
सभी माफ़ करने वालों का आभार. माफ़ करने वालों की लिस्ट इतनी बड़ी है, कि आभार व्यक्त करते-करते हमारा जीवन बीत जाएगा.
Shame on BJP. अव्वल दर्जे के झूठे और गाली बाज प्रवक्ता हैं पार्टी मे. मोदी जी ने कहा था झूठ बोल बार बार बोलो. लगातार बोलो. Shameful. That's how you take on the bullies and liars on. @AshutoshRanka
हर बार जब भी किसी स्कूल में जाता हु तो उम्मीद होती है अब टूटी छत नहीं देखूंगा, न लीक किया बाथरुम, बिना चप्पल पहना बच्चा
पर हर बार उम्मीद टूट जाती है। रोज़ 13 स्कूल बंद हो रही है 👇
Gen Z आंदोलन से महामानव की भद्द पूरी दुनिया में पिटी और अब उसकी भरपाई करने के लिए आम जनता की जेब काटी जाएगी!
इन सब नाच-गाने में कितना खर्च हुआ होगा, इसका कोई अंदाज़ा है?
महामानव का हर इवेंट grand होगा, लेकिन मासूम बच्चों पर चलाई गई AK-47 का दाग नहीं मिटेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समाज द्वारा मवेशियों के प्रति किए जाने वाले व्यवहार में मौजूद विरोधाभास पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जहां लोग अक्सर जानवरों की आर्थिक उपयोगिता कम हो जाने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं और उनकी सुरक्षा की चिंता किए बिना उन्हें सड़कों पर स्वतंत्र रूप से घूमने देते हैं, वहीं दूसरी ओर अगर उन्हीं जानवरों का इस्तेमाल भोजन के लिए किया जाता है तो वे गहरी आपत्ति जताते हैं।
#Gen_Z "आप हमें कितना भी डराने या दबाने की कोशिश कर लीजिए, हम न डरेंगे, न झुकेंगे।
हर चुनौती का सामना पूरी हिम्मत से करेंगे।
जितना दबाओगे, उससे कई गुना ताकत और ऊर्जा के साथ फिर उठ खड़े होंगे।
हमारी आवाज़ को खामोश करना इतना आसान नहीं!"
मुरादाबाद में एक लड़की हिजाब में शॉपिंग करके घर वापस आ रही थी।
तभी रास्ते में "मुकेश" नाम के ठरकी ने लड़की को जबरदस्ती पीछे से पकड़ कर किस करने की कोशिश की।
लड़की डरी सहमी घर गई। मां ने थाने जा कर FIR लिखवाई। तब जा कर आरोपी पकड़ा गया।
कोई बोल रहा था आरोपी अगले चौराहे पर लंगड़ाते और माफ़ी मांगते दिखेगा। लेकिन इधर तो कोई ऐसा सीन नहीं हुआ।
कोई बोल रहा था महिलाएं इतनी सुरक्षित हैं कि रात में भी कहीं अकेले जा सकती हैं।
लोकसभा सांसद पप्पू यादव पर हमला करने वाला शख्स की तस्वीरें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के साथ हैं। अब यूपी के मुख्यमंत्री बताएं कि इस अपराधी को मिट्टी में मिलाएंगे? या धुएँ में उड़ाकर गंगा में बहाएंगे? या फिर मंच पर बुलाकर माला पहनाएंगे?
सरकार इनकी सुविधा के लिए रास्ता बनाती है, गुलाब के फूल बरसाती है फिर भी इनकी हिंसा को रोकने का इक़बाल नहीं रखती। समाजसेवी संगठन भी इंतज़ाम करते हैं। कैंप लगाते हैं। तब भी ये लोग हिंसा करने से बाज़ नहीं आते। कहने का मतलब है कि ये लोग राज्य और समाज दोनों से शिकायत नहीं कर सकते कि किसी ने परवाह नहीं की, फिर इनके भीतर इतनी हिंसा क्यों भरी है।
हर साल का यही हाल है। इन लोगों का फेस रिकॉग्निशन से रिकॉर्ड नहीं निकाला जाता है? पुलिस क्यों नहीं इनके घर चली जाती है? कम से कम इन सभी को एक गाइड लाइन पकड़ा देती कि कोई दिक्कत हो तो रास्ते भर पुलिस खड़ी है। आप पुलिस को बुलाइये। ख़ुद से मारपीट और तोड़ फोड़ मत कीजिए। कुछ तो काउंसलिंग करनी चाहिए और फिर कार्रवाई भी। कब तक स्टेट एक्शन नहीं लेगा और ये लोग हिंसा करते रहेंगे। इन्हें ये सब करने के लिए आप जेन ज़ी को दोष नहीं दे सकते। कई जेनरेशन से हो रहा है।
न भूलिए, एक जेन ज़ी ये भी है। अफीम के नशे में मस्त।
मोदीजी को ऐसी वाली जेन ज़ी चाहिए। इस पर तो वे और उनका परिवार आशीर्वाद बरसाता है।
दूसरा जेन ज़ी पढ़ा लिखा है, सवाल पूछता है, उनके निकम्मेपन पर लानतें भेजता है, आईना दिखाता है।
बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बेरी ने कहा था,
"मै मोदी जी के चरण धो कर पीना चाहता हूं"
उन्हें इन भाई ने जवाब दिया है,
उम्मीद है RT करके सुदेश बेरी तक भेजेंगे आप।
जवाब सुनिए पहले आप।
और ये “पत्रकार” हैं!
अमित शाह जी के सामने हाँथ बाँधे ठिठियाते हैं! शाह ने इनकी तरफ़ एक नज़र देख भी लिया तो फूले नहीं समाते! और इनको क्रिसमस विशिंग से आपत्ति है!
सोचिए, लोकतंत्र का कितना नुक़सान ऐसे “पत्रकारों” ने किया है जो सत्ता की ताल पर हर पल नाचने को तैयार बैठे है!