सिगरेट पीना बुरी आदत हो सकती है; बुरे व्यक्त���त्व की निशानी कतई नहीं है।
सुभाष चन्द्र बोस ने ऑस्ट्रिया की युवती एमली शेंकल से विवाह किया था जिसका विरोध उसी RSS ने यह कहकर किया था कि कोई विदेशी औरत एक भारतीय नही बन सकती और तब पण्डित नेहरू सामने आए और कहा कि सुभाष चन्द्र बोस ने जिस युवती से विवाह किया है भारत उसका सम्मान करेगा। आज वही RSS उन सुभाष की चरण वंदना में मशगूल रहता है जिन सुभाष ने अपनी फौज में एक टुकड़ी का नाम "नेहरू ब्रिगेड" रखा और एक टुकड़ी का नाम रखा "गांधी ब्रिगेड" था।
पण्डित नेहरू कौल गोत्र के कुलीन कश्मीरी ब्राह्मण थे पर आज भारत का ब्राह्मण उनसे क्यों नफरत करता है क्योंकि उन्होंने यह कहा था कि मैं मंदिर नही बांध बनवाऊंगा, तभी से पण्डित नेहरू जी का विरोध इन ब्राह्मणों ने करना आरंभ किया अन्यथा अगर कोई एक भी दूसरी ऐसी वजह होती कि जिससे राष्ट्र के प्रति उनकी मूल भावना में तिल मात्र भी उदाशीनता होती तो माना कि 1947 में महात्मा गांधी ने पण्डित नेहरू को देश सौंप दिया था पर 1951-52 तथा 1956 और 1961 के आम चुनावों में जनता उन्हें भारी बहुमत के साथ स��-माथे पर नही विराजती।
आजाद हिंद फौज के सैनिकों को नेता जी की मौत के बाद जेल में डाल दिया था अंग्रेजों ने तब पण्डित नेहरू जी ने काली कोट पहनकर वकालत किया अंग्रेजों से लड़े और उन सैनिकों को ब्रिटिश कैद से रिहा कराया। आज उन्ही नेहरू को सुभाष के विरुद्ध खड़ा कर राजनीति की जाती है, इसकी वजह सिर्फ यह है कि नेहरू जी के जाने के बाद किसी ने नेहरू जी की विशालता को आगे आने वाली पीढ़ी के बारे में कुछ बताया ��ी नही।
जबकि उन्ही सुभाष के बारे में किताबों में हमे पढ़ाया गया कि बोस महान देशभक्त और क्रांतिकारी थे और यह किताबें कांग्रेस ने ही पढ़ाई ऐसे में हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हम नेहरू जी के महान कार्यों से भारत को अवगत कराएं।
"मित्रों, क्या 120 करोड़ के देश में ओलंपिक मेडल नहीं मिल सकता? अरे सिर्फ़ सेना के जवानों को ये काम दिया जाये...तो 8-10 मेडल तो हमारे सेना के जवान लेकर के आ सकते हैं!" -मा. CM मोदी.
इस इंसान के पास PM बनने से पहले हर प्रॉब्लम को सॉल्व करने की टेक्नीक थी। पता नहीं PM बनने के बाद किसने इस पर लाल जादू कर दिया, बेचारा सारी टेक्न��क भूल गया 🙄
आज बाल गंगाधर तिलक का जन्मदिन है इसका कोई एक काम बता दो जो राष्ट्रहित में किया है, इन्हें ब्राह्मणवादी इतिहासकारों ने क्रांतिकारी बताया क्योंकि यह ब्राह्मण थे 🔥
1889 में, बंगाल में नाबालिग लड़की फूलमोनी दासी की मौत हो गई; शादी की रात उसके 35 वर्षीय पति ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे, जिससे उसे गंभीर आंतरिक चोटें आईं और उसकी मौत हो गई,
इस घटना पर हुए आक्रोश के कारण 'ए�� ऑफ़ कंसेंट एक्ट, 1891' बना, जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार माना गया, बाल गंगाधर तिलक ने Age of consent act 1891 का विरोध किया यह कहकर कि यह हमारे हिन्दू धर्म के खिलाफ़ है,
बाल गंगाधर तिलक ने विधवाओं के पुनर्विवाह पर भी आपत्ति जताई और इसे हिंदू धर्म की परंपराओं में दखल माना, तिलक ने महिलाओं की वैदिक शिक्षा पर भी आपत्ति जताई, उन्होंने महात्मा फुल�� द्वारा बहुजनो के लिए खोले गए स्कूलों को भी राष्ट्र के लिए खतरा बताया ।
आपका सरनेम कहाँ से आया...
