शामली अलर्ट
जनपद के कैराना। शामली प्रशासन की मिली भगत से मंडावर क्षेत्र में यमुना नदी में खनन माफियाऊ का बड़ा खेल
शामली एनजीटी के नेमियों की उड़ाई जा रही है धजिया यमुना नदी का बीचों-बीच सीना छलनी सरकार के राजस्व की चोरी कर करोड़ों रुपए डकार रहे हैं खनन माफिया शामली प्रशासन कुंभकरण नींद में
मंडावर गांव के किसानों का खनन माफियाऊ पर यमुना की जलधारा मोड़ने का आरोप, किसानों की फसलों को नुकसान मंडावर क्षेत्र के किसान अधिकारियों के चक्कर काट कर थक चुके हैं लेकिन सिर्फ आश्वासन है कार्रवाई कोई नहीं
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यमुना नदी के बीचो-बीच खनन माफिया पोकलैंड मशीन से रेट निकलते हुए और जलधारा मोड़ने की कोशिश करते हुए
NO 2 यमुना नदी में ऑकलैंड मशीन का दृश्य और यमुना नदी के शॉट के साथ चार फाइल मौजूद
शामली जनपद के कैराना। मंडावर क्षेत्र में यमुना नदी में खनन को लेकर किसानों ने खनन ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि पट्टे की आड़ में यमुना नदी के अंदर मशीनों से खनन किया जा रहा है और नदी की प्राकृतिक जलधारा को प्रभावित कर उसका बहाव किसानों के खेतों की ओर मोड़ दिया गया है। इससे खेतों की भूमि में कटाव होने के साथ फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है किसानों के अनुसार, यमुना की धारा का रुख बदलने से नदी का पानी उनके खेतों की ओर पहुंच रहा है। तेज बहाव के कारण कृषि भूमि लगातार कटाव की चपेट में आ रही है। इससे किसानों को फसल बर्बाद होने के साथ भविष्य में भूमि के नुकसान की भी चिंता सता रही है।
किसानों का आरोप है कि मौके पर खनन कार्य में मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि खनन के दौरान नदी की प्राकृतिक स्थिति से छेड़छाड़ की जा रही है। उनका कहना है कि इस संबंध में अधिकारियों को कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ पीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच कराने, यमुना की जलधारा को पूर्व स्थिति में बहाल कराने तथा कृषि भूमि को हो रहे नुकसान को रोकने की मांग की है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
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शामली सहायक नोडल स्वास्थ्य अधिकारी को घेरकर मारने का प्रयास
शामली सहायक नोडल अधिकारी दीपक कुमार के साथ बदसलूकी सरकारी काम में बाधा डालना कपड़े फाड़े और जान से मारने का प्रयास
शामली। शहर के तैमूरशाह स्थित श्री एमएस अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डॉक्टर दीपक के साथ वदहसीलों की कपड़े पड़े और सरकारी गाड़ी से जबरदस्ती खींच गाली गलौज और रात के 8:00 बजे तक जान से मारने की धमकी डॉ दीपक ने सदर कोतवाली में दी तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की अपील जान का खतरा बताकर पुलिस से मांगी सुरक्षा ब्रेकिंग के हिसाब से खबर लिखिएगा इलेक्ट्रॉनिक टीवी की हिंदी में गंभीर संवाद के साथ
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शामली सहायक नोडल स्वास्थ्य अधिकारी को घेरकर मारने का प्रयास
शामली सहायक नोडल अधिकारी दीपक कुमार के साथ बदसलूकी सरकारी काम में बाधा डालना कपड़े फाड़े और जान से मारने का प्रयास
शामली। शहर के तैमूरशाह स्थित श्री एमएस अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डॉक्टर दीपक के साथ वदहसीलों की कपड़े पड़े और सरकारी गाड़ी से जबरदस्ती खींच गाली गलौज और रात के 8:00 बजे तक जान से मारने की धमकी डॉ दीपक ने सदर कोतवाली में दी तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की अपील जान का खतरा बताकर पुलिस से मांगी सुरक्षा ब्रेकिंग के हिसाब से खबर लिखिएगा इलेक्ट्रॉनिक टीवी की हिंदी में गंभीर संवाद के साथ
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शामली जाटों का खून खौल रहा है, तो बीजेपी से बदला ले जाट
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शामली समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता का बड़ा बयान
उन्होंने कहा कि अगर जाटों का खून खौल रहा है, तो हाथरस में जयंत चौधरी पर हुई लाठीचार्ज की घटना का बदला ले जाट
