श्री हनुमान जी महाराज जी की प्रातः कालीन शुभ मंगला श्रृंगार आरती दर्शन।
श्री हनुमानगढ़ी अयोध्याधामजी।
दिनांक~ 30/05/2026 दिन- शनिवार
श्री हनुमान जी महाराज सबके सकल मनोरथ सिद्ध करें।।
🌺जय बजरंगबली।🌺
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर के परकोटा के वायव्य कोण पर बने मां भगवती मंदिर के शिखर पर पूज्या साध्वी ऋतंभरा जी ने दुर्गा वाहिनी की पदाधिकारी बहनों के साथ ध्वाजारोहण किया।
इस अवसर पर न्यासीगण, वरिष्ठ पदाधिकारी, अपर संख्या में मातृशक्ति और विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
At the north-western corner of the outer precinct of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra complex, Pujya Sadhvi Ritambhara Ji, along with office-bearer sisters of the Durga Vahini, hoisted the sacred dhwaja atop the shikhara of the Maa Bhagwati Mandir.
On this occasion, trustees, senior office-bearers, a large gathering of women devotees, and other distinguished guests were present.
जघानाथासुरान्वीरो रामसैन्यं ररक्ष सः।
शक्तिक्षतं लक्ष्मणं च संजीविन्या ह्यजीवयत्॥
ज्येष्ठ मास के चतुर्थ मंगलवार ‘बड़ा मंगल’ के पावन पर्व पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
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॥सुंदर कांड॥
रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ। नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरष कपिराई॥
भावार्थ- वह महल श्री रामजी के आयुध (धनुष-बाण) के चिह्नों से अंकित था, उसकी शोभा वर्णन नहीं की जा सकती। वहाँ नवीन-नवीन तुलसी के वृक्ष-समूहों को देखकर कपिराज श्री हनुमान जी हर्षित हुए॥
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॥सुंदर कांड॥
गरुड़ सुमेरु रेनु सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही॥
अति लघु रूप धरेउ हनुमाना। पैठा नगर सुमिरि भगवाना॥
भावार्थ- और हे गरुड़जी! सुमेरु पर्वत उसके लिए रज के समान हो जाता है, जिसे श्री रामचंद्रजी ने एक बार कृपा करके देख लिया। तब हनुमान जी ने बहुत ही छोटा रूप धारण किया और भगवान का स्मरण करके नगर में प्रवेश किया॥
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॥सुंदर कांड॥
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
भावार्थ-अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखे हुए नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए। उसके लिए विष अमृत हो जाता है, शत्रु मित्रता करने लगते हैं, समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है।
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॥सुंदर कांड॥
बिकल होसि तैं कपि कें मारे। तब जानेसु निसिचर संघारे॥तात मोर अति पुन्य बहूता। देखेउँ नयन राम कर दूता॥
भावार्थ- जब तू बंदर के मारने से व्याकुल हो जाए, तब तू राक्षसों का संहार हुआ जान लेना। हे तात! मेरे बड़े पुण्य हैं, जो मैं श्री रामचंद्रजी के दूत (आप) को नेत्रों से देख पाई॥
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मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई
:आलोक कुमार (@AlokKumarLIVE), सीनियर एडवोकेट, (अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद् )
भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तमिलनाडु और बंगाल में हिन्दू मंदिरों का व्यापक सर्वेक्षण हुआ था। इस सर्वेक्षण से मालुम पड़ा कि लगभग सब हिन्दू मंदिरों में छोटा या बड़ा गुरुकुल और गौ-शाला थी। समाज अपने उत्सव जैसे नवरात्री और दीपावली इत्यादि मिलकर मंदिरों में मनाता था। परिवारों के शादी, मुंडन, शोकसभा जैसे सब कार्यक्रम भी मंदिरों में होते थे। समाज के झगड़े भी मंदिर में गर्भगृह की साक्षी में समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा निपटाएं जाते थे।
अंग्रेजों ने समझ लिया कि हिन्दू धर्म के प्राण मंदिरों में बसते हैं। अंग्रेज सरकारों ने मंदिरों का प्रबंधन सुशासन के नाम पर अपने हाथों में ले लिया। धीरे-धीरे अब मंदिर केवल व्यक्तिगत पूजा के स्थान बन रहे हैं। इससे हिन्दू धर्म कमजोर हो रहा है।
सरकार गुरुद्वारे, चर्च, मस्जिद, जैन-स्थानक और बौद्ध-विहार नहीं चलाती। भारत का शासन संविधान की मर्यादा में धर्मनिरपेक्ष है। फिर भी अनेक राज्यों में सरकारें हिन्दू मंदिरों को अपने मुट्ठी में क्यों दबाये हुए हैं। मंदिरों के चढ़ावे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में जाता है। मंदिरों में सरकार के ऑफिसर कार्यकारी अधिकारी के नाते लगा दिए जाते है और उनका वेतन और भत्ते मंदिर की आय में से लिए जाते है। मंदिरों और मठों का नियंत्रण मठाधिपति या धार्मिक संत इत्यादि के हाथों में न रहकर इन बाबुओं के हाथ में रहता है।
हिन्दू समाज ने निर्णय किया है कि वह अपने मंदिरों का नियंत्रण सरकार के हाथों से वापस लेगा। समाज ने यह भी निर्णय किया कि हिन्दू मंदिरों का पैसा हिन्दुओं के लिए ही खर्च होना चाहिए।
इस उद्देश्य से पूज्य स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सन 2012 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका डाल कर कहा कि सरकार हिन्दू मंदिरों का सञ्चालन वापिस हिन्दू समाज को सौंपें। यह याचिका मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना और पुडुचेरी के सन्दर्भ में लगायी गयी थी। इसमें सरकारों को नोटिस हुआ और उनका जवाब रिकॉर्ड पर आया। कई बार इस याचिका में बहस के लिए तारीख निश्चित हुई पर किसी न किसी कारण से टलती गयी।
अंततः अप्रैल 2025 को यह मामला न्यायालय के समक्ष रखा गया। प्रतिपक्षी वकीलों ने कहा कि इस याचिका में कई राज्यों के कानूनों को चुनौती दी गयी है। यह सब कानून एक जैसे नहीं हैं। मांग की गयी कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को ख़ारिज करके याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने राज्य में इन कानूनों को चुनौती देने की छूट दे दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करके 13 साल से लंबित यह याचिका ख़ारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका को ख़ारिज करने के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका करने का आग्रह किया। इस प्रक्रिया में समय लगा। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सोमवार 18 मई 2026 के आदेश में यह स्वीकार किया कि इस याचिका को गुण-दोष के आधार पर सुना जाना आवश्यक है। कोर्ट ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके द्वारा इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था।
अब यह विषय जुलाई में सुनवाई के लिए नियत किया गया है। हिन्दू अपने मंदिरों का स्वयं सञ्चालन करें और मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो। हिन्दुओं का पैसा हिन्दुओं के काम में आये। हिन्दू मंदिर स्वाधीन होने पर हिन्दू का संगठन, उसकी तेजस्विता और संस्कार युक्त जीवन पुनः अपने समाज को प्राप्त हो। मुकदमे में तथ्य और तर्क हमारे साथ हैं। श्री भगवान के आशीर्वाद से हम न्यायालय में सफल होंगे।