बहुत सारे सरनेम हमारे गौत्र नहीं हैं, किसने शुरू किया? यह कोई ज़्यादा पुराना नहीं है।
शर्मा, वर्मा, चौधरी, पटेल.... ये सब सिर्फ़ 150 साल पुराने हैं, कोई पुश्तैनी परंपरा नहीं।
इसे शुरू किया था अंग्रेज़ों ने, आपकी नाक नापकर दिए, टैक्स वसूलने के लिए दिए गए यह उपनाम।
जिसे इन नामों पर नाज़ हो, हक़ीक़त जान लें; यह अंग्रेज़ों द्वारा एक तरह का अपमान था जिसे आज ��प शान समझते हैं।
भारत में गौत्र चलते थे, सरनेम नहीं।
1871 में देश में पहली जनगणना हुई थी। सबके जाति-धर्म-पेशा लिखने की कवायद थी, जो कामयाब नहीं हुई।
1881 में दूसरी कोशिश हुई, हर्बर्ट रिज़ले इसके कमिश्नर बने।
नाक और खोपड़ी के साइज़ नापकर नई तरकीब लगाई गई।
नाक की चौड़ाई और सिर के साइज़ पर समाज को विभक्त कर दिया गया।
#IndianHistory
मौत के अगले दिन इनमे से एक शहीद सैनिक के भाई ने ट्विटर डीएम में सम्पर्क किया था।
नाम, ला��� की कॉफिन में फ़ोटो और छोड़ने आये फौजी दल की तस्वीरे दी। उस वक्त देश के रक्षा मंत्री संसद में बयान दे रहे थे कि ऑपरेशन सिंदूर में कोई भारतीय सैनिक नही मरा।
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शहीद के भाई चाहते थे कि इस पर पोस्ट लिखूं, सबको बताऊं। मगर जब देश युद्ध मे हो, तो वह वक्त फौज और नेतृत्व से, डिस्प्यूट करने का नही होता।
तो यदि वे इस मौत को छुपाना चाहते ��ैं,
तो यही सही।
मैंने वह पोस्ट नही लिखी। मगर हृदय में बोझ रहा। आज सरकार ने एक नही, 6 मौते कबूल ली हैं। देर सवेर गिरे विमानों की सँख्या भी पब्लिक डोमेन में आ जायेगी।
पर आर्मी सर्कल्स में तो पहले पता होगा सबको। क्या बीती होगी फौजियों के दिलों पर। हम मरें, और शहादत की कृतज्ञता तक यह देश नही दिखाता।
जब यह सरकार जाएगी तो उनके मेमोयर्स भी आएंगे। जाने क्या क्या खुलासे हों। जो भी होगा, शॉकिंग होगा। ���र्मनाक होगा।
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मगर जनता के लिए इसके फौरी तौर पर अर्थ समझिए। पहलगाम अटैक, पुलवामा अटैक के बाद हुआ। दोनों ही मामलों में इसके कलप्रिट पकड़े नही जा सके। हां, पाकिस्तान पर चटपट हमला कर दिया गया।
पहली बार, बालाकोट स्ट्राइक एक सरप्राइज थी। क्योंकि क्रॉस बॉर्डर एरियल अटैक के उदाहर��� पहले नही थे। सिन्दूर के समय यह सरप्राइज खत्म हो चुका था।
अबकी बार दुश्मन तैयार था।
चीनी के दिये सेटेलाइट सपोर्ट और मिसाइलों के साथ... (जो आगे भी रहेगा)
हमारे लोग मरे, विमान खोए। कुछ हासिल किए बिना युद्ध विराम कर लिया। शहादते बेकार हो गयी। उनके नाम छुपाए।
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आतंकी खत्म हो गए हैं, या उनकी हिम्मत टूट गयी,ऐसा कहना बचपना होगा। ये लोग, आतंकी हमले रोक पाते नही, कलप्रिट्स को पकड़ पाते नही। यह हुआ इंटेलिजेंस का, इन्वेस्टिगेशन का फेलियर..
