आप लोग 2023 की समाजवादी पार्टी की मुस्लिम महिला नेता का यह कुकृत्य भूल चुके होंगे
हरदोई जिले की पिहानी नगर पालिका में दलित सफाई कर्मी राजाराम पुत्र रामपाल की गलती पर उससे पैरों में गिर कर माफी मंगवाती पिहानी नगर पालिका अध्यक्ष सपा नेता शाहीन वेगम ....शर्मनाक
तब अखिलेश यादव ने अपने नेता का बचाव किया था
आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का कत्ल जब ताहिर हुसैन कर चुका था तब आप पार्टी का यह राज्यसभा सदस्य कितनी बेशर्मी से उस हत्यारे ताहिर हुसैन का बेशर्म बचाव कर रहा था... यह भी देखिए सुनिए।
AAP के पूर्व नेता और अरविंद केजरीवाल के करीबी ताहिर हुसैन पर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी ठहराया है। इसके बावजूद संजय सिंह ने ताहिर हुसैन को बार-बार बेगुनाह क्यों बताया? साथ ही, AAP-दा के अन्य बड़े नेताओं ने भी हमेशा ताहिर हुसैन का बचाव क्यों किया?
“मोदी और शाह के पास देश से भागने के लिए कुछ घंटे बचे हैं, देखिए किस देश में इनको पनाह मिलती है क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दीपके 6 जून को भारत आ रहे हैं”
ये वाइरल वीडियो मुझे मिला है, क्या किसी को पता है कि कौन हैं ये राजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक स्वांग के बहुरूपिया अभिनेता, तथाकथित नई राजनीति के स्वघोषित किंतु असफल प्रणेता, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल जी को अपने परिवार के सदस्यों को अनावश्यक रूप से राजनीतिक विमर्श में घसीटने की पुरानी आदत है। अब वे दिल्ली में रविवार को सुंदरकांड पाठ और हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के विषय पर अपनी चिरपरिचित, अविश्वसनीय व छलपूर्ण राजनीतिक शैली का प्रदर्शन कर भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
ये वही केजरीवाल जी हैं जिन्होंने कभी कहा था कि उनकी नानी नहीं चाहती थीं कि वे उस मंदिर में जाएँ, जिसे उन्होंने तथाकथित रूप से मस्जिद बताया था (जबकि न्यायालय ने उसे सदैव एक विवादित ढांचा माना था), आज जब वे स्वयं श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं, तो उन्होंने केवल अपनी राजनीति ही नहीं बदली,
बल्कि कहावत का अर्थ भी बदल दिया।
कहावत है "नानी याद आना",
किंतु इन्होंने तो "नानी भुलाए जाना" ही चरितार्थ कर दिया।
किन्तु भारत की सनातन संस्कृति, हमारी परंपरा और पंचतंत्र की शिक्षाएँ सदैव यह विवेक प्रदान करती रही हैं कि वास्तविक श्रद्धा और अवसरवादी आडंबर में अंतर कैसे पहचाना जाए।
इस देश की धर्मपरायण, जागरूक और विवेकशील जनता भली-भाँति जानती है कि कौन सच्चा 'असली भगत' है और कौन केवल 'बगुला भगत'।