जंतर मंतर की भीड़ को विशुद्ध छात्रों की भीड़ बताने वाले लोगों को "ढोंगी पत्रकार" कहिए. इंटरनेट पर न्यूज़ के नाम पर व्यूज़ और फिर उसी व्यूज के सहारे खुद को मसीहा बताने वालों को इस भीड़ के भीतर छुपा हुड़दंग भी If and But के साथ ही नजर आएगा.
बात 20 जुलाई की भी नहीं है, दरअसल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और फिर सोनम वांगचुक के अनशन का मंच सजते ही, छात्रों के मुद्दों की आड़ में मोदी का कपार फोड़ने पर आमदा रहने वाली जमात ने वहां अपना डेरा डालना शुरू कर दिया था. 20 जुलाई को जो कुछ भी हुआ वो बहुत सोची समझी रणनीति के तहत हुआ. GenZ की एक बड़ी भीड़ को उद्वेलित करके दिल्ली के जंतर मंतर बुलाया गया, फिर उस भीड़ को बिना किसी नेतृत्व या संरक्षण के दिल्ली की सड़कों पर लाठी खाने छोड़ दिया गया. निर्दोष-निहत्थों का खून बहा और अब उस खून के नाम पर एक भीड़ और खून बहाने पर तुली है. ये भीड़ उन्हीं लोगों की है जो मोदी, मोदी सरकार, बीजेपी और RSS की विचारों को मानने वाले लोगों से नफरत करते हैं, नफरत ऐसी कि उन्हें नोच खाये.
इस भीड़ को दिल्ली पर कब्ज़ा करने से रोका जाना चाहिए.
ये प्रोटेस्ट अब पुरी तरह से मोदी विरोधी बन चुका है l एक विशेष समुदाय ने हाईजैक कर लिया है बच्चों की आड़ में देश में अब कुछ बड़ा करने की साजिश चल रही है l ये बात इंटेलीजेंस को ज्यादा पता होगा l सरकार को अब कुछ करना चाहिए l #देशभक्तिआंदोलन@ajeetbharti@BJP4India
@TheNewspinch सबसे गन्दी पत्रकारिता आप लोग कर रहे हो l views ke liye one साइडेड ho l andolon to aata jata rahega lekin आपकी सोच याद रखी जाएगी l हिन्दू आंदोलन n is desh me चालू ho जाये l फिर लाइव कवरेज करने आयेंगे ?
पत्रकारों के साथ पिछले 2 दिनों में चाहे जंतर-मंतर पर या फिर पटना में जो कुछ हुआ है.... वो ये बताने के लिए काफी है इस भीड़ में 10 फीसदी वो बच्चे हैं जिनके साथ बुरा हो रहा है बाकी 90 फीसदी वो भीड़ है जो केजरीवाल और चंद्रशेखर रावण जैसे लोग प्रायोजित कर रहे हैं। गुंडे हैं ये।
People get fined for overspeeding, wrong parking, no seatbelt and many other violations.
But no government official is ever punished for robbing citizens of their basic dignity on the road.