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फ़न-ए-शायरी भी आज बे असर हो गई,
तेरी ख़ामोशी ही दासतां-ए-असर हो गई
मिसरे मतले की बातें अब किस से करे,
तू जो नहीं है , ज़िंदगी बे-बहर हो गई
अंजाम-ए-वफ़ा पर कभी ग़ौर न किया,
इश्क़ की राह में खुद दर-ब-दर हो गई
#sona_writes#बज़्म
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माना इश्क़ की राह में अंजाम दर्द ही दर्द है मगर ,
दुनिया भर की उदासी मुझसे नहीं सँभाली जाएगी
ख़ुदा का वास्ता दिया है आज कलम को मैने
की ये आख़िरी ग़ज़ल है, बा-कमाल लिखी जाएगी
#sona_writes#बज़्म
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I thought we needed every word,
Till I learned that the silence heard
The brilliant message you impart,
Is merely noise that breaks the heart.
#sona_writes#बज़्म
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ये जो दीवार है तासीर-ए-नज़र तोड़ डाली जाएगी,
ज़िंदगी अब हलक से खींचकर निकाली जाएगी
हम ने अल्फ़ाज़ की पर्दा-दारी थी बहुत देखी,
ख़ामोशी भी अब इक वज़्न से पाली जाएगी
मेरे ख़्वाबों पर भी हुक़ूमत अब से अंधेरों की होगी
अब कोई रात वहां रोशनी नहीं डाली जाएगी
#sona_writes#बज़्म
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सारे मंज़र का असर अक्स-ए-नज़र यार में है
तेरी ख़ुशबू तो किसी और बशर यार में है
दिल को तन्हा न समझ शहर की ख़ामोशी में,
इक ज़माना मिरे अंदर दौर-ए-सफ़र यार में है
#sona_writes#बज़्म