@techdroider Wish they find an alloy or something. Titanium really feels beautiful. Much better than the heavy shiny steel and scratchy aluminium. And so much lighter. The new pro phones are freaking heavy. Holding onto my 15 pro and praying the 20 is closer to it in gms
अंतरिक्ष में छतरी
IDEA ये है कि पृथ्वी तक जो सूरज की रोशनी आती है, उसको रोका जाएगा। कैसे रोका जाएगा? वो कह रहे हैं कि करीब 80 से 100 साल लगेंगे और हम लाखों satellites एक ऐसी जगह पर जाकर के स्थापित कर देंगे, जो पृथ्वी और सूरज के बीच वहाँ पर है, जहाँ पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण, सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बिल्कुल बराबर हो जाता है। तो satellites वहीं रहेगा।
तो सूरज से जो रोशनी आ रही है पृथ्वी की ओर, satellites पर एक film होगी, एक screen होगी, वो उस रोशनी को पृथ्वी तक आने से थोड़ा-सा रोक देगी। 1.8% रोक देगी।तो जब पृथ्वी पर सूरज की रोशनी पृथ्वी पर कम आएगी, तो पृथ्वी कम गर्म होगी और इस दौरान हम जी भर के कामना पूरी कर सकते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कर सकते हैं।
हम अपनी कामनाओं को नहीं रोकेंगे। हमारा जो अहंकार है, वो किसी भी प्रकार रुकने को तैयार नहीं है। हम कह रहे हैं, हम कार्बन डाइऑक्साइड तो बढ़ाते ही रहेंगे। सूरज को रोक देंगे। सूरज को रोक देंगे। आप अहंकार देखिए।
और ये जो प्रोजेक्ट है, ये दसों सालों तक कई ट्रिलियन डॉलर का है। और इस प्रोजेक्ट को निष्पत्ति देने वाली जो technology है, वो अगले कई दशकों तक उपलब्ध भी नहीं होगी।
और मैंने आपको कहा था, 20 साल को लें, जिसके बाद हमारी नदियाँ सूखने लग जाएँगी। climate crisis हमारे सर पर खड़ी है कि आपको अब कुछ दशकों के भीतर ही निपटा देंगे। और यहाँ कहा जा रहा है कि इतने trillion dollar लगाकर के एक काल्पनिक technology बनाई जाएगी।
जिसके द्वारा पृथ्वी और सूरज के बीच में एक छतरी लगा दी जाएगी और वो छतरी सूरज की गर्मी को पृथ्वी तक आने से रोक देगी। और ऐसी कोई technology आज तक है नहीं।
जिन वैज्ञानिकों ने स्वयं यह paper निकाला था और पहली बार इस प्रकार का प्रस्ताव दिया था, उन्होंने खुद ही बोल दिया आगे जाकर के कि ये जो हम बोल रहे हैं, यह असंभव है करना। करा ही नहीं जा सकता। ना जाने कितने तरीकों से असंभव है।
@aravind Conspiracy enthusiasts govt has finally again agreed to the originally in principle accepted cjp demands and the protest is being called off now. that was the whole point. There might be political motivations for sure but there are issues in our country too
Sending lots of love to the Apple community on my last day as CEO. My title changes tomorrow, but the love I have for the Apple community never will. Thank you for being a constant source of inspiration. My gratitude is endless, and I’m excited for the next chapter!
नेपाल बाढ़: एक चेतावनी
एक तारीख़ नोट कर लीजिए: 2050। उस साल हिमालय की नदियों के साथ कुछ ऐसा होगा जो पिछले 10,000 सालों में नहीं हुआ और उसके बाद जो होगा, वो आपके बच्चों की पूरी ज़िंदगी तय करेगा।
वैज्ञानिक इसे कहते हैं पीक वॉटर। समझिए। गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र - इन नदियों में पानी दो जगह से आता है। एक, मॉनसून की बारिश। दो, हिमालय की बर्फ़ का पिघलना। बारिश मौसमी है। दो-चार महीने, पर बर्फ़ साल भर पिघलती है। यही वह चुपचाप बहती धारा है जो गर्मियों में भी नदी को ज़िंदा रखती है। इसीलिए गंगा सदानीरा है, हमेशा जल देने वाली।
अब खेल समझिए। गर्मी बढ़ रही है तो ग्लेशियर तेज़ पिघल रहे हैं। तेज़ पिघलेंगे तो नदियों में पानी बढ़ेगा और यही हो रहा है। अभी नदियाँ उफान पर हैं। बाढ़ें बढ़ रही हैं। पर ग्लेशियर कोई अनंत भंडार नहीं है। एक दिन वो इतना सिकुड़ जाएगा कि तेज़ पिघलने पर भी उससे कम पानी निकलेगा। वही मोड़ है पीक वॉटर। उसके पहले हर साल पानी बढ़ता है। उसके बाद हर साल घटता है और वैज्ञानिकों का अनुमान है कि गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र के लिए वो मोड़ आएगा 2050 के आसपास, 25 साल दूर। यानी आज जो बाढ़ें दिख रही हैं, वह समृद्धि का नहीं, अंतिम उफान का संकेत है।
दिया बुझने से पहले सबसे तेज़ जलता है और 2050 के बाद का दृश्य - बारिश तब भी होगी, बल्कि और उग्र होगी, पर वह 4 महीने की है। बाकी 8 महीने जो बर्फ़ संभालती थी, वो बर्फ़ घट चुकी होगी तो नई सच्चाई होगी: जुलाई में प्रलय, मार्च में प्रयास, बाढ़ और सूखा एक ही साल में, एक ही नदी में।
सोचिए उस खेती का क्या होगा जो हजार साल से नदी की समय पाबंदी पर खड़ी है। उन शहरों का, उन उद्योगों का, उन 2 अरब लोगों का, जिनका जीवन इसी भरोसे पर टिका है कि नदी कल भी वैसी बहेगी जैसी आज बही।
अब गहरा प्रश्न। हमें 25 साल पहले बताया जा रहा है। तारीख़ तक बताई जा रही है। फिर भी हम नहीं रुक रहे। क्यों? क्योंकि भोग का स्वभाव ही यही है। वह भविष्य को देखने नहीं देता। जिसे अभी एक और चीज़ चाहिए, वो 2050 की क्या सोचेगा? मन कहता है, अभी तो पानी खूब है। और यही मूर्छा है। जेब से पूँजी जा रही हो और आदमी नक़दी देखकर खुश हो। इससे बड़ा अंधापन क्या होगा? नदी पलटने में 25 साल बचे हैं। मन पलटने में कितने लगेंगे? यह आप तय करेंगे।
@CaptShaktiLumba many pilots in India unfortunately have to also notice,quite often,empty seats upfront or sometimes even an empty cabin in business class, while they continue to be not allowed there for some strange reason, even while in uniform :(
@app_settings So true. Have been using it since 2019 still as good as new. Constantly reminds of one of the major reasons we all love apple products. Such a benchmark device