अब भविष्य में आतंकी हमला हुआ, तो एडे बेड़े कराची पे हमला करने की हिम्मत भी ये नही कर सकेंगे। याने सैन्य विकल्प खत्म..
वैश्विक कूटनीति के स्तर पर मामला पहले खत्म है।सिन्दूर के बाद थरूर सहित तमाम दल देश दुनिया घूमें। और नतीजा सिफर रहा। ईरान युद्ध के बाद पाकिस्तान ऊंचे लेवल पर बैठा है। । तो कूटनीति भी नहीं जीरो।
क्या बचा??
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बन्द मुट्ठी लाख की होती है।
उसका भय होता है।
हर कवच विदीर्ण है। सारी मुट्ठियाँ खोल दी गई, अब वे खाक की हैं। पाकिस्तान पहले से ज्यादा निर्भय है। और भारत-
तथ्य और सत्य छुपाने वाला निर्बल देश।
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इन बहादुरों की शहादत छुपाकर रखने वाले लोगो को लानत देना बेकार है।
उन्हें चुनने वालो को जरूर लानत दें। जिन गालीबाज बड़बोलों के हाथों इस देश, सेन��� और भारत की अस्मिता मलिन हो चुकी है।
अभी तो हमे और जलील होना है।
फिलहाल आइये, इन शहीदों के लिए 2 मिनट का मौन रखें। इनके परिवारों को हमारी (विलम्बित) सांत्वना पहुँचे।
देश के इन शहीदों को कोटि कोटि प्रणाम।
🙏
सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह भारतीय सैनिकों के नामों की पहली बार आधिकारिक घोषणा की है
◆ इन नामों को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अमर कर दिया गया है
◆ शहीदों के नाम और उनके यूनिट
1) सूबेदार मेजर पवन कुमार- मुख्यालय 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड
2) राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र- 4 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री
3) लांस नायक दिनेश कुमार- 5 फील्ड रेजिमेंट
4) एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक- 851 लाइट रेजिमेंट
5) हवलदार सुनील कुमार सिंह- 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी
6) सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु सेना पदक- 39 विंग
#OperationSindoor | Operation Sindoor | Martyr
राम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राय जी ने अनीता भारद्वाज जी से चांदी की काकभुशुंडि यह कहकर जमा करवा ली कि अंदर कैमरा मना है, फोटो-रसीद बाद में व्हाट्सएप कर देंगे बहन जी आज तक लेटर लिख रही हैं, पर जवाब नदारद है। अ�� वह पूछ रही हैं कि आखिर वो दान गया कहाँ
लगता है त्रेतायुग के काकभुशुंडि जी तो अमर थे पर कलयुग में चांदी वाले काकभुशुंडि जी बिना रसीद के ही अंतर्ध्यान हो गए
क्या आपमें से किसी ने मंदिर परिसर में इन चांदी की काकभुशुंडि जी को देखा है? या चंपत राय जी के वादे की तरह वो भी सिर्फ कागजों (यानी ख्यालों) में ही हैं? 👀
अमेरिका की खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने नए दस्तावेज जारी किए हैं, जिसमें बताया गया कि डॉक्टर एंथनी फाउची ने ही चीन की वुहान लैब को कोरोना वायरस पर खतर��ाक रिसर्च के लिए करोड़ों का फंड दिया था. जब इस लैब से वायरस लीक होकर पूरी दुनिया में महामारी के रूप में फैला, तो फाउची ने खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस सच को छुपाया.
