1990 से पहले बिहार देश का सबसे समृद्ध राज्य था। उसकी तुलना सिंगापुर और अमेरिका से होती थी। सभी धनी थे! जिनको भगवान ने राज करने के लिए चुना वो राज करते थे और जिनको हमारी सेवा करने के लिए चुना वो हमारी सेवा करते थे! सब कुछ ठीक था। सब संतुष्ट थे, सब अपना हैसियत में रहता था! पापी दलित पिछड़ों को उनकी हद में रखा जाता था ताकि उनका मन ना बढ़ जाए!
नौकरी, ठेकेदारी, नेतागिरी, शिक्षा, जमींदारी न्यायपूर्ण रूप से भूमिहार, राजपूत, कायस्थ और ब्राह्मण तक सीमित था। तुच्छ दलित-पिछड़ों के पापी पाँवों को इन क्षेत्रों में पड़ने नहीं दिया गया था, कहीं गलती से ये घुसने की कोशिश करता तो हमलोग आपसी मतभेद भुला कर आपस में मिलजुलकर पहले इन नीच लोगों को बाहर करते थे! बहुजन दलित, पिछड़े, आदिवासी अधर्मी पापियों से घरों, खेतों और व्यवसायों में दो जून की बासी रोटी या इच्छानुसार मेहनताने पर दिनभर-रातभर काम करवाया जाता था।
वर्ण व्यवस्था के अनुसार ही सामाजिक व्यवस्था थी।
जिसके लिए जो काम शास्त्रों में लिखा था, लोग वही काम करते थे। दलित पिछड़े साफ-सफाई, जूता सिलने, औजार बनाने, मवेशी पालने, खेतों और बाबू साहेब लोगों के घरों में काम करके अपने सौभाग्य का अनुभव करते थे। इससे समाज में धर्म, न्याय और संतोष का वातावरण था। दलित और पिछड़े सवर्णों को 'माई बाप! माई बाप!' कहते नहीं थकते थे! बिना बोले ही अपना धर्म समझकर आगे बढ़कर हम सवर्णों का काम कर दिया करते थे! दलित-पिछड़े के दादा किसी 'सवर्ण' के दादा का, बाप 'सवर्ण' के बाप का और बेटा 'सवर्ण' के बेटे के चरणों में पड़े रहते थे। कोई अपनी औकात से बाहर नहीं जाता था। कोई इस सामाजिक व्यवस्था के विरोध में खड़ा होता तो कोई ना कोई शुक्ला, तिवारी, सिंह, पांडे इन्हें इनकी हैसियत याद दिला कर इस न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था की रक्षा कर देता था। कोर्ट-कचहरी, थाना..सब इस व्यवस्था के महत्व को समझते थे और अनुपालन करवाते थे।
फिर कर्पूरी ठाकुर, लालू यादव और नीतीश कुमार जैसे नेता आए! ख़ासकर ललुआ तो इनका माथा ही खराब कर दिया! उसके समय ये डोम, चमार, गुआर, कोइरी..का मन ज्यादा ही बढ़ बढ़ गया! औकात से बाहर जाने लगा सब! मजदूरी माँगने लगा! गोर में चप्पल पहनने लगा! आँख उठाकर जवाब देने लगा! पीछे के दरवाजे से नहीं, अब ई लोग हम लोग के घर में सामने के दरवाजा से घुसने का डिमांड करने लगा, वो भी चप्पल पहनकर दुआर पर आने लगा! बराबर खटिया पर बैठने का कोशिश करने लगा! जो बूढ़ा बूढ़ा अब तक हम बचवन को 'मालिक' 'बाबूजी' 'छोटे मालिक' 'छोटे बाबू' कहकर प्रणाम करता था उस सब साला भी हमको अब नाम से बुलाने लगा, अपना औकात भूलकर हम ही लोगों को आशीर्वाद देने के लिए हाथ उठाने लगा! अपना बेटा-बेटी को हम लोग लोगों के घर दिनभर रहकर काम करने से मना करने लगा! स्कूल भेजने लगा! शादी-बरतुहारी के लिए आज्ञा और सलाह लेना तक छोड़ दिया! नई नवेली दुल्हन को 'मालिक साहब' लोगों का घर दिखाने के लिए शादी के तुरंत बाद 2-4 दिन के लिए रखवाना बंद कर दिया, 'मुँह-दिखाई तक से बचने लगा। पढ़ाई कर के नौकरी का सपना देखने लगा, कोई तो अफ़सरे बनने का बात करने लगा! 'मालिक साहब' लोगों के खेत में काम करने से मना कर के बिहार के बाहर जाकर मजदूरी करना इन लोगों को अब ज्यादा सुहाता था! मुँह लगल जवाब देने लगा! छोट जतिया सब मजदूरी माँगने लगा! अब ई सब साला को रोटी नहीं पैसा चाहिए था, पुराना नहीं नया कपड़ा चाहिए था, घर-संपति, अपना खेत चाहिए था!