शामली से समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राकेश प्रजापति का जयंत चौधरी को लेकर बड़ा और तीखा बयान सामने आया है। राकेश प्रजापति ने जाट समाज के नाम पर जयंत चौधरी को सीधे 2027 के चुनाव से जोड़ते हुए बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर जाटों का खून खौल रहा है, तो हाथरस में जयंत चौधरी पर हुई लाठीचार्ज की घटना का बदला 2027 के चुनाव में लिया जाए।
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तहसील दिवस के बाद किसान के बेटे ने खुद को लगाई आग, रिश्वत का आरोप via @aajtak https://t.co/Chq4yTN8B5
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शामली तहसील दिवस में डीएम की फटकार के बाद किसान ने खुद को लगाई आग! 10 लाख की कथित मांग का आरोप, सफदरजंग में जिंदगी की जंग वीडियो वायरल पीड़ित पक्ष का dm पर आरोप
शामली में तहसील दिवस के दौरान सिस्टम की कार्यप्रणाली पर ऐसा सवाल खड़ा हुआ है, जिसने पूरे प्रशासन को कटघरे में ला खड़ा किया है। आरोप है कि फरियाद लेकर पहुंचे किसान को डीएम आलोक यादव ने सबके सामने फटकार लगाई और कथित तौर पर कहा कि ज्यादा समस्या बताओगे तो जेल भेज दूंगा। इसके बाद जमीन के विवाद से परेशान किसान के बेटे आदित्य ने पुलिस और राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। आग लगते ही वह पानी से भरे खेत में कूद गया। परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई। युवक करीब 60 से 70 प्रतिशत झुलस गया और अब दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
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सवाल सिर्फ एक युवक के आग लगाने का नहीं है। सवाल उस कथित सरकारी रवैये का है, जिसके चलते फरियाद लेकर पहुंचे परिवार ने खुद को इतना बेबस महसूस किया कि मामला आत्मदाह तक पहुंच गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि तहसील दिवस में अपनी समस्या बताने पहुंचे किसान को डीएम आलोक यादव ने फटकार लगाई। परिवार का दावा है कि किसान को कथित तौर पर जेल भेजने तक की बात कही गई।
मामला शामली जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर गोहरनी गांव का है। यहां 16 बीघा जमीन को लेकर परिवार में वर्ष 2010 से विवाद चल रहा है। वर्ष 2013 में इस विवाद में फैसला भी आया था। इसके बाद जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई।
परिजनों का कहना है कि 30 जून 2026 को राजस्व टीम मौके पर पहुंची और जमीन की पैमाइश की गई। लेकिन मौके पर बनी अस्थायी चारदीवारी के कारण कब्जा नहीं दिलाया जा सका। इसके बाद सोमवार शाम तहसीलदार, कानूनगो अमरीश शर्मा और पुलिसकर्मियों की टीम जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची।
यहीं से विवाद और ज्यादा गहराने का आरोप है। आदित्य के मामा देशपाल सिंह का आरोप है कि परिवार से 10 लाख रुपये की कथित मांग की गई। आरोप है कि रकम नहीं देने पर जमीन की पैमाइश उनके खिलाफ करने और बाउंड्री वॉल गिराने की बात कही गई।
परिजनों का दावा है कि उन्होंने अधिकारियों से कार्रवाई का आदेश दिखाने को कहा। उनका कहना है कि जमीन से जुड़ा मामला एसडीएम कोर्ट में विचाराधीन है और अगली तारीख भी लगी हुई है। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद कार्रवाई की कोशिश की गई।
इसी बीच अचानक आदित्य ने अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल लिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने खुद को आग लगा ली। मौके पर मौजूद पुलिस और राजस्व टीम के सामने युवक आग की लपटों में घिर गया। जान बचाने के लिए वह पानी से भरे खेत में कूद गया। परिजन और मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला और आग बुझाई।
गंभीर रूप से झुलसे आदित्य को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक, उसका शरीर करीब 60 से 70 प्रतिशत तक झुलस गया है। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल डीएम आलोक यादव की कथित फटकार को लेकर उठ रहा है। आखिर तहसील दिवस में फरियाद लेकर पहुंचे किसान के साथ क्या बातचीत हुई? क्या वास्तव में किसान को जेल भेजने की चेतावनी दी गई? क्या जमीन के विवाद में 10 लाख रुपये की कथित मांग की गई? और अगर परिवार की शिकायत सुनी जा रही थी तो मामला आत्मदाह तक कैसे पहुंच गया?