#Coronavirus #COVID19 #AnthonyFauci #TulsiGabbard #WuhanLab
पूरी खबर: https://t.co/m51K1sdNc7
"2.5 करोड़ की कार से 45 रुपये के गमले चोरी किए"
◆ CM योगी ने मंच से जताई नाराजगी
◆ "एक बार तो मेरे मन मे आया था कि उसकी फोटो मैं चौराहे पर लगवाऊं!"- CM योगी
@myogiadityanath | #CMYogi | #viral
रामपुर में व्यापारी सुनील रस्त��गी ने एक ही गोली से खुद को और अपनी पत्नी को खत्म कर लिया। 45 वर्षीय पत्नी नेहा को कैंसर था। इलाज में पैसे खत्म हो चुके थे। इससे वे बेहद निराश थे। टूट गये थे। साचिए अपने किसी सबसे करीब को इसलिए मार देना पड़ा क्योंकि इलाज के लिए पैसे नहीं थे। सोचिए, क्या गुजरी होगी उस इंसान पर। दो दिन पहले लखनऊ के पीजीआई में एडमिट एक युवक ने ब्लेड से खुद का गला काटकर आत्महत्या कर ली। उसे लीवर कै���सर था और पैसों की कमी की वजह से इलाज नहीं करवा पा रहा था।
ये महज चंद घटनाएं हैं जो खबरों में हैं। सच तो यह है कि कैंसर जैसी बीमारी इंसान को मानसिक ही नहीं, आर्थिक रूप से तोड़ देती है। बावजूद इसके मरीज के बचने की गारंटी भी नहीं होती। सरकार को कैंसर जैसी बीमारी के इलाज के लिए विशेष फंड का प्रबंध करना चाहिए। कैंसर को महामारी घोषित किया जाना चाहिए। 2015 में भारत में इसके गभग 14 लाख मरीज थे जो 2024 ���ें लगभग 16 लाख हो गये। 2045 तक ये संख्या 25 लाख के आसपास पहुंच सकती है। हर साल लगभग 8 से 9 लाख मरीजों की जान चली जाती है। इसका इलाज इतना महंगा है कि कोई अगर बच ही गया तो उसके पास कुछ और नहीं बचता। ऐसे में मरीज मौत को गले लगा लेना ज्यादा बेहतर समझता है।
इंजीनियर अजय सिंह भोपाल एयरपोर्ट से दिल्ली की फ्लाइट लेने पहुंचे। जाँच ने दौरान बै��� में रखे अमचूर को एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर ने हेरोइन और ड्रग्स बता दिया। इसके बाद अजय को जेल भेज ��िया गया। फोरेंसिक रिपोर्ट 57 दिन बाद आई, तब तक अजय जेल में ही रहे। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की फोरेंसिक जांच व्यवस्था पर सख़्त टिप्पणी करते हुए अजय सिंह को 10 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है।
मामला 7 मई 2010 का है। सैंपल की जाँच मध्य प्रदेश में नहीं हो पायी क्योंकि उनके पास टेस्टिंग की सुविधा नहीं थी। फिर सैंपल हैदराबाद भेजा गया।
अजय को 2 जुलाई को रिहा किया गया था। सवाल यह है कि जब आ��के यहाँ जाँच ही नहीं हो पा रही तो विभाग में लाखों रुपये की सैलरी उठाने वाले कर्मचारी क्यों रखे गए हैं?
उपरोक्त चित्र में दो लड़कियां बिकनी में हैं!
1..एक भाजपा की सांसद है,, उसकी सैकड़ों पिक्स बिकिनी में होंगी" मोदी जी के राज में 2014 में आजाद हुई है,, मोदी जी का नाम लेने से पहले नाम के आगे "यशस्वी " लगाना नहीं भूलती!
2.. दूसरी वाली ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया मोदी जी से एक सवाल कर लिया!
अब भारत का मीडिया एक सुर में दूसरी लड़की को टूल किट
विदेशी एजेंट बेशर्��� संस्कार विहीन बता रहा है! 😊
असल में ये लोग बेशर्मी ओर संस्कार बिकिनी पहनने से नहीं..
यशस्वी नेताजी से सवाल पूछ लेने की जुर्रत से डिसाइड कर रहे हैं!
कमाल के नंगे ओर हल्के लोग हैं!