जब सेना बनाकर इनके बाप-बेटा, बच्चा, माँ-बेटी को रात में इनके गाँव-घर में चढ़ाई कर 'सेंतने' लगे तो ई नीच सब भी हम लोगों से लड़ने के लिए अपना सेना बना लिया!
ऊपर से ललुआ इन लोगों पढ़ने, आगे बढ़ने के लिए बोलने लगा! गली गली में ये छोट जतिया लोग नेता बनने लगा, अपने मन से वोट डालने-डलवाने लगा, विधानसभा, लोकसभा जाने का सपना देखने लगा, परीक्षा पास करने लगा, नौकरी लेने लगा!
यही कारण से बिहार का दुर्गति हुआ है, धर्म-जाति, शास्त्र, परंपरा को ये नीच लोग कुछ बुझता नहीं है तो राज्य का नाश तो होगा ही! जो कभी सिंगापुर था वो अब बीमारू राज्य कहलाता है, छोट जतिया दूसरे राज्य में जाकर एक कमरे में 5 लोगों के साथ रह लेगा, गाली सुनते हुए मजदूरी कर लेगा पर हमारे खेत में बेगारी नहीं करेगा! बोलता है कुछ कमा लेंगे तो अपना खेत ले लेंगे! बच्चों को पढ़ाएँगे, आगे बढ़ाएँगे! मनुस्मृति को गाली देता है, जात पात को बेकार बताता है, बोलता है सब बराबर है! अपना छोट जतिया होने पर भी ई पगला सब गरव करता है!!
अब लालू का बेटा तेजस्वी डिप्टी सीएम बना है तो इन लोगों को जैसे पंख ही लग गया है! नौकरी लेंगे, परीक्षा पास करेंगे...अंड भंड बकने लगा है गुआर-चमार-डोम-दुसाध सब!
- बिहार के एक पीड़ित सवर्ण की आपबीती।
राज्यसेवा गुणवत्ता यादी लागून अडीच महिने झाले आहेत.आता Forest चा निकाल तसेच STI joining असल्याने बरेच जण कॉमन आहेत .परंतु राज्यसेवा निकाल लागला नसल्याने Opting Out कुणीही करत नाही.मा.@mpsc_office राज्यसेवा निकाल लावल्यास मुलांना न्याय भेटेल अन्यथा जागा रिक्त राहतील.@Drsuvarnas
मा.@mpsc_office OPTING OUT साठी निकाला चा क्रम IMPORTANT आहे.
जो तुम्ही पूर्णपणे चुकवत आहात,जर क्रम योग्य नसेल तर मग OPTING OUT चा काय फायदा ? नुसत नावापुरत आहे का OPTING OUT? #राज्यसेवा_2021PROVISIONAL निकाल आवश्यक नाहीतर नुसता OPTING OUT चा दिखावा राहुद्या सुरू #राज्यसेवा_2021
मा. MPSC आयोगाचे निकाल म्हणजे अवकाळी पाऊसच.कधी येईल याचा नेमका नाही..अन् का आला/नाही याचाही शोध लागत नाही..ठरलेल्या वेळापञकानुसार परिक्षा अन् त्यांचे निकाल प्रसिद्ध करण्यात अडचण आल्यास मा.आयोगाने विद्यार्थ्यांना त्याबाबत अवगत करायला हवे, ही विनंती!
#MpscMains2021@mpsc_office
✅माननीय @mpsc_office राज्यसेवा 2021 Post नुसार निकाल,PSI 2020 General Merit List,Combine-B 2022 पूर्व परीक्षा निकाल कोणत्या कारणामुळे थांबला आहे.
✅यावर आपण नोटिफिकेशन काढून आम्हाला सांगावे ही नम्र विनंती.🙏
✅यामुळे विद्यार्थ्यांना अभ्यास बाबतीत पुढील नियोजन करता येईल.🙏
♦️राज्यसेवा 2021 post नुसार निकाल, PSI 2020 General merit list तसेच Combine गट ब 2022 पूर्व परीक्षा निकाल कोणत्या कारणामुळे थांबला आहे यावर आयोगाचे काहीतरी नोटिफिकेशन काढून कृपया करुन सांगावे ही नम्र विनंती यामुळे विध्यार्थीना अभ्यास बाबतीत पुढील नियोजन करता येईल..
@mpsc_office