E 20 का सच क्या है?
आप जब अपनी गाड़ी में दस लीटर पेट्रोल डालते हैं तो उसमें से दो लीटर Ethanol होता है. यही E 20 पेट्रोल है. पेट्रोल में 20% Ethanol मिलाकर बेचा जाता है. पहले दस लीटर पेट्रोल में आधा लीटर Ethanol मिलाया जाता था, फिर एक लीटर किया गया और इस साल अप्रैल से दो लीटर. E 20 पेट्रोल को लेकर लोगों की दो तरह की शिकायतें हैं. माइलेज कम हो गया है और गाड़ियों का इंजन और पुर्जे ख़राब हो रहे है. हिसाब किताब में इन दोनों शिकायतों की पड़ताल करेंगे.
पहले पेट्रोल में Ethanol मिलाने का लॉजिक समझ लीजिए.हम अपनी ज़रूरत का 85% क्रूड ऑयल विदेश से ख़रीदते है. E 20 से क्रूड ऑयल की बचत होती है. विदेशी मुद्रा की बचत होती है. प्रदूषण कम होता है क्योंकि Fossil fuel कम खर्च होता है. Ethanol गन्ने या अन्य फसलों से बनता है इससे किसानों को फ़ायदा होता है.
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने सबसे पहले इस पर सोचना शुरू किया. मनमोहन सिंह सरकार ने धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया. वर्तमान सरकार इसे 10% तक ले गई और अब 20% तक. पिछले 20- 25 साल में सभी सरकारों ने इसे बढ़ाया है तो फिर अब शोर क्यों मचा है?
सरकार ने एक अप्रैल 2026 से E 20 पेट्रोल अनिवार्य कर दिया. पहले यह डेडलाइन 2030 तक थी लेकिन 2021 में इसे बदल दिया गया. डेडलाइन को आगे लाकर 2025 कर दिया गया. नीति आयोग ने रिपोर्ट बनाई थी कि 2022 में E 10 पेट्रोल अनिवार्य होगा और फिर E20. यह रोड मैप नीति आयोग ने 2021 में बनाया था मतलब फ़ैसला अचानक नहीं हुआ.
अब आते हैं माइलेज कम होने और गाड़ी ख़राब होने की शिकायतों पर. सरकार और इंडस्ट्री दोनों मानते हैं कि माइलेज 2 से 6% तक कम हो सकता है. विवाद इतना है कि माइलेज इतना ही घटेगा या इससे ज़्यादा.
गाड़ी ख़राब होने के दावों पर सरकार और ऑटो कंपनियाँ मोटे तौर ग़लत मानती हैं. यहीं कंपनियों ने U Turn लिया है. ऑटो कंपनियों की संस्था SIAM ने 2021 में नीति आयोग को कहा था कि E20 के कारण गाड़ियों में दिक़्क़त हो सकती है. गाड़ी के Fuel system के कल पुर्जे ख़राब हो सकते हैं जैसे रबर पाइप, प्लास्टिक या मेटल टैंक. इंजन में दिक़्क़त हो सकती है.उन्होंने सुझाव दिया था कि 2028 तक E20 के साथ साथ E10 पेट्रोल भी बेचा जाना चाहिए ताकि पुरानी गाड़ियों को दिक़्क़त नहीं हो. नीति आयोग ने तब इन सुझावों को दरकिनार कर दिया था. सरकार भी अब सिर्फ E 20 बेच रही है. E 10 का ऑप्शन नहीं है.
2023 से ऑटो कंपनियाँ E20 के हिसाब से गाड़ियाँ बनाने लगीं. फिर भी देश में चल रही 100 में से 80 गाड़ियाँ 2023 से पहले बनी हैं. सोशल मीडिया पर लोग उसी तरह की शिकायतें कर रहे हैं जिसकी आशंका 2021 में ऑटो कंपनियों ने जताई थी. ऑटो इंडस्ट्री ने पिछले साल अगस्त में लाइन चेंज कर ली. ARAI (Automotive Research Association of India) के
रिसर्च हवाला देकर कहा कि पुरानी गाड़ियों को कोई दिक़्क़त नहीं होगी. हालाँकि रिसर्च में माना गया था कि माइलेज 2-6% घटेगा. ऑटो कंपनियों ने पहले कहा था कि माइलेज 6-7% तक घटेगा.
E 20 के पक्ष में ब्राज़ील का उदाहरण दिया जा रहा है कि वहाँ E27 बिक रहा है. ब्राज़ील को वहाँ पहुँचने में 40 साल लगे. हमें जो 2030 तक करना था वो 2026 में कर दिया और लोगों को ऑप्शन भी नहीं दिया E10 का.लक्ष्य सही है लेकिन E20 को लागू करने में जल्दबाज़ी की गई है. आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में बताइए.
