जबतक इस कर्मचारी को @RailwaySeva सस्पेंड नहीं करती तबतक Video को शेयर करें।
पटना जंक्शन पर इंक्वायरी काउंटर का बाबू सफेद कमीज़ में कुर्सी पर लेटा हुआ, माइक सामने है, यात्री खड़े हैं, और ये आराम से सुस्की ले रहा है।
बिहार पुलिस एक लड़के का एनकाउंटर करके काफ़ी बहादुर बन चुकी है। कार में महिला है, फिर भी दरोगा जी माँ-बहन की गालियाँ दे रहे हैं। कारण बस इतना है कि कार मालिक ने सिर्फ़ यह पूछ लिया था कि किस कानून के तहत गाड़ी रुकवा रहे हो..
@bihar_police@samrat4bjp
“40₹ पाकिस्तान से आए तो मेट्रो लिया
20₹ अमेरिका से एक तो रिक्शा लिया…”
क्या ज़बरदस्त जवाब है!
इस जवाब को सुनने के बाद तो उन नामुरादों को अपना चेहरा रेत में गोत लेना चाहिए जो किसी भी असंतोष और प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग देखते हैं
VC @Nher_who
Reporter: Are you funded by foreign countries
Student: Yes I got fund from Pakistan,they sent me Rs 40 so that I can travel via bus,for auto I got 20 Rs funding from U.S,when I'll return home,hope I'll get fund from Nepal
We can't get funds in India coz all are utilised by BJP"
22 Lakh Students Suffer Due to Paper Leak = No Politician Resigned
2 Minutes Late = 3 Students Denied Entry to Set an Example of Discipline
Two Systems in India
मंडावा के नवीन को झुंझुनूं पुलिस ने इस वीडियो के लिए गिरफ्तार किया, उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया
इस वीडियो में एक तरफ RSS की शाखा चल रही है, दूसरी तरफ बच्चे मेहनत कर रहे हैं
इसमें क्या ग़लत दिखाया. RSS नफ़रत फैलाती है - यह सच है
लो कर दिया पोस्ट
कितनों को करेंगे गिरफ़्तार?
"अमित शाह देश के गृहमंत्री है..उनके नियंत्रण में चुनाव आयोग है... अब लगता है कि सुप्रीम कोर्ट भी उनके नियंत्रण में आ गया है"
◆ गृहमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए संजय राउत ने कहा
@rautsanjay61 | #AmitShah | #SupremeCourt | Shivsena | Uddhav
🚨 क्या यह उत्तर प्रदेश पुलिस का सही व्यवहार है?
UP पुलिस दो-तीन दरोगा पूर्ण द्विवेदी को जबरन अपने साथ थाने ले जाने की कहते हैं लेकिन पूर्ण द्विवेदी उनसे कहता है मेरा क्या अपराध है फिर भी पुलिस नहीं सुनती है उसे गाड़ी में बैठने को कहती है
UP पुलिस माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का कितना उल्लंघन करते हैं कि व्यक्ति को जब भी गिरफ्तार करें तो उसके गिरफ्तारी के समय ही उसके कारण बताए जाएं जबकि यह नहीं बता रहे हैं
उनका नाम प्रदीप कसनी था।
वे हरियाणा प्रशासन में चौंतीस वर्षों तक अधिकारी रहे। इतने लंबे कार्यकाल में वे एक ऐसी संख्या के लिए प्रसिद्ध हो गए, जो यह बताती है कि इस देश में कभी-कभी सबसे ईमानदार लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।
71 तबादले।
चौंतीस साल की सेवा में इकहत्तर तबादले।
यानी औसतन हर छह महीने में एक बार उन्हें अपना पद, अपना कार्यालय और अक्सर अपना शहर बदलना पड़ा।
नई पोस्टिंग, नई जगह, नई मेज़ — बार-बार, लगातार।
जहाँ अधिकांश अधिकारी एक दिशा में अपना करियर बनाते हैं, वहीं कसनी का करियर बार-बार किनारे धकेले जाने की कहानी बन गया।
उन्हें कभी काम में असफल होने के कारण नहीं हटाया गया।
बल्कि लगभग हर विवरण इसके विपरीत कहानी कहता है।
उनका तबादला इसलिए होता रहा क्योंकि वे नियमों के अनुसार काम करते थे और प्रभावशाली लोगों की इच्छा के अनुसार फाइलों को मोड़ने से इनकार कर देते थे।
उन्होंने एक बार कहा था कि कई बार आपको पहले से पता होता है कि सरकार या कोई मंत्री किसी फाइल के साथ क्या व्यवहार चाहता है। लेकिन जब वे नियमों के अनुसार अलग निर्णय लेते, तो शाम तक तबादले का आदेश पहुँच जाता।
