UP में 1 से 8वीं कक्षा के क़रीब 1.5 लाख स्कूल हैं, जिनमे क़रीब 2 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं l इसमें बहुतायत SC/ST/OBC समाज के बच्चे हैं ।
@yadavakhilesh क्यों नहीं चाहते के ये गरीब बच्चे ठीक से पढ़े, इनके टीचर भी टाइम से आये, इनका भी एक सुचारू टाइम-टेबल हो - शायद इसलिए कि पढ़-लिख गये तो @samajwadiparty के खटाखट जैसे झूँठ में कैसे फँसेंगे?
इनकी सुपुत्री लखनऊ के महँगे ला मार्टिनियर स्कूल में पढ़ी हैं - क्या वहाँ टीचरों की अटेंडेंस नहीं होती ? फिर ग़रीबों बच्चों के स्कूलों में टीचरों की डिजिटल अटेंडेंस क्यों ना हो ।
योगी सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत किया, मिशन निपुण से स्कूलों की पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाई, टीचरों की छुट्टी, रिपोर्ट आदि सब ऐप से जाने लगी - जिससे उनको ब्लॉक ऑफिस के चक्कर ना काटने पड़े, टीचरों के विश्व स्तरीय ट्रेनिंग हुईं, बच्चों को किताबों के साथ वर्कबुक दी गयीं ।
और एक बात - बड़े मंचों से अखिलेश जी ने कई बार एग्जाम में चीटिंग तो जायज़ ठहराया है । कल्याण सिंह चीटिंग के विरुद्ध क़ानून लातें हैं, मुलायम सिंह यादव CM बनते ही उस क़ानून को हटा देते हैं - ये लोग क्यों नहीं चाहते कि UP के गरीब बच्चे अच्छे से पढ़ पायें, काबिल बन पायें?
अखिलेश जी के बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़े, लंदन में पढ़े - लेकिन वो नहीं चाहते कि UP के सरकारी स्कूलों में हर दिन पढ़ाई टाइम से शुरू हो ।
उन एक करोड़ गरीब माता-पिता से पूछना चाहिए - क्या वो नहीं चाहते की सरकारी स्कूलों में टीचर टाइम से आयें ?