स्पष्टीकरण एवं खेद : ABP नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक ख़बर प्रसारित की गई, जो तथ्यों के आधार पर ग़लत पाई गई. इस त्रुटिपूर्ण प्रसारण के लिए हमें खेद है, हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं.
BJP's record in Goa: 15 years of misrule and loot. 15 years of chori.
Land chori. Paisa chori. Jobs chori. MLA chori. And above all, vote chori.
Together, let's tell the BJP: Goa is not for sale. Goa belongs to its people.
Tomorrow, 18 October, I will walk with you in the Goy Rakhonn (Save Goa) Yatra to defend Goa's identity, dignity and future.
Join me at 3:30 PM at Calconda.
यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचना और निजी अंगों पर हमला - लोकतंत्र के लिए आवाज़ उठाने वाली छात्राओं और महिलाओं के साथ दिल्ली पुलिस की बर्बरता शर्मनाक हदें पार कर रही है।
यह सब आवाज़ों को दबाने की उस साजिश का हिस्सा है, जिसमें इतना डरा दो, इतना अपमानित करो कि कोई दोबारा सवाल उठाने की हिम्मत ही न करे।
मोदी-शाह जानते हैं कि जिस दिन सत्ता हाथ से गई, उस दिन उनकी मनमानी की कहानी खत्म। उनका यही डर पुलिस तक पहुँचता है और हिंसा बनकर देश के युवाओं और महिलाओं पर टूट रहा है।
राष्ट्रपति महोदया,
19 साल की अंकिता भंडारी ने एक VIP के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई। चार साल बाद भी CBI की धीमी जांच के चलते यह सवाल बना हुआ है कि वो VIP कौन था।
अंकिता के परिवार समेत कई लोग मानते हैं कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी सिक्किम के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति से मैं स्तब्ध हूं। राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं हो सकती।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने साबित किया है कि महिलाओं की सुरक्षा की उन्हें बिल्कुल परवाह ही नहीं है।
मैं आपसे अपील करता हूं कि सरकार को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार न देने की सलाह दें।
अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए।
पंजाब में नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना अब जानलेवा हो गया है। और यह भगवंत मान की AAP सरकार के राज में हो रहा है।
मानसा: 'नशा रोको, रोज़गार दो' अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा को दिनदहाड़े गोली मार दी गई जो एक फ़ेसबुक लाइव पर साफ़ दिखी।
संगरूर - मुख्यमंत्री का अपना ज़िला: मज़दूर गुलज़ार सिंह ने मंत्री के सामने गाँव में नशे का सवाल उठाया। परिवार का आरोप है कि उसके बाद उन पर माफ़ी माँगने का दबाव डाला गया। उन्होंने अपनी जान दे दी।
संगरूर: नशे के ख़िलाफ़ बोलने वाले मोहनजीत सिंह पर हिरासत में यातना के आरोप - मामला अब हाईकोर्ट में है।
और झोटा की कहानी में एक बात और है। जब उन्होंने शिकायत की, तो FIR हुई और पुलिस ने बाद में झोटा को भी बुक कर दिया।
जिस सरकार में शिकायत करने वाला भी मुलज़िम बन जाए, वहाँ नशे के सौदागर बेख़ौफ़ क्यों न हों?
CM भगवंत मान जवाब दें: नशे के ख़िलाफ़ लड़ने वालों की हिफ़ाज़त कौन करेगा?
पंजाब के युवाओं का भविष्य तबाह करने वाले इस नशे के साम्राज्य को ख़त्म किए बिना कांग्रेस चैन से नहीं बैठेगी।
चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम ज़रूर मिला।
जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है - उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती।
आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, India Gate पर बैठे हैं।
मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं - उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।
#JusticeForAnkitaBhandari