न प्रधानमंत्री मोदी, न गृह मंत्री अमित शाह में हिम्मत है कि वो संसद में आकर हमारे छात्रों पर हुई बर्बरता पर जवाब दें।
भारत के छात्रों के लिए यह एक साफ़ संदेश है - उन्हें नहीं लगता कि आप पर हुई हिंसा उनकी किसी टिप्पणी के भी लायक है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 19 साल के साहिल के चेहरे पर दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन से हमला किया।
साहिल दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र है मगर परिवार को सहारा देने के लिए वो पार्ट-टाइम कार भी चलाता है। वो खुद 2025 के SSC दिल्ली कॉन्स्टेबल पेपर लीक का शिकार है। अब उसे डर है कि SSC ने फिर से उसी एजेंसी को ठेका दिया है और फिर से पेपर लीक हो जाएगा।
इंसाफ़ और बेहतर भविष्य की मांग के साथ वह प्रदर्शन में शामिल हुआ था। आज हालत ये है कि उसकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा है।
ये सज़ा मिलती है हमारे छात्रों को सवाल पूछने और जवाबदेही मांगने की।
हम साहिल के साथ हैं। हम जवाबदेही मांग रहे हर छात्र के साथ हैं।
मोदी जी, देश के बच्चों से अपने इस गुनाह की माफ़ी मांगिए, इसके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कीजिए और धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त कीजिए।
#Imp: This goon also attacked minor Nishu’s father, Sanjay ji, inside Jantar Mantar and broke his skull. We kept demanding that the Police invoke SC/ST Act, and stricter IPC provisions. Our fear was that he’ll be emboldened to repeat this.
@DCPNewDelhi why are you protecting him? We demand that this person be taken into preventive custody immediately and stricter sections be added to Sanjay’s case.
@Cockroachisback
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to the students.
3. Take action against those who assaulted them.
आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
छात्रों की मांगें साफ़ हैं:
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
Protests are increasingly being policed not just with barricades and lathis, but with AI-powered surveillance. Facial recognition systems can identify, track, and profile people in public spaces, raising serious concerns for privacy, free expression, and the right to protest.
Watch the video to understand how these systems work, why they matter, and how you can document protests responsibly without putting others at risk.
Tomorrow we are going to attempt a video explainer on how to use a cross platform mesh messaging app that you can use to communicate during an Internet shutdown? Drop your existing guides and faves below 👇🏽
मी गेल्या बारा वर्षांपासून भारतीय जनता पक्षाचा कार्यकर्ता म्हणून काम करतो आहे. पक्षाने दिलेले अनेक आदेश मी डोळे झाकून पाळत आलेलो आहे. आमच्या अहिल्यानगर जिल्ह्यात अनेक सामाजिक कार्यक्रम मी पक्षाच्या बॅनरखाली घेतले आहेत. स्वतःच्या खिशातले पैसे खर्चून मी पक्षासाठी स्वत्व अर्पण केलं आहे. आपण चौकशी करू शकता. एवढी वर्षे एकाही निवडणूकीसाठी तिकिट मिळण्याची मी अपेक्षा ठेवली नाही. सतत अविरतपणे मी पक्षासाठी झोकून दिलं.
माझा पुतण्या सुदर्शन घोरपडे ह्यावर्षी बारावीला होता. नीट पेपर फुटल्यानंतर त्याने खचून न जाता पुन्हा पेपर देण्याचा निर्णय घेतला. त्याची मोठी बहीण देवयानी घोरपडे दिल्लीत एमबीबीएस डिग्रीच्या शेवटच्या वर्षाला आहे. तिचा आदर्श सुदर्शनसमोर होता. नीटची दुसऱ्यांदा घेतलेली परीक्षा सुदर्शनला नीट देता नाही. परीक्षा झाल्यानंतर मात्र तो एकटाएकटा राहू लागला. अर्थात त्याच्या आईवडिलांनी त्याला चांगलं सांभाळून घेतलं. पण पेपरफुटीचा त्याच्या मनावर परिणाम झाला. आता पुण्यातील चांगल्या मानसोपचारतज्ज्ञाकडून तो उपचार घेत आहे. ह्या सगळ्याचा फॅमिलीवर परिणाम झाला. कुटुंबाचंच मानसिक स्वास्थ्य ढासळलं.
सांगण्याचा मुद्दा हा, काल झालेल्या आंदोलनात सुदर्शनची बहीण देवयानी उपस्थित होती. तिच्या दोन मैत्रिणींसोबत वैद्यकीय प्रथमोपचारपेटी सोबत घेऊन ती आंदोलनस्थळी गेली होती. पोलिसांनी लाठीचार्ज केल्यानंतर तिच्या डॉक्टर मैत्रिणीच्या खांद्यावर जबर मार बसला आहे. स्वतः देवयानीचा पूर्ण चेहरा सुजला आहे. अश्रूधुराची नळकांडी अगदी जवळ फुटल्यामुळे. तिला डाव्या डोळ्यात इन्फेक्शन होऊन दिसणं बंद झालं आहे. ही बातमी कळताच आम्ही दिल्लीकडे धाव घेतली. पण हे सुदर्शनला कळू दिलं नाही. त्याला नातेवाईकांकडे सुखरूप ठेवलं आहे. त्याला सोशल मीडिया, मोबाईल व टीव्हीपासून दूर ठेवलं आहे.
माझ्या पक्षाने 2014 साली प्रॉमिस केलेला भारत हा नव्हता. मी काय तोंड घेऊन माझ्या पुतण्यापुतणीसमोर जाऊ शकतो? भाजपचा शहरप्रमुख स्वतःला अभिमानाने म्हणवून घेतो, पण माझ्या पुढच्या पिढीला मी काय भविष्य देत आहे. मन व्यथित झालं आहे.
माझ्या सद्सद्विवेकबुद्धीवर विश्वास ठेवत मी भारतीय जनता पक्षाच्या सर्व पदांचा आणि प्राथमिक सदस्यत्वाचा राजीनामा देत आहे.
ऍड. गोविंद बाळासाहेब घोरपडे
राहुरी, अहिल्यानगर.
We have marched to PM Modi’s house to demand answers from him for the brutalities against young students yesterday.
The Government doesn’t want to take any accountability or does it want to have a debate on it in Parliament.
PM and HM must resign for destroying the future of India’s youth.
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
पेपर लीक के खिलाफ लाखों बच्चे जंतर-मंतर पर बैठे हैं, लेकिन उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया जा रहा है।
मोदी सरकार बच्चों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @kharge