पीड़ित परिवार ने राजस्व विभाग की कार्रवाई और अधिकारियों के रवैये पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। लेकिन युवक का इस तरह गंभीर रूप से झुलस जाना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है।
Byte मामा पीड़ित ka शामली में तहसील दिवस फरियादियों की समस्या सुनने के लिए होता है, लेकिन यहां एक किसान परिवार की फरियाद आग की लपटों में बदल गई। डीएम पर फटकार लगाने और जेल भेजने की कथित धमकी के आरोप हैं, राजस्व विभाग पर 10 लाख रुपये मांगने का गंभीर आरोप है और अब एक युवक सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
Byte सचिन राजपूत एसडीएम सदर का कहना है जमीन मापाई को लेकर राजस्थान हमने भेजी थी उसी को लेकर एक किसान ने आग लगा ली जिसे हमने अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है आगे की जांच जारी है
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शामली के कैराना न्यायालय हत्या के मामले में तीन को उम्र कैद और पिता को 5 साल की सजा
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सोमवार को न्यायालय ने दोषी बर्खास्त सिपाही विक्रांत, उसके भाई अर्जुन और दोस्त मोनू को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा विक्रांत के पिता वीरेंद्र को अपहरण में सहयोग करने के मामले में पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है।
कैराना: करीब सवा चार वर्ष पुराने पिता—पुत्र के दोहरे हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय द्वारा दोषी ठहराए गए बर्खास्त उप्र पुलिस के सिपाही विक्रांत, भाई अर्जुन और दोस्त मोनू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि दोषी पिता को अपहरण में सहयोग करने के मामले में पांच वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई।
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मेरठ के कंकरखेड़ा की न्यू सैनिक बिहार निवासी भूपेंद्र और उनके 20 वर्षीय बेटे अर्जुन की छह अप्रैल 2022 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों के शव कांधला थाना क्षेत्र के गांव सल्फा के जंगल से बरामद हुए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिता—पुत्र के सिर एवं सीने में गोली लगने की पुष्टि हुई थी।
मृतक की मां सुरेश देवी ने कांधला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, भूपेंद्र ने गांव मखमूलपुर निवासी विक्रांत से दो लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में रकम लौटाने को लेकर विवाद बढ़ गया और विक्रांत भूपेंद्र से पांच लाख 80 हजार रुपये की मांग करने लगा। विक्रांत व उसके परिवार के लोगों ने भूपेंद्र, उनके बेटे अर्जुन और सुरेश देवी को मखमूलपुर बुलाया था। आरोप है कि वहां उन्हें बंधक बनाकर मारपीट की गई। इसके बाद सुरेश देवी को रुपये लाने के लिए मेरठ भेज दिया गया। उन्होंने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने के बाद भी आरोपित भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन को अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। थाने ले जाने की बात कही गई, लेकिन आरोप है कि दोनों को सल्फा के जंगल में ले जाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपित विक्रांत, उसके पिता वीरेंद्र, भाई अर्जुन तथा मोनू निवासीगण गांव मखमूलपुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 14 गवाह पेश किए। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद चारों को दोषी करार दिया था। आरोपित विक्रांत उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही था और उसकी तैनाती आइबी के पूर्व निदेशक की सुरक्षा में भी रही थी। हत्याकांड के बाद उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
Storiy Fo सोमवार को न्यायालय ने दोषी बर्खास्त सिपाही विक्रांत, उसके भाई अर्जुन और दोस्त मोनू को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा विक्रांत के पिता वीरेंद्र को अपहरण में सहयोग करने के मामले में पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है।
