महिला सम्मान से कोई समझौता नहीं! 🛑
बेमेतरा (छत्तीसगढ़) में बैठकों के दौरान महिला कर्मचारियों के साथ हो रहा अशोभनीय व्यवहार अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है। कार्यस्थल पर ऐसी प्रताड़ना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हमारी मांगें:
📌 CMHO बेमेतरा पर निष्पक्ष जांच हो और उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए!
📌 महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
📢 बड़ा आंदोलन:
अन्याय और दुर्व्यवहार के विरोध में 18 अगस्त 2026 को CMHO कार्यालय, बेमेतरा का घेराव किया जाएगा!
चलो बेमेतरा! एकजुट हों, आवाज़ उठाएं, न्याय के लिए संघर्ष करें! ✊
#CHO #CHOUnion #Bemetara #Chhattisgarh #WomenSafety #CMHO_Bemetara_Hatao
@PMOIndia@JPNadda@drramansingh@ChhattisgarhCMO@ShyamBihariBjp@vijaysharmacg@ArunSao3@DPRChhattisgarh@IBC24News@ZeeNews@ANI
वो किसी की बेटी है… किसी की बहन है… किसी की माँ है।
लेकिन कार्यस्थल पर वह सबसे पहले एक कर्मचारी है—और एक इंसान है।
उसे भी अधिकार है कि वह बिना डर काम करे,
बिना अपमान के अपनी बात कहे,
और बिना असहज हुए अपने कार्यस्थल पर खड़ी हो।
CHO की बात सिर्फ CHO की बात नहीं है।
यह उस हर महिला की बात है जो अपने सम्मान के साथ काम करना चाहती है।
हम किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रहे।
हम सिर्फ इतना चाहते हैं—
आवाज़ सुनी जाए।
शिकायत की निष्पक्ष जाँच हो।
दोषी हो तो कार्रवाई हो।
और हर कर्मचारी की गरिमा सुरक्षित रहे।
क्योंकि न्याय तभी सार्थक है, जब कमजोर व्यक्ति भी बिना डर अपनी बात कह सके।
सम्मान कोई एहसान नहीं—हर इंसान का अधिकार है।
#CHOUnionChhattisgarh #WomenSafety #WorkplaceDignity #Justice #Equality #CHO
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@narendramodi CGnhm कर्मियों के तरफ खून से लिखित जन्मदिन की बधाई,महोदय से अनुरोध है कि मोदी की गारंटी के तहत nhm संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण की वादे को पूरा करे
CGNHM कर्मचारियों की ओर से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं,महोदय से अनुरोध है किCG सरकारNHMकर्मचारियों की सुध नहीं लेरही विगत 30दिनों से हम अपनी मांगों कोलेकर हड़तालमें है महोदय से अनुरोध है कि इसमें हस्तक्षेप कर निराकरण करे@ChhattisgarhCMO@PMOIndia
"हड़ताल की मार: आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ताला,ग्रामीणों की सेहत पर खतरा! 🚫 गाँवों में स्वास्थ्य सेवाएँ ठप होने से मरीज़ों को हो रही भारी असुविधा। इलाज के अभाव में लोग परेशान, इस असुविधा के लिए खेद है🙏। कब तक चलेगा यह संकट?@PMOIndia@JPNadda@RahulGandhi@ChhattisgarhCMO@ANI
गर्भवती माताओं को हड़ताल के कारण नियमित स्वास्थ्य जाँच के लिए जिला अस्पताल तक की यात्रा में हो रही असुविधा के लिए हम खेद व्यक्त करते हैं। कृपया हमारी न्यायोचित मांगों को शीघ्रता से पूरा करें, ताकि माताओं, बच्चों और आम जनता को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। 🙏@JPNadda@ANI
जिन NHM स्वास्थ्य कमर्चारियों को सरकार ने कोरोना जैसे महामारी के समय में वॉरियर्स का दर्ज दिया,तमाम बड़े वादे किए आज उन वादों को सरकार भूल चुकी है।लेकिन कब तक हम इस संविदा की भेट चढ़े,निवेदन है सरकार से की हमारी मांगे जायज है, जिसे सरकार पूरा करे. #Cmochhattisgarh#pmo#JPNadda
प्रांत अध्यक्ष की बर्खास्तगी सिर्फ एक कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय के विश्वास पर किया गया प्रहार है। हड़ताल हमारा जवाब है जो बताता है कि हमारे साथियों का आक्रोश सत्ता के तख्त को हिलाने की ताकत रखता है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा,यह आग ठंडी नहीं होगी यह लड़ाई रुकेगी नही!
ये राजनीति का सबसे गंदा चेहरा है।
सरकार ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर गए सभी NHM संविदा कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने का आदेश दिया गया है। आदेश नहीं मानने पर बर्खास्त करने की चेतावनी सरकार ने दी है।
जब NHM कर्मचारियों ने 160 बार से अधिक बार ज्ञापन दिया तब सरकार उनकी बात गंभीरता से क्यों नहीं लिया?
काश इतनी तत्परता अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए वादे को पूरा करने में दिखाते है, विपक्ष में थे तब इन्हीं संविदा कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन और हड़ताल अच्छे लगते थे। तब संविदा कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन और हड़ताल में जा-जाके रोटियां सेंकते थे। तब इन्हीं संविदा कर्मचारियों की चिंता और हमदर्दी जताया करते थे।
अब जब चुनाव जीत गये हैं, सरकार को 2 साल होने वाले हैं तो और जब संविदा कर्मचारी आपके घोषणापत्र में किये वादे ( मोदी की गारंटी ) और अपने हक के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं तो यही संविदा कर्मचारी सरकार की नजरों में चुभने लगे हैं।
जब विपक्ष में थे तब वर्तमान मुख्यमंत्री @vishnudsai, वर्तमान उप मुख्यमंत्री @ArunSao3, वर्तमान वित्तमंत्री @OPChoudhary_Ind संविदा कर्मचारियों के प्रति बहुत हमदर्दी थी, संविदा कर्मचारियों की बहुत चिंता होती थी। विधानसभा चुनाव में जिन संविदा कर्मचारियों भर-भर के वोट दिया, यही संविदा कर्मचारी अब तुच्छ लगने लगे हैं।
यही राजनीति, यहाँ वादों और जुबान की कोई कीमत नहीं और घोषणापत्र तो सबसे बड़ा झूठ है, अगर ऐसे ही राजनीतिक पार्टियाँ और नेता लोग अपने वादों और चुनावी घोषणा पत्र से पलटने लगे तो अगले विधानसभा चुनाव में इस घोषणापत्र को छत्तीसगढ़ की जनता गंभीरता से नहीं लेने वाली।
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