सबसे बड़ा अपमान उनके करियर के बिल्कुल अंत में हुआ।
अपनी अंतिम पोस्टिंग पर उन्हें एक सरकारी बोर्ड में अधिकारी बनाकर भेजा गया।
जब वे वहाँ पहुँचे, तो उन्हें कुछ अजीब लगा।
न कोई फाइल थी, न कर्मचारी, और न ही कोई वास्तविक काम।
सच्चाई जानने के लिए उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन किया।
जो जवाब मिला, वह लगभग अविश्वसनीय था।
जिस बोर्ड में उनकी पोस्टिंग की गई थी, वह वर्षों पहले ही आधिकारिक रूप से बंद हो चुका था।
उन्हें ऐसे विभाग में स्थानांतरित किया गया था, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं था।
और क्योंकि वह पद ही वास्तविक नहीं था, उन्हें अपने करियर के अंतिम छह महीनों का वेतन भी नहीं मिला।
वे सेवानिवृत्त हुए, लेकिन इस अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रही।
उन्होंने कहा कि वे न्याय मिलने तक संघर्ष करते रहेंगे।
जिस व्यक्ति ने राज्य को अपने जीवन के चौंतीस ईमानदार वर्ष दिए, उसे अंत में एक ऐसे कार्यालय में भेज दिया गया जो था ही नहीं।
ऐसी कहानियाँ भारत को याद रखनी चाहिए।
🚨 यह है हमारे उत्तर प्रदेश पुलिस का हाल
उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला मोबाइल चलाने में व्यस्त है इससे एक पीड़ित महिला ने दरोगा के बारे में पूछ लिया तो उसको सीधा जवाब दिया कि
"बना ली वीडियो क्या होता है हमसे फालतू बातें ना कर"
मतलब यह नौकरी लगने के बाद इनका दिमाग सातवें आसमान पर हो जाता है और जनता को यह गुलाम समझती हैं
अजमेर में NEET परीक्षा देने पहुंची 18 वर्षीय कुलसुम बानो को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से रोके जाने का मामला सामने आया है। केंद्र पर तैनात अधिकारियों ने उनके बुर्क़ा और दुपट्टा पहने होने पर आपत्ति जताई और उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया।
कुलसुम का कहना है कि NTA ने उन्हें इस पहनावे के साथ परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी है। उन्होंने तर्क दिया कि इसी तरह के पहनावे के साथ उन्होंने बीते 3 मई को भी परीक्षा दी थी, तब कोई समस्या नहीं हुई थी। कुलसुम ने स्पष्ट किया है कि यदि उनके पहनावे को लेकर यह विवाद जारी रहा और उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया, तो वह परीक्षा नहीं देंगी।
संभल के कसेरवा गांव की मुस्तफ़ा क़ादरी मस्जिद में I Love Mohammad लिखे पोस्टर और इस्लामिक झंडा मिलने पर पुलिस ने मस्जिद के मुतवल्ली सहित 8 मुस्लिम व्यक्तियों के खिलाफ़ FIR दर्ज की थी, एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि बरामद सामग्री में हिंदू समुदाय के बीच आक्रोश पैदा करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की क्षमता थी। BNS की धारा 353(2) जिसका मतलब झूठी अफवाहें, भड़काऊ समाचार या गलत जानकारी फैलाते है, इसका उद्देश्य विभिन्न धर्मों, जातियों या समुदायों के बीच नफरत और दुश्मनी पैदा करने से रोकना होता हैं।
बीबीसी ने जब इस FIR पर संभल के एसपी के०के बिश्नोई से सवाल किया तो साहब ने जवाब ऐसा दिया जिसमें साफ़ साफ़ दिख रहा है कि FIR जबरन की गई हैं बिना वजह की गई है और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला किया गया है। FIR एल आई यू की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज करना बताया गया है, वाह जी वाह।
बस हाईवे बनाते जाओ, क्योंकि असली कमाई वहीं है. ‘किकबैक’ का खेल इतना सॉलिड है कि हर किलोमीटर ‘सोना’ उगल रहा है. लोग नितिन गडकरी की तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन सवाल ये है कि इन हाईवे और एक्सप्रेसवे से फायदा आखिर किसका हो रहा है ? जनता का या सत्ता में बैठे लोगों का! क्योंकि जो प्रोग्रेस दिख रही है, वो आम लोगों की नहीं, बल्कि सिर्फ नितिन गड़करी की अपनी प्रोग्रेस है.
