23 वर्षीय आदित्य शर्मा, जो एक भारतीय जहाज पर काम कर रहे थे, अमेरिका के हमले में मारे गए, उसी अमेरिका के जिसकी तारीफ में उसके पिता राजेश शर्मा रात-दिन प्रशंसा से भरे जुमले बाँधते थे।
इजरायल-अमेरिका का भक्त बनकर गाजा के बच्चों की मौत का जश्न मनाते थे, आज वही राजेश शर्मा अपने बेटे आदित्य की लाश देख रहे हैं।
नफरत की राजनीति की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि वह आखिरकार इंसानियत को ही निगल जाती है, जब बेगुनाह लोगों का खून बहता है, तो राजेश जैसे लोग उसे अपनी वैचारिक जीत समझते हैं।
लेकिन युद्ध किसी का सगा नहीं होता, न अमेरिका किसी का सगा है, न इज़राइल किसी का सगा है, आज अगर राजेश का परिवार अपने बेटे को खोने के दर्द से गुजर रहा है, तो उस दर्द का मज़ाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए, लेकिन हमें राजेश से तनिक भी सहानुभूति नहीं है।
हां आदित्य के जाने का अफसोस है, अमेरिका से बदला लिया जाना चाहिए, लेकिन लेगा कौन? नरेंद्र मोदी? ट्वीट करने की भी हिम्मत है?
गोदी मीडिया और गोदी एंकर्स क्यों भारत 🇮🇳 की नाक कटवाने पर तुले हुए हैं … ???
भारत के भीतर तक झूठी ख़बरों को प्लांट करवाने और चलाने तक तो समझ आता है कम से कम ये फ़ज़ीहत तो मत करवाते.
#Shame
सौरभ द्विवेदी के साथ ग़ज़ब हो गया!!
जब वो अंजना-खान सर पर एक स्टोरी शूट कर रहे थे
तभी स्क्रीन पर ऑफिस बॉय नजर आ जाता है!!
फिर जो हुआ आप भी देखिये!!
सौरभ चाहते तो ये पार्ट एडिट करवा सकते थे, लेकिन खुद को सज्जन दिखाना था
सौरभ को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन उसे पी गए!!!!
“एक ग़रीब माँ जब लकड़ी के चूल्हे से खाना पकाती है तो वैज्ञानिकों का कहना है कि एक दिवस में उनके शरीर में 4 सौ सिगारेट का धुआँ चला जाता है”
जब पांच करोड़ परिवारों को रसोई गैस सब्सिडी देने का ऐलान किया था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
वर्षों से नकली हंसी, स्क्रिप्टेड जोक्स और चाटुकारिता पर टिकी कॉमेडी
को "कॉमेडी का बादशाह" बताकर बेचा जाता रहा। लेकिन एक
अनुभवी कलाकार ने कुछ ही दिनों में यह दिखा दिया कि असली व्यंग्य
और हास्य क्या होता है। 🔥
मंच पर आते ही शेखर सुमन ने वही किया जो कभी भारतीय कॉमेडी
की पहचान हुआ करता था—सत्ता, राजनीति, व्यवस्था और समाज पर
सीधे सवाल। बिना लाग-लपेट, बिना किसी कृत्रिम हंसी के सहारे और
बिना किसी की खुशामद किए।
एक दौर था जब व्यंग्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना
माना जाता था। कॉमेडी का काम केवल लोगों को हंसाना नहीं, बल्कि
सोचने पर मजबूर करना भी होता था। लेकिन धीरे-धीरे टीवी और
डिजिटल मंचों पर ऐसी कॉमेडी हावी होती गई, जिसमें जोखिम कम
और खुशामद ज्यादा दिखाई देने लगी।
ऐसे माहौल में जब अधिकांश कॉमेडियन राजनीतिक व्यंग्य से दूरी बना
चुके हैं, शेखर सुमन ने फिर से याद दिलाया कि हास्य की सबसे बड़ी
ताकत सत्ता से सवाल पूछने और समाज की विसंगतियों को उजागर
करने में होती है।
यही वजह है कि उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा। क्योंकि लोग
सिर्फ हंसी नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता, साहस और समसामयिक मुद्दों पर
तीखी टिप्पणी भी देखना चाहते हैं।
कॉमेडी तब सबसे प्रभावशाली होती है, जब वह सिर्फ मनोरंजन नहीं
बल्कि विचार भी पैदा करे। और शायद इसी कारण राजनीतिक व्यंग्य
आज भी दर्शकों के दिल में अपनी खास जगह बनाए हुए है। ✍️
सवाल Anjana Om Kashyap ने पूछा था, लेकिन जवाब ने गोदी मीडिया की पूरी स्क्रिप्ट फाड़ दी 🔥
पवन खेड़ा ने बेबाकी से जवाब दिया और एजेंडा बेनकाब हो गया
पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल करना है, उसकी ढाल बनना नहीं
गोदी मीडिया कब पत्रकारिता करेगी? 🤔
अगर अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट नहीं पहना होता , ये इस हमले में उन्हें कुछ भी हो सकता था .
वीडियो में दिख रहे लोगों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए और अभिषेक की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए .
कई वीडियो में साफ दिख रहा है एक सांसद को घेरकर या खींचकर टारगेट किया है . ये कौन लोग हैं ? सबकी पहचान होनी चाहिए.
बंगाल में अब हिंसा का नया दौर शुरू होने वाला है क्या ?
