@UPPCLLKO की बैठक में चेयरमैन द्वारा टीजी–2 कर्मचारियों के संबंध में“दलाल”जैसी टिप्पणी आपत्तिजनक एवं निंदनीय है । टीजी 2 कर्मचारियों के सम्मान व मनोबल पर यह सीधा आघात है
संघ तत्काल सार्वजनिक खेद एवं सम्मानजनक स्पष्टीकरण की मांग करता है
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निजीकरण एक वरदान या अभिशाप -
वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार एवं ऊर्जा प्रबंधन उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन के अंतर्गत पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल डिस्कॉम की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है बिजली कर्मियों द्वारा भी अलग अलग ग्रुप में विरोध किया जा रहा है दबी जुबान में लोगो के अंदर कही न कही चर्चा का विषय है कि क्यू न सभी संगठन पूर्व की भांति एक बैनर तले आंदोलन नहीं कर पा रहे हैं कुछ लोगों द्वारा इसका मुख्य कारण 2023 में हुई हड़ताल में लिखित समझौता न होने के कारण बड़ी संख्या में कार्यवाही होना बताया जा रहा है आज भी बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी जो 2023 के हड़ताल में निकाल दिए गए थे दर दर की ठोकरें खा रहे है यह सर्वज्ञात है कि आज भी संविदा कर्मचारियों का लगातार शोषण जारी है मात्र 8 से 10 हजार रुपए पाने वाले संविदा कर्मचारी अपनी जान की बाजी लगाकर प्रतिदिन सुरक्षा उपकरणों,ट्रेनिंग, संसाधनों के अभाव में कार्य कर किसी तरह बिजली व्यवस्था चला रहे हैं नेता जी से लेकर बड़े बड़े अधिकारी बड़ा बड़ा किताबी ज्ञान बताकर अपनी जिम्मेदारी अपने नीचे वालो पर कार्यवाही कर तौबा कर ले रहे है जबकि जमीनी स्तर पर क्या समस्याएं हैं यह सभी को पता है।
कुछ दिन पहले योगी सरकार ने निविदा कर्मचारियों के लिए एक अलग निगम बनाने की बात कही गई है जिसमें उनके लिए न्यूनतम वेतन 16 से 20 हजार रुपए तक की बात कही जा रही है जिसके लागू होने से भी संविदा कर्मचारियों को एक जीने का सहारा मिल सकता है।
निजीकरण या पीपीपी मॉडल पर चेयरमैन पॉवर कॉरपोरेशन द्वारा भी कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहने की बाते अपने पत्र एवं FAQ में कही गई है लेकिन कहीं न कही बिजली कर्मचारी उनपर विश्वास कायम नहीं कर पा रहे हैं क्यूंकि कुछ दिनों से पॉवर कॉरपोरेशन में अपने समझौते लागू करने की प्रथा खत्म हो गई है नई निजी कंपनियों के आने से बड़ी मात्रा में सरकारी कर्मचारियों की छटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृति एवं सरकारी नौकरियां समाप्त होगी जोकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ा झटका है निजी कंपनियां आते ही एक बार फिर संविदा कर्मचारियों के वेतन के बराबर अलग अलग पदों पर नई भर्तियों होने की उम्मीद है जिससे एक सम्मानजनक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है ।
सरकार कहीं न कहीं ये साबित करने में लगी है कि निजीकरण से निरंतर एवं निर्बाध बिजली देना संभव होगा परन्तु वर्तमान में उत्तर प्रदेश में नोएडा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आज भी उत्तर प्रदेश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से कई घंटे कम बिजली मिल रही है कोई भी निजी क्षेत्र घाटे में कार्य नहीं कर सकता है उनका एक मात्र लक्ष्य मुनाफा कमाना होगा उसके लिए उनको चाहे कुछ भी कारण पड़े वर्तमान में निगम यदि घाटे में है तो ऐसी स्थिति में तत्काल मुनाफा कमाना इन्फ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाकर नहीं किया जा सकता है इसलिए तात्कालिक तौर पर बिजली के दाम बढ़ने तय माने जा रहे हैं जिससे आम आदमी,किसानों की जेब कट सकती है या सरकार इसकी भरपाई करे जो कि अभी सब्सिडी के माध्यम से कर रही है परन्तु इस सब्सिडी को भी ऊर्जा प्रबंधन ने घाटे के तौर पर दिखाया है ।