Byte (बाबा आरोपियों का ) आरोपियों के बाबा का कहना है कि इस जजमेंट से हम संतुष्ट नहीं है हमारा तो बेडगारक हो गया आगे हम हाई कोर्ट अपील करेंगे यह तो हमारे पर झूठा कैसे लगाकर हमें बर्बाद कर दिया है
@CMOfficeUP@PmModi@dgpup
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शामली कलेक्ट्रेट में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, छज्जा भरभराकर गिरा—सरकारी गाड़ी क्षतिग्रस्त
शामली। जनपद की नवनिर्मित कलेक्ट्रेट में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक अधिकारी के कार्यालय के बाहर पार्किंग के लिए बनाया गया छज्जा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। छज्जे के मलबे की चपेट में एक सरकारी गाड़ी, कर्मचारी की बाइक और रोड़ी-डस्ट मिश्रित करने वाली मशीन दबकर क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बताया जा रहा है कि हादसे के समय सरकारी वाहन का चालक आसपास ही मौजूद था। अचानक छज्जे को गिरता देखकर चालक ने समय रहते वहां से हटकर अपनी जान बचाई। कुछ ही क्षणों में निर्माण का हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया और मौके पर मलबा फैल गया।
नवनिर्मित कलेक्ट्रेट में निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
हादसे ने नवनिर्मित कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी समेत जिले के तमाम बड़े अधिकारी बैठते हैं, उसी परिसर में निर्माण का छज्जा इस तरह गिर जाना अपने आप में चिंता का विषय है।
सवाल यह भी है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप कराया गया था तो छज्जा अचानक भरभराकर कैसे गिर गया? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी? क्या निर्माण के दौरान तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों ने मौके पर निरीक्षण किया था? और सबसे बड़ा सवाल—इस निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
‘कमीशन’ की चर्चा ने बढ़ाए सवाल
हादसे के बाद लोगों के बीच निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। बिना जांच किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल यह जरूर है कि करोड़ों रुपये की सरकारी इमारतों में निर्माण गुणवत्ता की निगरानी का सिस्टम इतना कमजोर क्यों है कि नई बनी इमारत का हिस्सा ही गिरने लगे?
हादसा हुआ तो जांच के पाले में डाल दी जाएगी गेंद?
सरकारी निर्माण में गड़बड़ी सामने आने के बाद अक्सर सबसे पहले जांच की घोषणा होती है। जांच समिति बनती है, रिपोर्ट मांगी जाती है और मामला फाइलों में चला जाता है। इसके बाद आम जनता को यही पता नहीं चलता कि जांच कब हुई, किसने की और रिपोर्ट में क्या निकला।
यही वजह है कि इस मामले में भी सिर्फ जांच की औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने वाली निष्पक्ष जांच की जरूरत है। जांच में निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, संबंधित इंजीनियर और गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।
बाल-बाल बची जान, वरना हो सकता था बड़ा हादसा
जिस जगह छज्जा गिरा, वहां सरकारी वाहन और कर्मचारी की बाइक मौजूद थी। यदि हादसे के वक्त कोई व्यक्ति ठीक नीचे खड़ा होता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। गनीमत रही कि समय रहते चालक वहां से हट गया और कोई जनहानि नहीं हुई।
यह हादसा चेतावनी भी है कि सरकारी भवनों में सिर्फ उद्घाटन और चमक-दमक पर्याप्त नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और नियमित निरीक्षण भी उतने ही जरूरी हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में महज ‘जांच के पाले में गेंद’ डालकर जिम्मेदारी से बचता है या फिर निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराकर दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई करता है।
फिलहाल सवाल बड़ा है—नवनिर्मित कलेक्ट्रेट का छज्जा गिरा है तो क्या जिले की दूसरी सरकारी इमारतों के निर्माण की भी जांच होगी?