सरकार में बैठे लोगों से पूछा जाना चाहिए कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आखिर हुआ क्या. उन बड़े-बड़े दावों का क्या हुआ जो मंचों से किए गए थे. आखिर कहां गए वो सारे वादे ?
जनरल कैटेगरी के गरीब बच्चों को हक दिलाने के लिए मोदी सरकार ने EWS कोटा बनाया था
ताकि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सहारा मिले,
लेकिन देश की सबसे बड़ी परीक्षा UPSC में जो हुआ, उसने सबको हिलाकर रख दिया है।
इस साल UPSC में EWS कोटे से 104 लोग सेलेक्ट हुए...
जब Indian Express ने इसकी तहकीकात की तो होश उड़ाने वाला सच सामने आया।
इन 104 में से 84 लोग वो निकले जो अमीर परिवारों से हैं,
जिन्होंने लाखों रुपए की महँगी कोचिंग ली, जो एक-डेढ़ लाख सालाना फीस वाले स्कूलों में पढ़े और जिनके माता-पिता बड़े बिजनेसमैन हैं।
“ये TMC के अलग गुट वालों में अगर थोड़ी भी ईमानदारी है तो अपना पद छोड़ दीजिए और जिस भी पार्टी की टिकट से लड़ना है लड़ो, किसने आपको रोककर रखा है लोकतांत्रिक तरीके से दोबारा चुनाव लड़िए और अपनी सीट खाली कर दीजिए”
@abhishekaitc
मुंबई का विश्वकर्मा परिवार अपने पुजारी विनोद मिश्रा के साथ 20 अक्टूबर 2025 को अयोध्या जाते हैं.
विश्वकर्मा परिवार राम मंदिर में चांदी की पादुका और हीरे का हार चढ़ाता है.
विश्वकर्मा परिवार के पुजारी का आरोप है, टीनू यादव जो उन समय मंदिर की देखरेख करते थे उन्होंने दोनों आभूषण मंदिर के पुजारी सौंप दिया,
और हम लोगों से कहा, इस आभूषण की जांच होगी, उसके बाद भगवान राम जी की मूर्ति पर चढ़ाया जाएगा, उसका एक आप लोगों फ़ोटो और आभूषण की रसीद मिलेगी.
विनोद मिश्रा का कहना है, 8 महीना बीत गया आज तक कोई रसीद मिली, ना फोटो भेजा गया.
मित्रों, राम मंदिर दान दक्षिणा चोरी मामले में छोटी मछली टिन्नू यादव 100% फसेगा, लेकिन यह कहना मुश्किल है बड़ी बड़ी मछली फसेगी या नही ?
मैं गवाह हूं कि संतोष दुबे के साथ अयोध्या के संतों के पास देश भर के कारसेवकों के फोन आ रहे हैं सभी में राम मंदिर के कर्ताओं धर्ताओं खिलाफ भारी गुस्सा है।
एक बात अयोध्या में स्पष्ट तौर पर समझ में आई कि यह दरअसल घोटाला भर नहीं है। दरअसल हिन्दुत्ववादी फोर्सेज के आपसी झगड़े ने इस घोटाले को सतह पर ला दिया है नहीं तो सभी ने यहां तक कि ट्रस्ट के सदस्यों ने आँखें मूँद रखी थी।
यह चौंकाने वाली बात है कि नृपेंद्र मिश्रा इस बेहद गंभीर मामले में योगी आदित्यनाथ के विपरीत बयान दे रहे हैं। योगी जी ने कहा कि 15 दिन में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा नृपेंद्र मिश्रा ने कह दिया कि 15 दिन में कौन सी जांच हो जाएगी।
यह भी कहा जा रहा है कि एक लॉबी इस मामले में जांच की मांग उठने पर चाहती थी कि किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत जज से जांच करा ली जाए जिससे ताजा गतिरोध को टाला जा सके लेकिन योगी आदित्यनाथ ने SIT जांच के आदेश दे दिए।
अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इससे मंदिर प्रबंधन पर लग रहे आरोपों के साथ-साथ संदेह भी बढ़ता जा रहा है। मंदिर निर्माण के समय दान देने वाले कुछ श्रद्धालु अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और दान में दी गई वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने बताया कि देशभर के सराफा कारोबारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी एकत्र की थी। इस चांदी को गलाकर एक से सवा किलो वजन की ईंटें तैयार की गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र अंकित थे। इसके अलावा ऋषिकेश एसोसिएशन की ओर से एक किलो चांदी का कलश भी भेंट किया गया था।
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