मेरी छोटी बेटी सानुवी वर्मा के लिए आप सभी की मदद और मार्गदर्शन की जरूरत है।🙏
सानुवी जन्म से ही एक गंभीर स्किन प्रॉब्लम (त्वचा रोग) से जूझ रही है। पिछले डेढ़ साल से चंडीगढ़ जीएमसी (GMCH) से उसका इलाज चल रहा है। दवाइयों से कुछ समय के लिए आराम मिलता है, लेकिन बीमारी फिर से उभर आती है। हमने कई जगह डॉक्टरों और बुजुर्गों की सलाह मानकर इलाज कराया, पर स्थिति वैसी ही है।
एक पिता होने के नाते मैं अपनी बेटी को इस दर्द में और नहीं देख सकता।
कृपया मदद करें:
अगर आपकी नजर में इस बीमारी का कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर, प्रसिद्ध हॉस्पिटल या कोई उचित जगह हो जहाँ इसका पक्का इलाज मिल सके, तो तुरंत कमेंट में नाम और पता बताएं।
पोस्ट को शेयर भी करें ताकि सही जानकारी हम तक पहुँच सके,धन्यवाद।
(यह मेरे एक परिचित की बेटी है कृपया उचित सुझाव दे जिससे बच्ची का भला हो।)
@iamnarendranath ये सोचने वाली बात है कि आम आदमी की जिंदगी कितनी सस्ती हो गई है। किसी को कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता है। जब क्रेडिट लेने की बात आती है तो सब आगे खड़े हो जाते हैं। लेकिन फिर भी शर्म नहीं आती।
भारत-आयरलैंड के बीच 2 मैचों की टी-20 सीरीज खेली जा रही है। भारत 0-1 से पीछे है और आज दूसरे मैच में भी मुसीबत में है। इस सीरीज में भारतीय मूल के Jai Moondra ने आयरलैंड की ओर से कमाल की गेंदबाजी की है।
#INDvsIRE#TeamIndia#cricket#cricketlovers
इतने लंबे समय और निरंतर रूप से कैब सेवा का उपयोग करने के बाद कभी ऐसा अप्रिय अनुभव नहीं हुआ, जैसा भयावह वाकया आज घटित हुआ।
एक मामूली सी बात पर ड्राइवर ने न केवल राइड कैंसिल कर दी, बल्कि गाड़ी से उतरकर मुझे गालियां देने लगा और कहा कि एक मिनट नहीं लगाऊंगा गाड़ी से कुचलने में। गनीमत है कि सोसायटी के बाहर गार्ड और फल-सब्जी बेचने वाले तुरंत आ गए तो वह गाड़ी में वापस बैठकर चला गया।
असली संयोग या कहें कि दुर्योग यह हुआ कि इस बार @Uber के बजाय @rapidobikeapp बुक करने गया तो राइड वापस उसी के पास चली गई और मैं पूरे वाकये में इतना ब्लैंक हो गया कि न गाड़ी नंबर पर गौर किया और न ही उस आदमी पर। बैठने के बाद सोचा कि शायद उनको अहसास हुआ कि उनका व्यवहार सही नहीं था और इंसानियत का तकाजा भी कहता है कि इंसान को एक मौका तो और देना ही चाहिए।
मगर, मैं गलत था। उसने राइड एक्सेप्ट ही की थी धमकाने के लिए कि अगर उसकी शिकायत की तो मेरी खैर नहीं। मैं उलझना नहीं चाहता था और न ही मेरा ऐसा व्यवहार है। दफ्तर पहुंचने की थोड़ी जल्दी भी थी।
उसके दुस्साहस का एक कारण यह भी था कि ऊबर में आईडी क्रिएट करने वाला उसका कोई परिचित है। उसका नाम और ड्राइवर का नाम भी मिसमैच था।
खैर, उसने धमकी दी कि अगर मैं कभी दोबारा उसे दिख गया तो फिर या तो वो नहीं या मैं नहीं।
मुझे लगता है कि ऐसे लोग कैब जैसी सेवा के लिए अनफिट हैं। सोसाइटी के गार्ड की प्रतिक्रिया थी अगर भरी दुपहरी में यह ऐसे धमका सकता है तो रात के अंधेरे में गाड़ी चढ़ा ही देगा।
आप लोग कैसे-कैसे लोगों को लाइसेंस दे देते हैं @Uber@Uber_Support @rapidobikeapp
CC: @Uppolice@CP_Noida
हर साल प्रीमियम ₹50,000 लेकिन जरूरत के समय बहानेबाजी, क्यों ? एजेंट का जवाब “हमसे पूछकर पॉलिसी थोड़ी ली थी।” जांच की जानी चाहिए और कार्यवाही होनी चाहिए
#HealthInsurance
व्यक्ति एक, रंग अनेक
सुनील ग्रोवर सबसे प्रतिभावान कॉमेडियन हैं। वे हर अभिनय में गहराई से रच-बस जाते हैं। मौजूदा दौर के सबसे संजीदा व्यक्ति।
@WhoSunilGrover
कैंसर एक ऐसी बीमारी ने जिसने करोड़ो घर तबाह किए हैं ।
सिर्फ मरीज ही नहीं बल्कि मरीज के परिवारों को ।
दवाइयों का खर्च वहन करते करते लोग टूट जाते हैं ।
और कैसे नहीं टूटेंगे अगर 600 रुपये की दवाई पर सरकार ने छूट दे रखी है 12000 रुपये MRP रखने की ।
जी हाँ ।
दवाई है Paclitaxel ।
रिटेलर खरीदते हैं 600 में और MRP है 12000.
