@RailMinIndia apki train ki kya durdasha hai dekhiye aap… ek train apse on time nahi chal rahi or baat karte ho vishv guru banane ki…@AshwiniVaishnaw jawab do
युवा और नई गुलामी-
जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था, तब देश दो तरह के लोगों को देख रहा था।
एक तरफ़ वे लोग थे जिन्होंने अपनी जान और भविष्य देश के नाम कर दिया — जैसे भगत सिंह, महात्मा गांधी, विनायक दामोदर सावरकर और बाल गंगाधर तिलक।
इन लोगों ने जेलें सही, फाँसी के फंदे को गले लगाया, लेकिन गुलामी स्वीकार्य नहीं की,उसी समय दूसरी तरफ़ कुछ लोग ऐसे भी थे जो अंग्रेजों के फेंके हुए टुकड़ों के लिए उनके मुखबिर बन जाते थे। वे अपने ही लोगों पर नज़र रखते थे, सूचनाएँ देते थे और सत्ता की चापलूसी में अपना स्वाभिमान बेच देते थे।
इतिहास की यही तस्वीर आज किसी और रूप में हमारे सामने फिर दिखाई देती है।
आज का युवा, जिसे समाज का सबसे जागरूक और सवाल पूछने वाला वर्ग होना चाहिए था, वह धीरे-धीरे चापलूसी की संस्कृति में फँसता जा रहा है।
जनता का सेवक कहलाने वाले नेताओं को आज कई युवा “बॉस” कहकर संबोधित करते हैं, जैसे वे लोकतंत्र के प्रतिनिधि नहीं बल्कि किसी कंपनी के मालिक हों।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होता है, लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि बहुत-से युवा अपने ही जनप्रतिनिधि से सवाल पूछने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते।
सवाल पूछने के बजाय वे सुबह-शाम बस एक ही काम में व्यस्त रहते हैं — नेताजी के साथ फोटो खिंचवाना, सोशल मीडिया पर पोस्ट करना और उसी को अपनी उपलब्धि समझ लेना।
यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि लोकतंत्र की असली ताकत जागरूक नागरिक होते हैं, न कि अंधभक्ति करने वाले समर्थक।
अगर युवा केवल तस्वीरों और जय-जयकार में ही संतुष्ट हो जाएगा, तो फिर समाज में बदलाव की उम्मीद किससे की जाएगी?
आज के युवाओं को यह याद रखने की जरूरत है कि भगत सिंह, आज़ाद,तिलक,सावरकर जैसे लोगों ने सत्ता से सवाल पूछने का साहस दिखाया था।
उन्होंने सत्ता की चापलूसी नहीं की, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का रास्ता चुना।
इसलिए आज का सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि युवा किस नेता के साथ फोटो खिंचवा रहा है, बल्कि यह है कि क्या वह अपने अधिकारों और समाज के सवालों के लिए आवाज़ उठा रहा है या नहीं।
क्योंकि इतिहास हमेशा याद रखता है कि
किसने सत्ता की चापलूसी की और किसने सच बोलने की हिम्मत दिखाईं
#yuvaneta @DainikBhaskar
अश्विन एक महान खिलाड़ी हैं अगर वो चाहते तो इस टेस्ट सीरीज के बाद सन्यास ले सकते थे लेकिन इससे टीम मैनेजमेंट पर दवाब बनता और टीम उनको एक मैच खिला देती और वो किसी पर अहसान नहीं बनना चाहते थे @vikrantgupta73@rawatrahul9
If New Zealand makes 330 runs in their first innings then they will not lose this test match, that's for sure. Take the screenshot
#INDvNZ#ViratKohli#IndianCricketTeam