अक्सर सोचता था कि लोग आत्महत्या "क्यों" करते हैं, जीवन इतना कठिन तो कभी नहीं हो सकता कि उससे उभरा न जा सके, या मृत्यु बाद सब सही हो जाता है? पर अब जब मैं खुद वैसा सोचता हूं तो मुझे मेरे उस "क्यों" का उत्तर मिलता है और लगने लगा है कि मृत्यु बाद ही सब सही होने की संभावना है...!!!
मुझे नहीं लगता शादी से सुख प्राप्त होता है, मेरी नीति तो यह है कि जब तक मां है उनकी सेवा करनी है, अच्छी जीविका कमानी है कुछ पैसे इकट्ठे करके घूमने निकल जाना है, हर तीर्थ हर धाम और जीवन के अंतिम चरण में बनारस की गलियों को ��र बना लेना है और वहीं से नर्क पहुंचना है...!!!
अगर आपके घर में पहले से ही पर्याप्त LPG सिलेंडर हैं, तो कृपया उन्हें जमा करके (होर्डिंग करके) न रखें।
इस महत्वपूर्ण समय में हमें देश के जिम्मेदार नागरिक के रूप में नैतिक रूप से सही व्यवहार करना चाहिए। स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी, इसलिए अनावश्यक रूप से LPG सिलेंडर जमा करके देश को बड़ी कमी (शॉर्टेज) की स्थिति में न डालें।
जितनी ज़रूरत हो उतना ही लें, ताकि हर घर तक गैस पहुँच सके। 🇮🇳
उबाल आते ही आंच धीमी करें — LPG की समझदारी भरी बचत करें।
उबाल के बाद तेज़ आंच रखने से खाना जल्दी नहीं पकता, सिर्फ़ गैस ज़्यादा खर्च होती है।
धीमी आंच अपनाकर 25% तक LPG बचाए��, बिना अतिरिक्त समय गंवाए।
छोटी आदत, बड़ी बचत-
ऊर्जा संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
याद रखें: उबाल आते ही आंच धीमी करें — यही है समझदारी!
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