@cmofficeup
@myogioffce @dgpup@dm_shamli@PmModi@RahulGandhi@yadavakhilesh@SanjayAzadSln
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शामली कलेक्ट्रेट में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, छज्जा भरभराकर गिरा—सरकारी गाड़ी क्षतिग्रस्त
शामली। जनपद की नवनिर्मित कलेक्ट्रेट में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक अधिकारी के कार्यालय के बाहर पार्किंग के लिए बनाया गया छज्जा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। छज्जे के मलबे की चपेट में एक सरकारी गाड़ी, कर्मचारी की बाइक और रोड़ी-डस्ट मिश्रित करने वाली मशीन दबकर क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बताया जा रहा है कि हादसे के समय सरकारी वाहन का चालक आसपास ही मौजूद था। अचानक छज्जे को गिरता देखकर चालक ने समय रहते वहां से हटकर अपनी जान बचाई। कुछ ही क्षणों में निर्माण का हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया और मौके पर मलबा फैल गया।
नवनिर्मित कलेक्ट्रेट में निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
हादसे ने नवनिर्मित कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी समेत जिले के तमाम बड़े अधिकारी बैठते हैं, उसी परिसर में निर्माण का छज्जा इस तरह गिर जाना अपने आप में चिंता का विषय है।
सवाल यह भी है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप कराया गया था तो छज्जा अचानक भरभराकर कैसे गिर गया? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी? क्या निर्माण के दौरान तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों ने मौके पर निरीक्षण किया था? और सबसे बड़ा सवाल—इस निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
‘कमीशन’ की चर्चा ने बढ़ाए सवाल
हादसे के बाद लोगों के बीच निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। बिना जांच किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल यह जरूर है कि करोड़ों रुपये की सरकारी इमारतों में निर्माण गुणवत्ता की निगरानी का सिस्टम इतना कमजोर क्यों है कि नई बनी इमारत का हिस्सा ही गिरने लगे?
हादसा हुआ तो जांच के पाले में डाल दी जाएगी गेंद?
सरकारी निर्माण में गड़बड़ी सामने आने के बाद अक्सर सबसे पहले जांच की घोषणा होती है। जांच समिति बनती है, रिपोर्ट मांगी जाती है और मामला फाइलों में चला जाता है। इसके बाद आम जनता को यही पता नहीं चलता कि जांच कब हुई, किसने की और रिपोर्ट में क्या निकला।
यही वजह है कि इस मामले में भी सिर्फ जांच की औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने वाली निष्पक्ष जांच की जरूरत है। जांच में निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, संबंधित इंजीनियर और गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।
बाल-बाल बची जान, वरना हो सकता था बड़ा हादसा
जिस जगह छज्जा गिरा, वहां सरकारी वाहन और कर्मचारी की बाइक मौजूद थी। यदि हादसे के वक्त कोई व्यक्ति ठीक नीचे खड़ा होता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। गनीमत रही कि समय रहते चालक वहां से हट गया और कोई जनहानि नहीं हुई।
यह हादसा चेतावनी भी है कि सरकारी भवनों में सिर्फ उद्घाटन और चमक-दमक पर्याप्त नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और नियमित निरीक्षण भी उतने ही जरूरी हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में महज ‘जांच के पाले में गेंद’ डालकर जिम्मेदारी से बचता है या फिर निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराकर दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई करता है।
फिलहाल सवाल बड़ा है—नवनिर्मित कलेक्ट्रेट का छज्जा गिरा है तो क्या जिले की दूसरी सरकारी इमारतों के निर्माण की भी जांच होगी?
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शामली में पुलिस के सामने बाइकों का सैलाब, खुले साइलेंसरों की गूंज से गूंजा शहर!
