आशुतोष रांका CJP के उसी गुंडों के साथ आए थे, जो भारत में नेपाल बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करना चाहते थे।
जो संसद को जलाना चाहते थे
उनकी हिम्मत तो देखिए, वे राष्ट्रवादी स्थानीय ग्रामीणों को "BJP के गुंडे" कह रहे हैं।
हर दिन CJP की असलियत परत-दर-परत सामने आ रही है। इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें।
#FIR
कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, आस्कर फर्नांडिस जो पिछले दिनों कैंसर से पीड़ित थे, देश विदेश में हर स्तर का महंगे से महंगा इलाज करवाने के बाद भी मौत सामने देखते अंततः मेरठ के नजदीक एक सनातन आश्रम में भर्ती हुए।
वहां पर गौमूत्र सेवन के इलाज से इन्होंने अपने कैंसर पर विजय प्राप्त की। इस बारे में उनके द्वारा पार्लियामेंट में दी गई जो जानकारी है उसके अनुसार
ऑस्कर फर्नांडिस ने गोमूत्र के सहारे कैंसर पर विजय तो प्राप्त की ही इसके साथ-साथ योग-प्राणायाम के सहारे अपने घुटनों के दर्द से पूरी तरह से निजात प्राप्त की
और ईसाई होने के बावजूद सारा जीवन आश्रम में रहकर वहां सेवा देने का संकल्प लिया।
आप स्वयं सुनिए पार्लियामेंट में ऑस्कर फर्नांडीज़ को ....
लेकिन आज उनके ही नेता संसद में गोमूत्र का मजाक उड़ा रहे है।
जय माता दी
दोस्तो 🙏
अखिर कब तक?
एक विस्फोटक जानकारी है। यह तो आपको पता होगा कि Meta India के ग्लोबल हेड को कल बुलाया था संसदीय समिति ने और फिर उन्होंने माफी भी मांग ली। इतनी तक खबर अलग समाचार माध्यमों में चल चुकी है।
लेकिन बैठक के अंदर क्या हुआ वह जानकारी हम आपको दे रहे हैं।
हुआ यह कि अश्विनी वैष्णव, जो कि आईटी मिनिस्टर हैं, वह सामने बैठे हुए थे। अश्विनी वैष्णव ने पूरा अल्गोरिदम दिखाकर Meta India के ग्लोबल हेड को यह कहा कि आप लोग जान-बूझकर कुछ आपत्तिजनक कंटेंट प्रमोट कर रहे हैं इंडिया में।
और आप विश्वास नहीं करेंगे कि Meta India के ग्लोबल हेड ने यह स्वीकार किया कि हम चाइल्ड पॉर्नोग्राफी यानी बच्चों के साथ यौन संबंध वाली जो वीडियोस होते हैं, उसको हम भारत में प्रमोट करते हैं।
और फिर जब सारे सबूत पेश किए गए, तो Meta India के ग्लोबल हेड ने वहां पर माफी मांग ली।
पर बात सिर्फ माफी की नहीं थी। अब इसके बाद शुरू हुआ अगला प्रकरण। संसदीय समिति और आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह रही लिस्ट 180 इन्फ्लुएंसर्स की।
जी हां, 180 इंस्टाग्राम के इन्फ्लुएंसर थे जिनको 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन को प्रमोट करने के लिए बकायदा पैसे दिए गए थे।
और पैसे तीन एजेंसियों के द्वारा दिए गए थे। और यह पूरे सबूत के साथ मार्क ज़ुकरबर्ग की टीम और उनके सहयोगियों को बताया गया कि आपने यह काम किया है।
दरअसल, भारत का एक केंद्रीय मंत्री Meta की साजिश का शिकार हुआ। Meta ने 180 इन्फ्लुएंसर्स को प्रमोट किया पैसे लेकर। यह बात स्वीकार किया है मार्क ज़ुकरबर्ग की टीम ने।
धर्मेंद्र प्रधान को हटाना सिर्फ छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि Meta जैसी कंपनियों की एक बड़ी साजिश भी थी।
@majorgauravarya@ajeetbharti@chitraaum@Republic_Bharat
#bharat #save
माननीय केंद्रीय गृह मंत्री महोदय,
भारत सरकार, नई दिल्ली
@AmitShah@AmitShahOffice
विषय: हालिया कार्यक्रम में हुई कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों एवं गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी घटनाओं की निष्पक्ष जांच तथा कठोर कार्रवाई हेतु प्रार्थना।
निवेदन है कि हाल ही में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के संबंध में अनेक गंभीर आरोप एवं वीडियो सोशल मीडिया तथा विभिन्न माध्यमों पर सामने आए हैं।
यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है।
अतः आपसे निवेदन है कि निम्नलिखित बिंदुओं की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए—
●कार्यक्रम के आयोजन एवं उससे जुड़े वित्तीय स्रोतों की जांच की जाए। यदि करोड़ों रुपये का खर्च हुआ है, तो उसकी फंडिंग का स्रोत क्या था?
