राजधानी @RaipurDistrict के तूता धरना स्थल पर डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 166 दिनों से जारी है। भीषण गर्मी, आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता के बीच युवा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा सांसद @SanjayAzadSln धरना स्थल पहुंचकर समर्थन देते हैं और संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। छत्तीसगढ़ के सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बड़े नेता आखिर कहां हैं? चुनाव के दौरान युवाओं के घर-घर जाकर समर्थन मांगने वाले नेता क्या 166 दिनों से चल रहे इस आंदोलन से अनजान हैं?
यह सवाल केवल डीएड अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों युवाओं का है जो रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। क्या नेताओं के लिए युवाओं का महत्व सिर्फ वोट देने तक सीमित है, या फिर उनकी समस्याओं का समाधान भी राजनीति की प्राथमिकता बनेगा? जनता जवाब चाहती है।
#ded अभ्यर्थी मन पिछले 24 दिसंबर से आमरण अनशन म बैठे हे वो अधिकार बर जेन ल पाए बार सुप्रीम कोर्ट ऑ हाइकोर्ट ले जीत के आदेश के बाद ये तथा कथित भाजपा के सुशासन के सरकार न्युक्ति नहीं दे pawat हे। @satyarajput321@ChhattisgarhCMO@BJP4CGState@aajtak@PMOIndia
जब-जब युवा बोला है तब-तब सत्ता डोला है।
ये बात नेताओं को याद रखनी चाहिए।
57000 शिक्षक भर्ती का वादा करने वाली सरकार, 2300 पदों पर नियुक्ति नहीं दे पा रही है, जबकि हाईकोर्ट का आदेश है कि 2300 पदों जल्द से जल्द नियुक्ति की जाये।
@LaxmiRajwade21 पहले कैबिनेट में 10वी 12वी पास करके डी एड डीएलएड करके शिक्षक भर्ती चयन सूची में टॉप में है उसको नौकरी दो फिर इन लोगो का भविष्य बनाना हम वो है जो 2 महीने से तूता धरना स्थल में बैठे है
@CGVOICE00777#BJP युवओं के संवैधानिक अधिकारों को छीनने वाली यह तानाशाही सरकार है l आपने जिम्मेदारी से पीछे भागने वाली ऐसी ही सरकार हमें नहीं चाहिए मैं ऐसे सरकार का बहिष्कार करता हूं
**सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में आदिवासी वर्ग के 1600 पद रिक्त — हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं, आदिवासी युवाओं का आमरण अनशन, 200 से अधिक अस्पताल में भर्ती*
छत्तीसगढ़ राज्य में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत कुल 2300 रिक्त पदों में से लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग के लिए आरक्षित होने के बावजूद आज तक भरे नहीं गए हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बात है कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान बीजेपी सरकार में आदिवासी मुख्यमंत्री के होते हुए आदिवासी युवाओं को नियुक्ति के लिए भटकना पड़ रहा है और माननीय हाईकोर्ट (2 अप्रैल 2024 व 26 सितंबर 2025) तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट (28 अगस्त 2024) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा योग्य आदिवासी अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी जा रही है। इस गंभीर अन्याय के विरोध में आदिवासी वर्ग के सैकड़ों पात्र अभ्यर्थी एवं उनके परिजन 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलन के दौरान अब तक 200 से अधिक आदिवासी युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। कई अभ्यर्थियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पीड़ित आदिवासी अभ्यर्थियों द्वारा *महामहिम राष्ट्रपति महोदय, माननीय राज्यपाल श्री रामेन डेका जी, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय शिक्षा मंत्री* को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। आदिवासी समाज का कहना है कि न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना न केवल संविधान का उल्लंघन है, बल्कि यह आदिवासी युवाओं के भविष्य के साथ खुला अन्याय भी है। वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद उन्हें रोजगार से वंचित रखा जा रहा है, जिससे सामाजिक-आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
पीड़ित अभ्यर्थियों एवं आदिवासी संगठनों की मांग है कि:सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत रिक्त 1600 आदिवासी पदों पर तत्काल नियुक्ति की जाए। माननीय हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का तत्काल एवं पूर्ण पालन किया जाए। आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार ले।
दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जवाबदेही तय की जाए।यदि शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आदिवासी पीड़ित डीएड अभ्यर्थी
सहायक शिक्षक भर्ती 2023