शिव चौक पर नियम-कायदों की उड़ती धज्जियां, भीड़ के बीच जाम में फंसी ट्रैफिक पुलिस की जीप; व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन के दावों पर उठे सवाल
शामली। कांवड़ यात्रा और श्रावण माह के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर शामली पुलिस प्रशासन भले ही अपनी तैयारियों के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन रविवार को नगर में दिखाई दिया बाइक सवार युवकों का सैलाब इन दावों की पोल खोलता नजर आया।
शामली नगर से बड़ी संख्या में युवक बाइकों पर सवार होकर निकले। आरोप है कि कई बाइकों के साइलेंसर खुले हुए थे और तेज आवाज में बाइकें दौड़ाई जा रही थीं। सड़कों पर सैकड़ों युवकों की भीड़ के बीच यातायात नियमों की जमकर अनदेखी होती दिखाई दी।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाला नजारा शिव चौक पर देखने को मिला। भीड़ और बाइकों की भारी संख्या के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती नजर आई। इसी दौरान ट्रैफिक पुलिस की जीप भी जाम में फंस गई। सवाल यह उठता है कि जब पुलिस की अपनी गाड़ी भी जाम में फंस रही थी, तो आम राहगीरों और वाहन चालकों की स्थिति क्या रही होगी?
पुलिस की मौजूदगी में नियमों की अनदेखी!
शहर में पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यदि खुले साइलेंसर, तेज आवाज और भारी भीड़ के बीच बाइकें दौड़ती रहें तो यातायात व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार यातायात व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इसके उलट दिखाई देती है।
कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को लेकर कई तरह की तैयारियां और रूट डायवर्जन की बातें की हैं। ऐसे में नगर के प्रमुख चौराहे पर इस तरह का जाम और बाइकों की भीड़ पुलिस की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है।
ट्रैफिक पुलिस की जीप ही फंसी तो व्यवस्था किसके भरोसे?
शिव चौक पर ट्रैफिक पुलिस की जीप का जाम में फंसना इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया। जिस पुलिस पर शहर की यातायात व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी है, उसी की गाड़ी भीड़ में फंसी नजर आई। ऐसे में राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित कौन कर रहा था?
अब जरूरत इस बात की है कि पुलिस प्रशासन केवल कागजी तैयारियों और दावों तक सीमित न रहे, बल्कि सड़कों पर भी प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे। खुले साइलेंसर, तेज आवाज, लापरवाही से बाइक चलाने और यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को परेशानी से राहत मिल सके।
@CMOfficeUP@myogioffice@dgpup@dgpup@adgzonemeerut@shamlipolice@dm_shamli
शामली: कैराना में बीच सड़क दबंगों का तांडव! कार सवार युवक पर ईंटों से हमला, वायरल वीडियो के बाद पुलिस पर उठे सवाल
कैराना (शामली)। जनपद शामली के कैराना कस्बे में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आधा दर्जन युवक बीच सड़क पर एक कार सवार युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में ईंटों से हमला, गाली-गलौज और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि घटना कैराना के ईदगाह रोड की है। पीड़ित युवक की पहचान तीतरवाड़ा निवासी वसीम के रूप में बताई जा रही है। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार मारपीट करने वालों को एक गैंग से जुड़े युवक बताया जा रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक वायरल वीडियो करीब दस दिन पुराना बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में चर्चा है कि यदि घटना इतनी गंभीर थी तो अब तक आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। इसी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
वीडियो में कथित तौर पर हमलावर खुलेआम गाली-गलौज करते और युवक पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। बीच सड़क हुई इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। हालांकि इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यह आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
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शामली: कैराना में बीच सड़क दबंगों का तांडव! कार सवार युवक पर ईंटों से हमला, वायरल वीडियो के बाद पुलिस पर उठे सवाल
कैराना (शामली)। जनपद शामली के कैराना कस्बे में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आधा दर्जन युवक बीच सड़क पर एक कार सवार युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में ईंटों से हमला, गाली-गलौज और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि घटना कैराना के ईदगाह रोड की है। पीड़ित युवक की पहचान तीतरवाड़ा निवासी वसीम के रूप में बताई जा रही है। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार मारपीट करने वालों को एक गैंग से जुड़े युवक बताया जा रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक वायरल वीडियो करीब दस दिन पुराना बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में चर्चा है कि यदि घटना इतनी गंभीर थी तो अब तक आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। इसी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
वीडियो में कथित तौर पर हमलावर खुलेआम गाली-गलौज करते और युवक पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। बीच सड़क हुई इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। हालांकि इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में यह आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
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शामली में अपराधियों का तांडव, पुलिस सिर्फ "जांच जारी है" कहकर झाड़ रही पल्ला!