■कार्यक्रम में शामिल व्यक्तियों का सत्यापन किया जाए तथा यह जांच हो कि क्या उनमें से किसी का आपराधिक रिकॉर्ड था।
■बड़ी मात्रा में पत्थरों या अन्य सामग्री के कथित रूप से घटनास्थल तक पहुंचने की जांच की जाए।
■कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ (Molestation) या अन्य अपराधों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
●यदि प्रधानमंत्री, संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों अथवा अन्य नागरिकों के विरुद्ध अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग हुआ है, तो संबंधित कानूनी धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जाए।
●यदि किसी धर्म, देवी-देवताओं, भगवान श्रीराम, ब्राह्मण समाज, भारत राष्ट्र अथवा किसी समुदाय के विरुद्ध घृणा फैलाने वाले बयान दिए गए हैं, तो उनकी विधिसम्मत जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
●यदि किसी प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधि, हिंसा भड़काने, अलगाववाद को बढ़ावा देने या अन्य गैरकानूनी कृत्य के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों पर भारतीय कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
●डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया पोस्ट, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड एवं वित्तीय लेन-देन सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए।
यदि जांच के दौरान यह आशंका हो कि आरोपी देश छोड़ सकते हैं, तो कानून के अनुसार उनके पासपोर्ट जब्त करने अथवा अन्य आवश्यक प्रतिबंधात्मक कदम उठाने पर विचार किया जाए।
महोदय, देश का प्रत्येक नागरिक चाहता इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सामाजिक सौहार्द के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
आपकी सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा के साथ।
भवदीय,
[email protected]@DelhiPolice@PMOIndia@AlternateMediaX
अब तो योगी जी प्रदेश को नशामुक्त घोषित कीजिए, देखिए स्कूली बच्चे और महिलाएं कितना परेशान हैं शराबियों से। आप प्रदेश को नशामुक्त घोषित कीजिए, हमारा भगवती मानव कल्याण संगठन आपका पूरा सहयोग करेगा और अवैध शराब की बिक्री भी नहीं होने देगा। @myogiadityanath@myogioffice@Sandhya_Bscp
🔶 SNI BREAKING NEWS | ललितपुर
🔶 नियमों को ताक पर रखकर संचालित शराब की दुकान के विरोध में विद्यार्थियों का प्रदर्शन
🔶 करीब एक दर्जन छात्र-छात्राओं ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
🔶 मानकों के विपरीत संचालित शराब की दुकान को स्थानांतरित करने की उठाई मांग
🔶 विद्यार्थियों का आरोप - मंदिर के पास शराब की दुकान से मोहल्ले में बन रहा अराजक माहौल
🔶 कोचिंग आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को शराबियों से हो रही परेशानी
🔶 इससे पहले भी मोहल्लावासियों ने शराब की दुकान हटाने की मांग को लेकर दिया था ज्ञापन
🔶 प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग
🔶 सदर कोतवाली क्षेत्र के इलाइट हरदीला मोहल्ले का मामला
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📍 Lalitpur, Uttar Pradesh
Reported By: Sunil Jain
@upexcise@deo_lalitpur@lalitpurpolice
“मास्टर” इस देश का वो महान प्राणी है,
जिसे सरकार हर काम के लिए याद करती है
बस पढ़ाने के समय छोड़कर।
कभी पोलियो की बूंद पिलाओ,
कभी जनगणना करो,
कभी चुनाव में रातभर ड्यूटी दो,
और फिर पूछो—
“देश के बच्चे विश्वगुरु क्यों नहीं बन रहे?”