एक मरीज को कई बार 20-30 vial की ज़रूरत पड़ती है ।
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं ।
कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है ।
200% मार्जिन भी समझ में आता है लेकिन 1900% margin??
वो कैंसर जैसी बीमारी में , जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है??
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना?
ये तो ठीक नहीं हैं ना साहब ?
@PMOIndia
यह कैसी विडंबना है कि भारत जैसे गरीब और संघर्षरत देश में एक अकेला इंसान कोचिंग चलाकर, शिक्षा बेचकर 30 हजार करोड़ की एड-टेक कंपनी Physics Wallah खड़ी कर लेता है और हम इसे सफलता कहकर ताली बजा रहे हैं। लेकिन असल सवाल यह नहीं कि अलख पांडेय कितना कमा रहे हैं या उन्होंने कितना कमाया, असल सवाल यह है कि उन्हें इतना क्यों कमाया ? मीडिया ये कहते नहीं थक रहा कि अलख पांडेय की निजी नेटवर्थ शाहरूख खान से ज्यादा हो गई है। मैं ये नहीं कह रहा कि इसमें उनकी कोई गलती है। व्यापारी जब बजारा में है तो व्यापार तो करेगा ही और मुनाफा कमाने के लिए व्यापार करेगा।
क्योंकि जब सरकारें अपनी जिम्मेदारी से भागती हैं, तभी बाजार आपकी जरूरतों पर कब्जा कर लेता है। आज देश में पांचवीं का बच्चा कोचिंग पढ़ रहा है। ये गर्व की बात नहीं, ये एक राष्ट्रीय आपदा है। क्यों? क्योंकि भारत के सरकारी स्कूल धीरे-धीरे खत्म किए जा रहे हैं।
सरकारें ये सवाल सुनना ही नहीं चाहतीं कि:
-जब हर साल शिक्षा का बजट बढ़ता है, तो सरकारी स्कूलों का स्तर क्यों गिरता जा रहा है?
-आखिर बच्चों को किताब, शिक्षक और क्लासरूम देने में हम इतने असफल क्यों हैं?
-क्यों सरकारी स्कूलों की हालत पर संसद में कभी शोर नहीं होता, लेकिन कोचिंग सेंटरों की फीस और बिजनेस पर अरबों की चर्चा होती है?
क्योंकि सच्चाई कड़वी है। सरकारी स्कूल ठीक कर दिए गए तो नेताओं-मंत्रियों के प्राइवेट स्कूलों की दुकानों पर ताले लग जाएंगे और जो दुकान रोज अरबों कमा रही हो, उसे बंद कराने की हिम्मत किसी सरकार में नहीं है। अलख पांडेय की कमाई में गर्व ढूँढने वाले लोग, जरा रुककर सोचें, ये कमाई असल में किसकी कीमत पर हो रही है? यह उस शिक्षा की कीमत है जो हर बच्चे का मौलिक अधिकार था और जिसे बाजार ने “प्रोडक्ट” बनाकर बेच दिया रोज बेच रहा है। आज कोचिंग संस्थान नए मंदिर हैं और उनके शिक्षक नए भगवान। जिसकी पूजा वही कर सकता है जिसके पास देने के लिए पैसा है।
असली विफलता अलख पांडेय की सफलता नहीं है, असली विफलता है हमारी सरकारों की जिसने बुनियादी जरूरतों की सूची में सबसे ऊपर खड़े शिक्षा के क्षेत्र को पूरी तरह बाजार के हवाले कर दिया। और सबसे शर्म की बात क्या है? हम एक गरीब देश में रहते हैं, जहां लाखों बच्चे आज भी अच्छी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए तरस रहे हैं, और हम एक कोचिंग साम्राज्य की सफलता पर तालियां बजा रहे हैं।
अगर कल को कोई 50 हजार करोड़ की कोचिंग कंपनी खड़ी कर ले, तो समझ जाइएगा कि शिक्षा नहीं बढ़ रही, गरीबी बढ़ रही है, असमानता बढ़ रही है, और सरकार की नाकामी रिकॉर्ड बना रही है। शिक्षा के बाजारीकरण पर लोगों की चुप्पी, और सरकारों की खामोशी, दोनों मिलकर आने वाली पीढ़ियों के सपनों को खामोश कर रहे हैं।
#physicswallah #AlakhPandey #IPO