एक हफ्ते में हत्या, दहेज मौत, लूट, चेन स्नेचिंग और जेबकतरी से दहला जिला, बदमाश बेखौफ—पुलिस के हाथ अब भी खाली
शामली। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार लगातार सख्ती के दावे कर रही है, लेकिन शामली जिले में बीते एक सप्ताह के दौरान हुई लगातार आपराधिक घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या, दहेज उत्पीड़न में युवती की मौत, दिनदहाड़े लूट, चेन स्नेचिंग, जेबकतरी और सरेराह मारपीट जैसी घटनाओं ने आम लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकांश मामलों में आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
चार दिन पहले शामली रोडवेज बस स्टैंड पर एक पूर्व प्रधान की जेब से जेबकतरों ने दिनदहाड़े 30 हजार रुपये निकाल लिए। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के बावजूद पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है।
इसी बीच मंदिर में पूजा कर घर लौट रही एक महिला से बाइक सवार बदमाशों ने चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
शनिवार को जिले में उस समय सनसनी फैल गई जब एक कबड्डी खिलाड़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोगों ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए।
उधर, जिले में दहेज उत्पीड़न का भी एक दर्दनाक मामला सामने आया। एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मायके पक्ष का आरोप है कि बुलेट मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर ससुराल पक्ष ने उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इसके अलावा दिनदहाड़े एक बाइक सवार युवक के साथ सड़क पर मारपीट कर उसकी चेन लूट ली गई। घटना के बाद बदमाश आराम से फरार हो गए और पुलिस सिर्फ जांच की बात करती रही।
इन लगातार वारदातों के बाद लोगों का आरोप है कि जिले में अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जबकि पुलिस हर घटना के बाद एक ही जवाब देती है—"टीमें गठित कर दी गई हैं, दबिश दी जा रही है, आरोपी जल्द गिरफ्तार होंगे।" लेकिन कई मामलों में एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ खाली हैं।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही घटनाओं से लोगों में भय का माहौल है। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आमजन का पुलिस पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
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शामली में बेखौफ बदमाशों का आतंक! लूट, चोरी और हमलों की वारदातों से दहशत, पुलिस के हाथ अब भी खाली
शामली। जनपद शामली में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में लूट, चोरी और महिलाओं पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कई मामलों में अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे लोगों में भय और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी का माहौल है।
ताजा मामला गुरुवार सुबह सदर कोतवाली क्षेत्र के दयानन्द नगर का है, जहां सुबह करीब पांच बजे मंदिर में पूजा-अर्चना कर घर लौट रही एक महिला पर अज्ञात बदमाश ने हमला कर दिया। आरोपी ने महिला के कानों के कुंडल और गले की चेन लूटने का प्रयास किया, लेकिन महिला के शोर मचाने पर वह मौके से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों मैं घटना कैद हो गई जिले की पुलिस के हाथ खाली
इस घटना से 2 दिन पहले रोडवेज बस स्टैंड पर दिनदहाड़े जेबकतरों ने एक पूर्व प्रधान की जेब से ₹30,000 की नकदी पार कर दी थी। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं।
वहीं दूसरी घटना में स्कूटी सवार से मारपीट कर उसकी चेन और नगदी लूट ली गई। इस वारदात ने भी शहर में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है
उधर बाबरी थाना क्षेत्र के ललोन खेड़ी करमू गांव में बीती रात एक महिला पर तेजाब फेंकने की सनसनीखेज घटना सामने आई। तेजाब से झुलसी महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इसके अलावा सदर कोतवाली और बाबरी क्षेत्र में पिछले दिनों करीब दो दर्जन नलकूपों से स्टार्टर, केबल, मोटर और तांबे के तार चोरी होने की घटनाएं भी सामने आई थीं। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद आज तक चोरी की घटनाओं का खुलासा नहीं हो सका और चोर खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं से जिले में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि पुलिस कई चर्चित मामलों में अब तक कोई ठोस सफलता हासिल नहीं कर सकी है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से रात्रि गश्त बढ़ाने, अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी और जिले में कानून व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
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शामली में दिनदहाड़े जेब कटी, रात में नलकूप साफ... आखिर कहां सो रही है शामली पुलिस?