विश्व में सबसे निचले पायदान वाली मीडिया को अभिनय सर ने धो कर रख दिया 😆
सुनो @anjanaomkashyap जब तुम रोड पर पत्रकारिता करने निकलती हो न लोग तुम्हारे जैसे पत्रकार को गोदी मीडिया मोदी मीडिया कहकर अपमानित करते है, वही अभिनय सर, खान सर,विवेक सर, जैसे लोग निकल जाते है रोड पर तो पढ़े लिखे युवा सम्मान के नजर से देखते हुए पैर छू लेते है यह अंतर तुममें और यूट्यूब वाले टीचर में
सुनो @anjanaomkashyap तुमने सिर्फ अंधभक्त और मोदी भक्त पैदा किए देश में जो देश के बर्बादी पर ताली बजाते है वही ये ट्यूट्यूब वाले शिक्षक पढ़ा लिखा के नौजवानों को देश के बॉर्डर तक में भेज दिए जो देश की सुरक्षा करते है और तुम जैसे पत्रकार अमन की सांस लेकर टीचरों को गरियाने का कम करते हो लाल ऑफिस में बैठकर,
मुझे बहुत लिखना है पर खराब चीजों के बारे में क्या लिखूं टाइम बर्बाद होता है, अंत में यही कहूंगा विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में अंजना जी नीचे से टॉप कराओ 157 से आगे बढ़ो अच्छा नहीं लग रहा क्योंकि इतना चाटुकारिता भरी पत्रकारिता है ऊपर तो आ नहीं सकते कभी कम से कम नीचे पर तो टॉप पर रहो कही तो आपकी चर्चा हो,
@ABPNews@abplive@UPTakOfficial@kmrvivek14@rojgarwithankit
थाना मुण्डेरवा क्षेत्र में एक महिला की इलाज के उपरांत तबियत बिगड़ने पर जिला अस्पताल ले जाते समय मृत्यु होने पर की जा रही कार्यवाही के सम्बंध में क्षेत्राधिकारी रुधौली द्वारा दी गई बाईट-
@Uppolice@digbasti@AdgGkr
सुप्रिया सुले के बेटे ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से MBA कम्पलीट कर लिया है,
लेकिन वो नौकरी नहीं करेगा,
वो सांसद, विधायक, मंत्री बनकर तुम सब पर राज करेगा,
सब नेता लोग का बेटा बेटी विदेश में पांच सितारा जिंदगी जीते हुए पढ़ाई कर रहा है,
और मोदी जी तुम लोग से कह रहे हैँ कि
तेल मत खाओ, बलिदान दो,
जनता के बलिदान से ही भारत के सब नेता लोग मौज कर रहे हैँ,
सबका बच्चा विदेश में पढ़ेगा
और तुम्हारा बच्चा पांच किलो राशन की लाइन में लगेगा,
जिसमें से डेढ़ किलो कोटेदार चोरी कर लेता है,
सपा के प्रवक्ता राजकुमार भाटी कह रहे हैं “ब्राह्मण भला ना वेश्या, इनमें भला ना कोई। कोई-कोई वेश्या तो भली, ब्राह्मण भला ना कोई।”
आपको शर्म आनी चाहिए राजकुमार भाटी जी @rajkumarbhatisp जी, मैं तो आपको समझदार आदमी समझता था। यह तो मोदी जी वाली बात कर दिए आप। कपड़ों से, जाति से पहचान वाली। घोर जातिवादी निकले आप।
अखिलेश यादव ब्राह्मण मतदाताओं का वोट लेने की कोशिश कर रहे हैं आप उस पर पानी फेर रहे हैं। अब वही ब्राह्मण दूसरी पार्टियों को वोट दे देगा तब आप ठहाके लगाइएगा।
सवाल ये है कि किसी और पार्टी की जीत पर हमारे ऐंकर और चैनल क्या इतना सजते-संवरते हैं? क्या बीजेपी से इतर पार्टियों की जीत पर, सफलता पर वे जश्न की मुद्राएं दिखाते हैं?
नहीं दिखाते और यहीं उनके चरित्र की पोल खुल जाती है, समझ में आ जाता है कि वे किसी एक पार्टी, एक विचारधारा और एक नेता पर समर्पित हैं, उनकी चापलूसी में लगे हुए हैं।
इससे ये भी समझ जाना चाहिए कि वे किस वर्ण और वर्ग के हैं और किसके लिए काम कर रहे हैं।
कुल 99 उम्मीदवार कांग्रेस ने उतारे। इसमें 79 हिंदू उम्मीदवार थे। 20 मुस्लिम उम्मीदवार थे। प्रतिनिधित्व का कॉन्सेप्ट समझते हो तुम? परसेंटेज निकालना आता है तुमको?
असम में तुम्हारा सबसे बड़ा चेहरा कहता है हमें मुस्लिम वोट नहीं चाहिए। बंगाल में तुम्हारा सबसे बड़ा चेहरा कहता है हिंदुओं ने साथ दिया, हिंदुओं के लिए काम करेंगे। ये किसी भी जगह की वैल्यू हो इंडिया/भारत/हिंदुस्तान की वैल्यू नहीं है।
लेकिन तुम्हे "भारत के विचार" से क्या ही मतलब!!!!
जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है।
अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं हूंगा और कोई दलील भी नहीं रखूँगा।
राघव चढ्ढा ने पंजाब में टिकट के लिए अपने ही पार्टी के नेताओं से करोडों रुपये का भ्रष्टाचार किया।
खालिस्तान-पाकिस्तान का एजेंडा चलाने वालों से राष्ट्रवादियों को सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है-श्री @kuljeetschahal
भाजपा नेता राम माधव अमरीका से पूछ रहे हैं कि हुज़ूर कहाँ कमी रह गई? आपके कहने पर हमने ईरान और रूस से तेल खरीदना बंद किया, टैरिफ सर झुकाकर स्वीकार किया, आखिर कमी कहाँ रह गई?
कमी रीढ़ की हड्डी में रह गई सर। आप झुकते गए तो वे झुकाते गए।
सवाल यह है- क्यों झुके इतना?