पुलिस जितना क्रूर इस देश में कोई नहीं रहा है..
वीडियो में कथित तौर पर शुक्रवार रात हाफ़िज़पेट रेलवे स्टेशन के बाहर एक RPF कॉन्स्टेबल एक महिला को पीटते और उसके बाल पकड़कर घसीटते हुए दिख रहा है।
बीते छह वर्षों में 2100 इबादतगाहों, दरगाह, मजारों, मदरसों पर बुलडोजर चलाया गया है। बुलडोजर की यह कार्रावाई उन राज्यों में सबसे अधिक हुई है, जिनमें भाजपा की सरकार है। भाजपा सरकार में पूरी मशीनरी ‘अपने’ धर्म के प्रचार, प्रसार में लगी है, और ‘दूसरों’ की इबादतगाहों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के बैरागढ़ में ऑटो चालक मोहम्मद सलाहुद्दीन कुरैशी के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि सवारी लेने जा रहे सलाहुद्दीन की बुकिंग रद्द हो गई। रास्ते में धार्मिक झांकी देखकर उन्होंने सड़क बंद समझकर ऑटो पीछे करना शुरू किया। इसी दौरान पीछे खड़े एक बाइक सवार से बाइक हटाने को कहा तो उसने कथित तौर पर सलाहुद्दीन की दाढ़ी और टोपी देखकर धार्मिक गाली दी और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि बाइक सवार के कुछ साथी भी वहां पहुंच गए और सलाहुद्दीन के साथ मारपीट की। वह जान बचाकर भागे, लेकिन कुछ दूर जाकर उन्हें फिर पकड़ लिया गया और दोबारा पीटा गया। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें दाढ़ी से पकड़कर जबरन "जय श्री राम" बोलने के लिए मजबूर किया और उनके ऑटो में भी तोड़फोड़ की। घटना के बाद आरोपियों पर सलाहुद्दीन को पुलिस थाने ले जाकर उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने की कोशिश करने का भी आरोप है। हालांकि, एक प्रत्यक्षदर्शी वीडियो लेकर थाने पहुंचा और पुलिस सब-इंस्पेक्टर सचिन वर्मा को घटना का वीडियो दिखाया। आरोप है कि वीडियो देखने के बावजूद SI ने सलाहुद्दीन का बयान दर्ज नहीं किया और अपनी तरफ से रिपोर्ट तैयार कर उनके हस्ताक्षर करा लिए।
दिल्ली के इस छात्र ने अपना आपा खोया , बेसमेंट की खुदाई ना होने पर छात्र ने दिल्ली पुलिस से तीखी नोक झोक की ,
दिल्ली के सत्य निकेतन मे 5 मंजिला बिल्डिंग गिरने के बाद प्रशासन ने बेसमेंट की खुदाई पर रोक लगा दी , जिसके बाद कई छात्रों ने बेसमेंट की खुदाई ना करने पर नाराजगी जाहिर की ,
दाढ़ी-टोपी के साथ ट्रेनों में चलना मुश्किल हो रहा है, लोग ख़ौफ महसूस कर रहे है: मौलाना अबू तालिब ने कहा.
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दिल्लीवालों की व्यथा खत्म ही नहीं हो रही है
ये समीर है
यादव नगर में रिक्शा चलाता था
रिक्शा चोरी हो गया तो उसने खुद दौड़-भाग कर के अपना रिक्शा ढूंढ लिया
इंसाफ़ की गुहार लगाने दिल्ली पुलिस के पास पहुँचा तो पुलिस ने उल्टा उसे ही इतना मारा कि उसका हाथ ही टूट गया
लानत है अमित शाह !
उत्तराखंड के सितारगंज में सागर नामी युवक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। पीड़िता की मां का आरोप है कि वो पिछले दो महीने से सितारगंज थाने के चक्कर काट रही हैं। लेकिन सितारगंज कोतवाल अलग ही अपनी धुन में ही मग्न हैं। एक मां का दुख देखकर समाज के सभी मज़हब के लोग इकट्ठा हुए और थाने पहुंच गए। उत्तराखंड के चर्चित बॉडी बिल्डर मोहित चोपड़ा भी सितारगंज पहुंचे और नाबालिग बच्ची को बरामद करने की मांग की।
पीड़ित मां का आरोप है सितारगंज कोतवाल उनकी शिकायत सुनने के बजाए उन्हें डांट डपट कर भगा देते हैं। अगर @UdhamSNagarPol का यही रवैया रहा तो कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए। @uttarakhandcops को मामले का संज्ञान लेना चाहिए, इससे पहले कुछ देर हो जाए।
अब सवाल उत्तराखंड मुख्यमंत्री @pushkardhami से है। आखिर उनकी सरकार में बच्चियां इतनी ही सुरक्षित हैं? @ukcmo यह भी बताए कि अगर यही अपराध ‘दूसरे’ ने किया होता तो अब तक क्या हो गया होता? क्या उस अपराधी का एनकाउंटर नहीं हो गया होता? क्या उस अपराधी का घर नहीं गिरा दिया होता? यही है न्याय का मापदंड?
ये समीर है, नॉर्थ दिल्ली के यादव नगर निवासी समीर अपनी मां के साथ रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाता है। उसका कहना है कि हाल ही में उसका ई-रिक्शा चोरी हो गया, उसने खुद तलाश कर ई-रिक्शा और कथित चोर को पकड़ लिया और दोनों को लेकर पुलिस के पास पहुंचा।आरोप है कि चोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उसके साथ ही मारपीट की, जिसमें उसके हाथों को चोट आई। समीर के इन आरोपों कि निष्पक्ष जांच जरूरी है।
According to reports, In a brutal show of bulldozer tyranny, the district administration razed the homes of 73 Muslim families across five villages in Assam, flattening shelters with JCBs despite residents’ land documents. Given only 24 hours’ notice and no hearing, families were left homeless as the state chose demolition over due process-acts the Gauhati High Court has already flagged as prima facie illegal.
असम: गोलपारा जिले के कृष्णई क्षेत्र में प्रशासन ने पाँच गाँवों में 73 मुस्लिम परिवारों के घरों पर बुलडोज़र कार्यवाई की हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन परिवारों ने ज़मीन तो खरीदी थी, लेकिन उसे खेती वाली ज़मीन से रिहायशी ज़मीन में नहीं बदलवाया था।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें घर गिराने से सिर्फ़ एक दिन पहले ही इसकी जानकारी दी गई, जिससे उन्हें अपना सामान हटाने के लिए काफ़ी समय नहीं मिला।
120 साल पुरानी सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद को बुलडोज ही नहीं किया गया बल्कि कुरान पाक से लेकर जानमाज, टोपी, तस्बीह , इमाम साहब के कपड़े सब कुछ ट्रक में भरकर मलबे के साथ फेंक दिया गया!
देखिए ये ग्राउंड रिपोर्टिंग Red Chilli Live पर👇
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#Saharanpur#Masjid
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद: 1909 की यह ईंट बता रही है कि मस्जिद 1911 में बनी थी। जिस मस्जिद को अवैध बताकर ढहा दिया गया, उसी के मलबे से निकली यह ईंट आज उसकी मौजूदगी और इतिहास की गवाही दे रही है।