इस तरह का व्यंग्यात्मक पत्र सोशल मीडिया पर साझा करना आखिर कहां तक सही है?
भारत एक लोकतांत्रिक देश है,
यहां हर नागरिक को किसी भी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया रखने, सवाल पूछने और असहमति व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या अपनी ���ात रखने के लिए संवैधानिक पदों, सरकारी कार्यालयों के नाम-पदनाम और सरकारी प्रतीक चिन्हों का इस्तेमाल करना उचित है?
कल अगर कोई युवा किसी मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए अपने क्षेत्रीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक, सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, न्यायाधीश या राष्ट्रपति के नाम, पदनाम और सरकारी प्रतीक चिन्हों का इस्तेमाल करते हुए कोई व्यंग्यात्मक पत्र तै��ार कर उसे सोशल मीडिया पर साझा करने लगे, तो क्या यह उचित माना जाएगा?
जरा सोचिए...
अगर कोई आम युवा अपने क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पदनाम और सरकारी प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल करके क��ई व्यंग्यात्मक पत्र तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दे, तो क्या पुलिस विभाग इसे केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मानकर छोड़ देगा?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और सरकारी प्रतीकों की अपनी गरिमा और मर्यादा भी है।
इसलिए आप असहमति जताइए,
सवाल पूछिए, व्यंग्य कीजिए, लेकिन संवैधानिक पदों और सरकारी प्रतीकों की गरिमा को ध्यान में रखकर।
क्या यही हमारा लोकतांत्रिक देश है?
जहाँ जनता के चुने हुए प्रतिनिधि से सवाल पूछना भी मुश्किल हो जाए, वहाँ लोकतंत्र की असली ताकत कहाँ रह जाती है?
सवाल पूछना लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, उसकी पहचान है।
जनता को जवाब चाहिए—डर नहीं।
@CMOfficeUP@myogiadityanath@Cockroachisback@INCIndia
अब चाहे फिर से भीमा कोरेगांव जैसी ऐतिहासिक चेतना जगानी पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे। चंद्रशेखर आज़ाद के साथ बहुजन अब चुप नहीं रहेगा। यह किसी के खिलाफ नफरत नहीं, अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई है। अब दबाव की राजनीति नहीं चलेगी—बहुजन जाग च���का है। ✊#BahujanEkta #JaiBhim #SocialJustice
बहुजन समाज सवाल है जब चंद्रशेखर आज़ाद दलित-बहुजन के हक़ के लिए हर मुद्दे पर खड़े होते हैं तो हम उनके साथ क्यों नहीं खड़े होते? 15% की दबंगई के सामने 85% कब तक चुप रहेगा? अब समय है डरने का नहीं अपने अधिकार और सम्मान के लिए एकजुट होने का
#BahujanEkta@BahujanFanClub@BhimArmyChief
Caste discrimination karne wale log jab sirf Chandrashekhar Azad ko target karne ke liye kisi Dalit woman ka support lete hain, toh ye principle nahi, political convenience hai. 😂
@BhimArmyChief@BhimArmy_BEM@BajrangDalOrg
Aurat ka sahara lena napunskta kahlata hai