एक शिक्षक छुट्टी मांगने जाता है,
तो ऐसे खड़ा होता है जैसे अपराधी माफी मांग रहा हो—
“साहब… पत्नी बहुत बीमार है… एक दिन की छुट्टी मिल जाती…”
और दूसरी तरफ भाषण चलता है—
“शिक्षा राष्ट्र की रीढ़ है।”
अरे भाई, रीढ़ को ही रोज़ झुकाओगे
तो राष्ट्र सीधा कैसे खड़ा होगा?
चाणक्य अगर आज होते,
तो शायद किसी ब्लॉक ऑफिस में फाइल ढूंढ रहे होते।
द्रोणाचार्य आज होते,
तो ऑनलाइन पोर्टल पर उपस्थिति भर रहे होते।
और चंद्रगुप्त?
वो कोचिंग सेंटर की फीस जमा कर रहा होता।
जिस देश में “टीचर बनना” आख़िरी विकल्प माना जाए,
वहां “महान राष्ट्र” का सपना
सिर्फ मंचों की तालियों में अच्छा लगता है।
जिस दिन इस देश का सबसे प्रतिभाशाली युवक कहेगा—
“मुझे शिक्षक बनना है,”
उस दिन सच में क्रांति शुरू होगी।
क्योंकि राष्ट्र संसद से नहीं,
कक्षा से बनता है।
⚠️ शर्मनाक और अमानवीय!
गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर अंगों की खरीद-फरोख्त करने वाले दरिंदों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इंसानियत के नाम पर चल रहा यह काला धंधा सीधा-सीधा हत्या के समान है।
🔴 ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए।
🔴 हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि ऐसी गतिविधि दिखते ही तुरंत रिपोर्ट करे।
🚨 चुप रहना भी अपराध को बढ़ावा देना है।
आवाज उठाइए, जागरूक बनिए।
#StopOrganTrafficking #Justice #WakeUpIndia #CrimeAgainstHumanity
@GautamKhattar गौतम जी,ऐसे केवल मेरे गुरुदेव 'श्री शक्तिपुत्र जी महाराज' हैं। उन्होंने शिखर से शून्य की यात्रा तय की है ताकि वो अपने शिष्यों को शून्य से शिखर तक पहुंचा सकें।केवल वो ही हैं जो समाज से छुआछूत,जात-पात को मिटाने की बात करते हैं।समाज को नशामुक्त व मांसाहार मुक्त रहने की बात कहते हैं।
@bobby_shabnam@AnilYadavmedia1 अमीरों के क्या सिद्धांत होते हैं मोहतरमा, गरीब की तो मजबूरी होती है कि वो सिद्धांतों पर नहीं चल सकता, फिर भी गरीब स्वाभिमानी होता है। जिस तरह की बात तुमने गरीबों के लिए X पर लिखी है वो बेहद निंदनीय है और मैं इसका विरोध करता हूं।
क्लास KG और 6th की चंद किताबों की कीमत 9215 रुपये। अभी कुछ किताबें और कॉपी पूरी लेनी हैं। दुकानों पर बंडल बनकर तैयार हैं। आपको अलग से कुछ भी नहीं मिलेगा। सरकार इस बेलगाम और सुनियोजित लूट पर रोक क्यों नहीं लगा रही? क्योंकि ये मसला लोअर और मिडिल क्लास के लोगों का है। सरकार को अच्छे से पता है कि इस क्लास का आदमी अच्छी शिक्षा के लिए पेट काटकर बच्चों को पढ़ाएगा, क्योंकि वह इस क्लास के बंधन से मुक्त होने की चाहत रखता है। बस, सरकार और स्कूल इसी का फायदा उठा रहे हैं। पहले एक ही किताब से कई बच्चे पढ़ लेते हैं। आगे वाली क्लास में पढ़ने वाले गाँव के बच्चों से पहले ही बोले देते थे कि अगले साल किताब चाहिए। लेकिन शिक्षा के डकैतों ने इस प्रथा को बंद करवा दिया। अब बच्चों से किताबों में लिखवाया भी जाता है ताकि वह अगले साल काम ना आए। हर साल किताब और प्रकाशक के नाम बदल दिए जाते हैं। लेकिन अफ़सोस कि इस पर बातें नहीं हो रहीं। स्कूल खुलते जी NCERT के किताबें बाज़ार से गायब हो जाती हैं। सब मिलीभगत है। सनद रहे, अगर शिक्षा और स्वास्थ्य में लूट बंद हो जाए तो आम और मिडिल क्लास की आधी मुसीबतें ख़ुद ब ख़ुद ख़त्म हो जायेंगी।