बिजली यूनियन के बड़े पदाधिकारी बताते हैं कि वर्तमान में ऊर्जा निगमों में कोई घाटे पर नहीं है परंतु जानबूझकर यह घाटा दिखाया जा रहा है जिससे औने पौने दामों पर बिजली निगम की बेशकीमती परिसंपत्तियों को बेचा जा सके । विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति सहित अन्य संगठन जैसे उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत अपभोक्ता परिषद्, जूनियर इंजीनियर संगठन,तकनीकी एकता कर्मचारी संघ एवं अन्य मजदूर संघों ने अपना विरोध दर्ज करा रहे है कई संगठनों ने ऊर्जा प्रबंधन को निजीकरण वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है परन्तु ऊर्जा प्रबंधन इससे बेखबर होकर निजीकरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
निजीकरण से किसे फायदा होगा या नुकसान ये तो आने वाला समय ही बताएगा परन्तु बिजली कर्मियों के विरोध के आगे ऊर्जा प्रबंधन को निजीकरण करना इतना आसान नहीं होने वाला है आने वाली गर्मियों को देखते हुए भी सरकार बिजली व्यवस्था में किसी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है लगातार ऊर्जा मंत्री जी एवं प्रबंधन द्वारा डिस्कॉम की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
निजीकरण से बिजली विभाग में नौकरी पाने के लिए पढ़ाई कर रहे बेरोजगार युवा, उनको पढ़ा रहे कोचिंग संस्थान, और अपना पेट काटकर उनको पढ़ाई के लिए पैसे देने वाले गरीब अभिभावक,कर्मचारी सबका भविष्य बर्बाद होने के कगार पर है। मुख्यमंत्री जी न्याय कीजिए।निजीकरण वापस लीजिए।
@myogiadityanath
पावन पर्व महाकुंभ में बिजलीकर्मी भी अपना योगदान दिए हैं जिस बिजली विभाग को "व्यापार" के रूप में प्रशासनिक बाबुओं ने सरकार को समझा कर रखा है
इस महाकुंभ में एक एक बिजलीकर्मी मां गंगा की सौगंध ले चुके हैं कि जान गंवाना पसंद करेंगे लेकिन अपने घर को बिकने नहीं देंगे
@myogiadityanath
@myogiadityanath विद्युत कर्मियों द्वारा दिन-रात लगकर महाकुंभ के इसअलौकिक दृश्य का अंतिम रूप दिया गया है,यह वही विद्युत कर्मी हैजिनका भविष्य अंधकारमय होने वाला है पावर कार्पोरेशन प्रबंधन मिलकर uppcl का निजीकरण करने जा रहे हैआपसे प्रभावित हस्तक्षेप की मांग है,जिससे आपकी जनता के बीच छवि धूमिल ना हो
आखिरकार पावर कॉरपोरेशन जल्दबाजी में किसको लाभ पहुंचाने के लिए बिजली का निजीकरण कर रहा है ? इस निजीकरण से किसको फायदा होने जा रहा है ? जबकि सबको पता है कि भारत सरकार की रिवैंप स्कीम के तहत उत्तर प्रदेश के बिजली ढांचे में सुधार के लिए मात्र 2 वर्षों में 40000 करोड़ से अधिक खर्च हो चुका है इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद निजीकरण करने का क्या मतलब है यह सीधा-सीधा जनता के पैसे को खर्च करके अपने चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का षड्यंत्र है इस बिजली के निजीकरण रूपी घोटाले की निष्पक्ष तरीके से सीबीआई से जांच कराई जाए तो बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे, यह बिजली का निजीकरण नहीं बल्कि पूरे देश का सबसे बड़ा घोटाला होने जा रहा है जिसका बिजली का आम उपभोक्ता, किसान और बिजली कर्मी पूरी मजबूती के साथ डटकर विरोध कर रहा है। माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि जन विरोधी, किसान विरोधी, व कर्मचारी विरोधी बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को व्यापक जनहित में निरस्त किया जाए।
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उपभोक्ता परिषद के वेबीनार में सैकडो की संख्या में पूरे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं ने शामिल होकर उपभोक्ता परिषद को दी बधाई कहा पहले चरण की लडाई उपभोक्ता परिषद ने जीता पीपीपी मॉडल के आंकड़ों पर खुली सब की पोल और मामला फिलहाल अधर में। अगले चरण की लडाई के लिए उपभोक्ता परिषदतैयार।
निजीकरण के खिलाफ लखनऊ की महापंचायत में दक्षिणांचल व पूर्वांचल निजीकरण फैसले के खिलाफ पारित प्रस्ताव का उपभोक्ता परिषद् अध्यक्ष ने किया समर्थन और रखी अपनी बात