शामली। जनपद में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के बीचों-बीच दिनदहाड़े रोडवेज बस स्टैंड पर पूर्व प्रधान की जेब से ₹30,000 की नकदी पार कर दी गई, जबकि दूसरी ओर सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव कुंडाना के जंगलों में चोरों ने दर्जनभर नलकूपों को निशाना बनाकर स्टार्टर, तांबे के तार और अन्य उपकरण चोरी कर लिए। दोनों घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली घटना में कांधला क्षेत्र के गांव निवासी पूर्व प्रधान रोडवेज बस स्टैंड पर मौजूद थे। इसी दौरान जेबकतरों ने उनकी जेब से ₹30,000 की नकदी उड़ा दी और भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो गए। राहत की बात यह रही कि पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। फुटेज मिलने के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है।
उधर, दूसरी घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव कुंडाना के जंगलों की है, जहां करीब दस दिन पहले चोरों ने एक साथ दर्जनभर नलकूपों पर धावा बोल दिया था। बदमाश स्टार्टर, तांबे के तार और अन्य कीमती उपकरण चोरी कर ले गए। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन दस दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
स्थानीय लोगों और किसानों का आरोप है कि पुलिस केवल जांच का दावा कर रही है, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। उनका कहना है कि लगातार हो रही चोरी और जेबकतरी की घटनाओं से आम लोगों में डर का माहौल है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
अब दोनों मामलों में लोगों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। सवाल यह है कि सीसीटीवी फुटेज होने और कई दिन बीत जाने के बावजूद आखिर अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं?
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शामली में अपराधियों और दहशतगर्दो के हौसले बुलंद! भू-माफिया, फायरिंग और चोरी की वारदातों पर सवालों के घेरे में पुलिस, किसानों में बढ़ा आक्रोश
शामली। जनपद शामली में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। थाना भवन क्षेत्र में भू-माफियाओं, दबंगों और अपराधियों के सक्रिय होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफेद पोस् और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और कॉलोनियां विकसित किए जाने का खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि कब्रिस्तान, बंजर भूमि और नदी-नालों की सरकारी जमीनों को अधिकारियों की मिलीभगत से निजी संपत्ति में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
क्षेत्र में पूर्व में हुई कई घटनाओं का भी लोग हवाला दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो सवारों पर हुई फायरिंग और रेती मोहल्ले में दिनदहाड़े मारपीट व अवैध तमंचों से फायरिंग की घटना ने इलाके में दहशत फैला दी थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन मामलों में प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई, उनको क्लीन चिट देकर बाहर निकाल दिया जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया गया।
उधर, सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव कुंडाना में करीब दस दिन पहले आधा दर्जन से अधिक किसानों के नलकूपों से स्टार केबल और तांबे के तार चोरी होने की घटनाओं का अब तक खुलासा नहीं हो सका है। लगातार हुई चोरियों से किसान परेशान हैं और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
घटनाओं के बाद भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और किसानों ने सदर कोतवाली पहुंचकर प्रदर्शन किया था। किसानों ने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि दस दिनों के भीतर चोरी की घटनाओं का खुलासा नहीं हुआ और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच शामली में अपराध और अवैध गतिविधियों को लेकर उठ रहे सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो अपराधियों के हौसले और बढ़ सकते हैं।
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