जब कोई युवा नौकरी की मांग लेकर 206 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठा रहे और फिर दंडवत् प्रणाम करते हुए विधानसभा तक जाने को मजबूर हो जाए तो सवाल केवल भर्ती का नहीं व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी बन जाता है। यदि वास्तव में न्यायालय के आदेश हैं और रिक्त पद मौजूद हैं तो ��ेरी किस बात की है? अगर आदेशों पर अमल नहीं हो रहातो संविधान और न्यायपालिका की गरिमा का क्या अर्थ रह जाता है? दूसरी ओर यदि सरकार के पास कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया जाता? लोकतंत्र में युवाओं को बैरिकेड और पुलिस नहीं संवाद और समाधान मिलना चाहिए। 206 दिनों का संघर्ष किसी भी सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।
@JayManikpuri2 यह रवैया छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन के उलट तानाशाही रवैया को दर्शाता है जो कई महीनो से तपती धूप में अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे अ���्यर्थियों के साथ गलत हुआ है
@JayManikpuri2 बीजेपी सरकार की नाकामी यह दिखाता है कि इनके खुद मुख्यमंत्री जो आदिवासी है और आदिवासी अभ्यर्थी जो दूर दराज बस्तर के संभाग और सरगुजा संभाग से आकर राजधानी नवा रायपुर के Tuta में अपनी जायज मांगो के लिए आंदोलनरत है। लेकिन आजतक इन लोगों की बात नहीं सुनी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा के पोड़ी राछा में जो हुआ, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि डीएड अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या लोकतंत्र में अपनी मांग का पोस्टर दिखाना भी अपराध है? यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मुख्यमंत्री तक पहुंचने की छूट थी, तो बेरोजगार युवाओं के लिए अलग नियम क्यों?
जिन युवाओं ने वर्षों पढ़ाई की कानूनी लड़ाई लड़ी और न्यायालय से राहत हासिल की उन्हें नौकरी के बजाय थाने का रास्ता क्यों दिखाया गया? क्या प्रशासन का काम संवाद स्थापित करना है या असहमति को दबाना? और यदि अभ्यर्थियों ने कोई अपराध नहीं किया था तो उनसे शपथ पत्र लिखवाने की आवश्यकता क्या थी? सरकार और प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, क्योंकि यह मामला केवल 2300 पदों का नहीं, बल्कि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यवस्था ��र उनके भरोसे का भी है।
@satyarajput321@SanjayKuma38469@CGDedBedSangh@CPDBS2 Ded walon ko sirf bhatka re h sabhi mantri log court se nyay milne k bad v sarkar adesh ka palan nahi kr rahi h 2300 pad rikt h fir v niyukti nahi d rahi h 2300 pariwar ka bhavishya khatre m h es nikammi sarkar ki wajah s
"संसद में आरक्षण का ढोंग रचाते हैं,
और छत्तीसगढ़ में बेटियों को नियुक्ति के लिए तरसाते हैं!"2300 सहायक शिक्षक पद पर कोर्ट का ऑर्डर होने के बाद भी ताला क्यों?
मुख्यमंत्री जी, विज्ञापनों से बाहर निकलिए। महिला आरक्षण का ढोंग बंद करिए और कोर्ट के आदेश का सम्मान कीजिए