#godimediacomedy !
आपका नाम समीर वानखेड़े है , आप 2008 बैच के IRS अधिकारी हैं।
आपने 2021 में उन्होंने क्रूज़ शिप ड्रग केस में बड़ी कार्रवाई की थी।
इसी केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी हुई थी।
लेकिन इसके बाद मामला सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहा।
इस केस के बाद समीर वानखेड़े पर द���ाव, विवाद और राजनीतिक हमला शुरू हो गया।
उन्हें NCB से हटाकर चेन्नई भेज दिया गया।
बाद में ट्रिब्यूनल ने उनके ट्रांसफर को गलत, मनमाना और पक्षपातपूर्ण बताया।
यानी जिस अफसर ने कार्रवाई की, उसी अफसर को सिस्टम ने साइडलाइन कर दिया।
फिर 2025 में सरकार ने उनके खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी।
वह भी उस घटना के लगभग तीन साल बाद।
जनवरी 2026 में ट्रिब्यूनल ने इस चार्जशीट को रद्द कर दिया।
ट्रिब्यूनल ने इसे दुर्भावन��� और प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा माना।
लेकिन सरकार दिल्ली हाई कोर्ट चली गई और वहां से वह आदेश पलट गया।
अब पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार ने उनके खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त करने से पहले उन्हें जवाब देने का मौका नहीं दिया।
यह कोई छोटी बात नहीं है।
किसी भी अफसर के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।
यही प्राकृतिक न्याय का मूल सिद्धांत है।
नोट : समीर वानखेड़े ने अपना काम किया।
उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए!!
भारत इस समय ऐसे देशों में से एक है जहां दुनिया के सबसे गर्म शहर मौजूद हैं. 21 अप्रैल के डेटा के मुताबिक, दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 भारत में हैं.
मौसम विभाग का कहना है कि 22 अप्रैल से 24 अप्रैल तक लगातार गर्मी में इजाफा होगा. इस दौरान अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस त�� जाने की उम्मीद है.
तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाए, तो उसे हीटवेव कहते हैं. इस दौरान तेज चलने वाली हवाएं बहुत अधिक गर्म हो जाती हैं जिससे वो 'लू' का रूप ले लेती हैं. जिसकी चपेट में आने से तबियत खराब हो सकती है.
दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के शहरों का नाम शामिल है.
पूरी खबर: https://t.co/ZO5phNxehd
हाउ ही फेल टू बिकम अवर लीडर।
1917 की एक सुबह, जज साहब कुर्सी पर विराजमान थे। कटघरे में खड़े उस अधनंगे शख्स से पूछा- व्हाट्स योर प्ली??
संक्षिप्त जवाब मिला - आई प्लीड गिल्टी।
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चंपारण में शांति भंग करने का आरोप था। गांधी को इलाका छोड़ने के आदेश थे। जाने से इनकार किया, तो गिरफतार हुए।
अब कटघरे मे तनकर अपराध स्वीकार रहे थे। जज ने रास्ता निकाला- तुम्हे 100 रु की जमानत पर छोड़ा जाता है।
गांधी बोले- पैसे तो नही दूंगा। जेल भेजिए।
बाहर जनसमुद्र ठाठें मार रहा था। जज ने मजबूरन, बिना जमानत रिहा कर दिया। इस पल में दक्षिण अफ्रीका से ��ौटा वकील,
इस देश का लीडर बन गया।
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कुछ बरस बाद दो लड़कों ने असेंबली में बम फेंका।
भागने का मौका था। पर वे रुके, गिरफ्तार हो गए। अगले दिन अखबारों में उनका फोटो छपा।
कई महीनों तक वही नाम छपता रहा। भगतसिंह ने वकील नही लिया। कटघरे को मंच बना लिया। ��जा ए मौत हुई।
पर भगतसिंह आज भी जिंदा है।
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मुकदमा राहुल पर हुआ।
न हत्या!! न भ्रष्टाचार!! न डकैती!!
