जिसे माँ समझकर यह नन्हा बछड़ा लोहे की दीवार से लिपट गया… उसे क्या पता था कि वहाँ माँ नहीं, सिर्फ एक तस्वीर है। 💔
तस्वीर से दूध पीने की कोशिश करता यह मासूम शायद हमसे पूछ रहा है— “अगर गाय हमारी माँ है, तो उसकी औलाद को उसकी माँ से क्यों छीना जाता है?”
गौ-रक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार और कथित गौ-रक्षकों से आज यह नन्हा बछड़ा जवाब मांग रहा है,
गौ-रक्षा सिर्फ नारे लगाने से नहीं होती,
माँ से उसके बच्चे को बचाने से होती है।
आज इस मासूम की आँखों में इंसानियत का सबसे बड़ा सवाल है, “मेरी माँ मुझे कब मिलेगी?” 🥺
आकांक्षी जनपद के शिक्षक भी अपने परिवार के साथ रहने का हक रखते हैं। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की वरिष्ठता के आधार पर पारदर्शी एवं न्यायसंगत अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की मांग पूरी की जाए। 🙏
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