@KavitaTwoFifty@Kavyakshra9 खुद से खुद के
मिलन के लिए
जरूरी नहीं है...
छोड़ना
मुंह मोड़ना
या
बाकी रिश्ते तजना
ना ही गुनाह है
खुद को सुनना
महसूस करना
और पहचानना
बस जगह देनी है
थोड़ी सी
अपने को भी
और
यह समझना
कि 'मैं'
सिर्फ अहम नहीं है
बल्कि इक पूरी हस्ती है
इक अर्से से
तुम से ही
बिछड़ी सी
#Kavita250
@KavitaTwoFifty@Kavyakshra9 खुद से खुद के
मिलन के लिए
जरूरी नहीं है...
छोड़ना
मुंह मोड़ना
या
बाकी रिश्ते तजना
ना ही गुनाह है
खुद को सुनना
महसूस करना
और पहचानना
बस जगह देनी है
थोड़ी सी
अपने को भी
और
यह समझना
कि 'मैं'
सिर्फ अहम नहीं है
बल्कि इक पूरी हस्ती है
इक अर्से से
तुम से ही
बिछड़ी सी
#Kavita250
थोड़ा थोड़ा टूटे हो
थोड़ा थोड़ा रूठे हो
खुद से ही
जोर अजमाइश में
कुछ संभले कुछ छूटे हो
महफ़िल में
फिर भी सबसे मिलते हो
कुछ सच्चे कुछ झूठे हो
#UD@UpmaDaggaParth
@KavitaTwoFifty@Keerti_Writes कल्पवृक्ष की मुराद
जैसा नहीं है
हमारा मिलन
हमने झेली है
अपने हिस्से की
पतझड़
तेज हवाओ के
थपेड़े
तूफानों का
कहर
पर इन विपरीत
मौसमो में भी
हमने अपने
प्यार की ओट से
बचाए रखा
आशा की कोपल को
तभी तो हम
आज बैठ पाए हैं
हर मौसमों को
सहने वाले
प्यार के
घने पेड़ की छांव में
#Kavita250
@KavitaTwoFifty@Keerti_Writes कल्पवृक्ष की मुराद
जैसा नहीं है
हमारा मिलन
हमने झेली है
अपने हिस्से की
पतझड़
तेज हवाओ के
थपेड़े
तूफानों का
कहर
पर इन विपरीत
मौसमो में भी
हमने अपने
प्यार की ओट से
बचाए रखा
आशा की कोपल को
तभी तो हम
आज बैठ पाए हैं
हर मौसमों को
सहने वाले
प्यार के
घने पेड़ की छांव में
#Kavita250