चोर को चोर कहने का अपराध था।
अधिकतम सजा हुई, सांसदी गई। ये राहुल का सुनहरा मौका था, चूक गए। रास्ता पकड़ा- वकील, दलील और अपील।
नतीजा- एक उबाऊ राहत।
क्या होता, अगर तुरन्त सरेंडर करते?? जेल जाते,
अपील अपील का खेल वहीं से खेलते।
और जब लौटते.. ??
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गांधी के साथ हुआ था। जब दोबारा 1922 में राजद्रोह मुकदमे में अपराध स्वीकारा। कहा- हूँ राजद्रोही!!
भेजो जेल।
जज ने सचमुच जेल भेज दिया।
6 साल की सजा हुई।
पर जब लौटे, तो सीने पर बैज ऑफ ऑनर था। जेल यात्रा का टैग, ऐसी वो इज्जत जो हर कोई पाना चाहता था। गांधी ने सबको आसान रास्ता दिया।
नमक बनाओ, केवल 15 दिन जेल जाओ।
चटपट लौटकर अपने इलाके का गांधी बन ज���ओ।
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फिर तो अंग्रेज सरकार की तमाम जेलें, गांधी के अनुयायी मैन्युफैक्चर करने की फैक्ट्री बन गयी।
सोचिये, अगर गांधी जमानत ले लेते??
उनके वकील एंटीसिपेटरी बेल की याचना लेकर हाईकोर्ट सुप्रीम भागते। 32 मुकदमों में आवेदन लेकर, याचक बने घूमते। तो आततायी सत्ता से लड़ने को हजारो गांधी कहाँ से आते??
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राहुल चूक गए। और उनकी बनाई लीक पर पवन खेड़ा भी हैं। यह बात काग्रेस का एक एक कार्यकर्ता वॉच कर रहा है।
सोच रहा है कि जेल, बैज ऑफ ऑनर नही है। पवन खेड़ा के पास तो महंगे वकील हैं, बच निकलेंगे। लेकिन पर यही आरोप हम चौराहों पर दोहराएं, जनता तक पहुचायें।
तो फंस जाएंगे।
वे हिमंता की अहंकारी ललकार से खौफ खाकर भयभीत हैं। वे गिरफ्तार होकर पेले जाने से, पेड़ा बन जाने से डर से हिले हुए हैं।
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क्या होता- तब राहुल दम से गिरफ्तार होते।
तो आज खेड़ा दम से गिरफ्तार होते। पीछे द��्जन भर बड़े नेता वही कागज लहराकर, वही आरोप दोहराते। खुद पर FIR की मांग करते, जेल जाते।
उनके पीछे 500- 1000 नेता, विधायक, सांसद, प्रवक्ता यही दोहराते। हर महामानव की धो-धोकर मानहानि करते। थाने जाकर खुद पर ही FIR लिखवाते, गिरफ्तारी देते।
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दरअसल डरा हुआ नेता, मरा कैडर बनाता है।
गांधी को मालूम था- हिंदुस्तान की रिहाई का रस्ता, जेल की चहारदीवारी से होकर गुजरता है।पर इस राह पर, सबसे आगे आगे उन्हें खुद चलना ���ोगा।
जमानत लेने वाले, लाखो मरजीवड़े पैदा नही कर सकते। आज भी राहुल की फौज जेलें ही खड़ी करेंगी, प्रवक्ता- और डिबेट नही।
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मुकदमा मंच है। मौका है।
पत्रकार, कार्टूनिस्ट, स्टैंड अप कामेडियन, नेता-सबको यह रेजीम थोक में अवसर मुहैया करा रहा है। लेकिन इस मंच का इस्तेमाल तब शुरू होगा, जब सबसे बड़े नेता अगुआई करेंगे।
जब राजद्रोह, मानहानि, और मखौल उड़ाने के लिए वे भर भरकर ��ेल जाएंगे। रेजीम FIR करने से डरेगा, कितनो को जेल भरेगा?
नेता वह जो सजा को ऑनर बना दे। चोरों की सदारत में चल रहे रेजीम को चोर कहने की सजा सबसे पहले भुगते। और जब तलक ये नही होगा..
ही विल फेल टू बिकम अवर लीडर।